बंगाल में राजनीतिक संग्राम: ईडी की कार्रवाई, दिल्ली में टीएमसी का जोरदार प्रदर्शन और ममता बनर्जी का शक्ति प्रदर्शन
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों के केंद्र में है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक (I-PAC) के खिलाफ की गई छापेमारी ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस कार्रवाई को आगामी चुनावों से पहले विपक्षी दलों को डराने और उनके चुनावी डेटा को कब्जे में लेने की केंद्र सरकार की सोची-समझी साजिश करार दिया है। दिल्ली की सड़कों से लेकर कोलकाता के राजपथ तक, टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच जुबानी जंग और सड़कों पर संघर्ष तेज हो गया है।
आई-पैक पर छापेमारी और रातभर का घटनाक्रम
इस पूरे विवाद की जड़ें गुरुवार सुबह उस वक्त गहरी हुईं जब प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने कोलकाता के कई ठिकानों पर एक साथ दस्तक दी। मुख्य रूप से निशाने पर थी राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी के लिए चुनावी रणनीतियां तैयार करती है। ईडी के अधिकारियों ने फर्म के प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास और सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय पर सुबह 6 बजे छापेमारी शुरू की।
यह छापेमारी करीब 9 घंटे तक चली, जिसके दौरान भारी संख्या में दस्तावेजों और डिजिटल डेटा की पड़ताल की गई। टीएमसी का दावा है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य भ्रष्टाचार की जांच करना नहीं, बल्कि पार्टी के आगामी रणनीतिक दस्तावेजों और गुप्त डेटा तक पहुंच बनाना है। प्रतीक जैन के परिवार ने इस दौरान गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि ईडी की टीम ने कुछ महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और पेशेवर दस्तावेज ‘चोरी’ किए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन इस घटना ने केंद्र और राज्य की पुलिस के बीच भी असहज स्थिति पैदा कर दी है।
ममता बनर्जी का मोर्चा और तीखी प्रतिक्रिया
जैसे ही छापेमारी की खबर फैली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सक्रिय हो गईं। वह स्वयं प्रतीक जैन के आवास और फिर सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय पहुंचीं, जहां कार्रवाई चल रही थी। ममता बनर्जी ने इस कदम को लोकतंत्र पर हमला करार दिया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ है और बीजेपी हार के डर से केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आई-पैक एक निजी संस्था है जो पेशेवर रूप से पार्टी की सहायता करती है, और ऐसी संस्था पर छापेमारी का अर्थ है कि केंद्र सरकार सीधे तौर पर राजनीतिक दलों के चुनावी प्रबंधन में हस्तक्षेप करना चाहती है। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि वे इस तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाएं। ममता बनर्जी ने घोषणा की कि वह खुद जादवपुर 8बी बस स्टैंड से हाजरा मोड़ तक एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगी ताकि केंद्र सरकार के इन कदमों का जवाब दिया जा सके।
दिल्ली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सांसद हिरासत में
कोलकाता में जब छापेमारी चल रही थी, उसी समय राजधानी दिल्ली में टीएमसी के सांसदों ने मोर्चा खोल दिया। डेरेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा के नेतृत्व में टीएमसी सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचा। सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रतिशोध के लिए कर रहा है।
स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब दिल्ली पुलिस ने सांसदों को वहां से हटने के लिए कहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों के न मानने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ ब्रायन को पुलिस ने जबरन गाड़ियों में बिठाया और संसद स्ट्रीट पुलिस थाने ले गई। हिरासत में लिए जाने के दौरान महुआ मोइत्रा ने दहाड़ते हुए कहा कि पूरा देश देख रहा है कि दिल्ली पुलिस एक चुने हुए सांसद के साथ कैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने संकल्प लिया कि टीएमसी आने वाले चुनावों में भाजपा को करारी शिकस्त देगी। वहीं डेरेक ओ ब्रायन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और जनता का ध्यान खींचते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।
भाजपा का पलटवार: ‘भ्रष्टाचार और टीएमसी पर्यायवाची’
टीएमसी के इन विरोध प्रदर्शनों पर भारतीय जनता पार्टी ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष और सांसद समिक भट्टाचार्य ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन को एक ‘नौटंकी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेता बंगाल की जनता के सामने प्रदर्शन करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं क्योंकि वहां के लोग उनके भ्रष्टाचार से वाकिफ हैं।
भट्टाचार्य ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर टीएमसी भ्रष्टाचार के खिलाफ विरोध करती है, तो राज्य की जनता हंसेगी। उन्होंने याद दिलाया कि टीएमसी के कई बड़े नेता पहले से ही कोयला घोटाले और शिक्षक भर्ती घोटाले जैसे गंभीर मामलों में फंसे हुए हैं। बीजेपी नेता के अनुसार, केंद्रीय एजेंसियां अपना काम स्वतंत्र रूप से कर रही हैं और इसमें राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्वयं फाइलों को छिपाने या छीनने की कोशिश कर रही हैं, जो जांच में बाधा डालने जैसा है। उनके अनुसार, टीएमसी और भ्रष्टाचार अब एक-दूसरे के पर्यायवाची बन चुके हैं।
चुनावी रणनीतियों पर संकट के बादल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आई-पैक पर यह हमला टीएमसी की चुनावी मशीनरी की कमर तोड़ने की कोशिश हो सकता है। चुनाव वर्ष में, रणनीतिक डेटा और वोटरों का विश्लेषण किसी भी पार्टी के लिए सबसे बड़ा हथियार होता है। टीएमसी का आरोप है कि ईडी का असली मकसद इस डेटा को हासिल करना है ताकि बीजेपी को अनुचित लाभ मिल सके।
इस कार्रवाई के बाद टीएमसी के भीतर भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पार्टी का कहना है कि अगर केंद्रीय एजेंसियां निजी रणनीतिक फर्मों को निशाना बनाने लगेंगी, तो निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा ही समाप्त हो जाएगी। फिलहाल, बंगाल में माहौल पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुका है और आने वाले दिनों में ममता बनर्जी की रैलियों के जरिए यह संघर्ष और उग्र होने की संभावना है। कोलकाता की सड़कों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पूरे देश की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी का अगला कदम क्या होगा।