महाराष्ट्र में सियासी विलय की सुगबुगाहट: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी के एकीकरण पर तोड़ी चुप्पी, कहा- फैसला होने के बाद ही बोलेगी भाजपा
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ हफ्तों से जारी भारी उथल-पुथल और अनिश्चितता के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण बयान दिया है। मंगलवार को मुंबई में मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एनसीपी के दोनों धड़ों (अजित पवार गुट और शरद पवार गुट) के बीच एकीकरण या विलय का मुद्दा पूरी तरह से उनके आंतरिक नेतृत्व का विषय है। उन्होंने कहा कि इन दोनों गुटों के नेता स्वयं आपस में बैठकर इस मुद्दे को सुलझा लेंगे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस पर तभी कोई टिप्पणी करेगी जब कोई आधिकारिक निर्णय सामने आ जाएगा।
दरअसल, यह पूरी राजनीतिक हलचल पिछले महीने पुणे के बारामती में हुए एक दुखद विमान हादसे के बाद शुरू हुई है। 28 जनवरी को हुए उस हादसे में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के कद्दावर नेता अजित पवार सहित चार अन्य लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस अपूरणीय क्षति के बाद महाराष्ट्र की राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को न केवल उनकी राजनीतिक विरासत सौंपी गई, बल्कि उन्होंने राज्य के उपमुख्यमंत्री का पद भी संभाला। मुख्यमंत्री फडणवीस ने आज की कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करने के बाद बताया कि सरकार ने दिवंगत नेता को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में सुनेत्रा पवार का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने उल्लेख किया कि सुनेत्रा पवार के मार्गदर्शन में एनसीपी ने हालिया जिला परिषद चुनावों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। फडणवीस ने उनके उज्ज्वल भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की उड़ती खबरों पर सवाल किया, तो मुख्यमंत्री ने बेहद नपा-तुला जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं या गुटों का फिर से एक होना उन पार्टियों के नेतृत्व का विशेषाधिकार है। भाजपा इस प्रक्रिया में तब तक कोई हस्तक्षेप या प्रतिक्रिया नहीं देगी जब तक कि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए।
एनसीपी के भीतर चल रही इस ‘घर वापसी’ की चर्चाओं को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के नेताओं के बयानों ने और हवा दी है। शरद पवार गुट के कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल ही में यह चौंकाने वाला दावा किया है कि अजित पवार के निधन से पहले ही दोनों गुटों के बीच एकीकरण की बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी। इन नेताओं के अनुसार, शरद पवार और अजित पवार के बीच आपसी सहमति बन गई थी और यहां तक कि 12 फरवरी को औपचारिक रूप से फिर से एक होने (विलय) की घोषणा करने की तैयारी भी की जा रही थी। माना जा रहा है कि पार्टी के कार्यकर्ता और जमीनी स्तर के नेता भी विभाजन के बाद से असहज महसूस कर रहे थे और एक मजबूत संगठित शक्ति के रूप में फिर से उभरना चाहते थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजित पवार की दुखद मृत्यु ने एनसीपी के दोनों धड़ों को भावनात्मक रूप से करीब ला दिया है। सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने के बाद शरद पवार ने भी उनके प्रति उदार रुख दिखाया है, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच एक सकारात्मक संदेश गया है। यदि 12 फरवरी को विलय की घोषणा होती है, तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा ऐतिहासिक मोड़ होगा, क्योंकि इससे न केवल विपक्षी एकता को मजबूती मिलेगी, बल्कि सत्ताधारी महायुति गठबंधन के भीतर भी नए शक्ति समीकरण जन्म लेंगे।
फिलहाल, सबकी नजरें शरद पवार और सुनेत्रा पवार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या एनसीपी वास्तव में 12 फरवरी को अपनी पुरानी ताकत के साथ एक मंच पर खड़ी होगी? और यदि ऐसा होता है, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा का अगला स्टैंड क्या होगा? इन सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति की नई दिशा तय करेंगे। मुख्यमंत्री के आज के बयान ने यह तो साफ कर दिया है कि भाजपा फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है और वह एनसीपी के इस आंतरिक घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है।