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यूपी चुनाव से पहले ओमप्रकाश राजभर को झटका! सुभासपा के कई पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा, लगाए गंभीर आरोप

चंदौली: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच चंदौली जिले में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के भीतर नाराजगी सामने आई है। पार्टी प्रमुख ओमप्रकाश राजभर से असंतुष्ट कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। नाराज नेताओं ने पार्टी नेतृत्व पर पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाया है।

सुभासपा के वाराणसी मंडल युवा मोर्चा के प्रमुख महासचिव दीपक राजभर ने आरोप लगाया कि पार्टी अपने गठन के समय तय किए गए उद्देश्यों से दूर होती जा रही है। उनके मुताबिक, जिन कार्यकर्ताओं ने दो दशक से अधिक समय तक संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया, उन्हें अब उचित सम्मान और तवज्जो नहीं मिल रही है।

पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप

पार्टी छोड़ने का ऐलान करने वालों में युवा मंडल अध्यक्ष एवं मंत्री प्रतिनिधि बबलू राजभर और वाराणसी मंडल युवा मोर्चा के प्रमुख महासचिव दीपक राजभर समेत कई पदाधिकारी शामिल हैं।

बबलू राजभर ने आरोप लगाया कि जिस समाज के समर्थन से ओमप्रकाश राजभर ने राजनीतिक पहचान बनाई, उसी समाज के लोग आज भी आवास, नाली, खड़ंजा और रास्ते जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन उनका समाधान नहीं हुआ।

बबलू राजभर के मुताबिक, 16 अक्टूबर को अंबेडकर नगर में ओमप्रकाश राजभर से संगठन की कमजोर स्थिति और उसमें सुधार की जरूरत पर चर्चा की गई थी। हालांकि, उनका आरोप है कि इसके बाद भी पार्टी नेतृत्व की ओर से उनसे संपर्क नहीं किया गया।

2027 के टिकट वितरण पर भी उठाए सवाल

सुभासपा छोड़ने वाले नेताओं ने आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि राजभर समाज के वोटों का इस्तेमाल तो किया जा रहा है, लेकिन समाज के लोगों को राजनीतिक हिस्सेदारी मिलने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने टिकट वितरण में कथित सौदेबाजी और बाहुबली नेताओं को उम्मीदवार बनाए जाने की आशंका भी जताई।

दीपक राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और सुभासपा के गठबंधन का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि उस समय पार्टी को मिली 16 सीटों पर कितने राजभर समाज के लोगों को उम्मीदवार बनाया गया था। उन्होंने आशंका जताई कि 2027 के चुनाव में भी टिकट वितरण को लेकर ऐसी स्थिति बन सकती है।

नाराज पदाधिकारियों का कहना है कि अब राजभर समाज अपने हक, हिस्सेदारी और सम्मान को ध्यान में रखकर राजनीतिक फैसले करेगा।

‘आने वाले दिनों में और लोग छोड़ सकते हैं पार्टी’

इस्तीफा देने का ऐलान करने वाले नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्षों तक पार्टी के लिए चंदा जुटाने, गांव-गांव जाकर प्रचार करने और संगठन को मजबूत बनाने वाले कार्यकर्ताओं को नेतृत्व से मिलने तक का मौका नहीं मिलता। वहीं, उनके मुताबिक प्रभावशाली लोगों को संगठन में अधिक तवज्जो दी जाती है।

नाराज नेताओं ने दावा किया कि पार्टी छोड़ने का फैसला केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य कार्यकर्ता भी सुभासपा से अलग हो सकते हैं।

अखिलेश यादव के ऐलान के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की तैयारियां जारी हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी संविधान दिवस के अवसर पर पार्टी का ‘जन-मन का मेनिफेस्टो’ जारी करने की घोषणा की है।

ऐसे राजनीतिक माहौल में सुभासपा के भीतर सामने आई नाराजगी ने पार्टी संगठन और आगामी चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, इस्तीफा देने वाले नेताओं के आरोपों पर खबर लिखे जाने तक ओमप्रकाश राजभर या सुभासपा नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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