नितिन गडकरी का नया अवतार: फराह खान के ब्लॉग में खोले निजी जिंदगी के दिलचस्प राज
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अक्सर अपने बुनियादी ढांचे के क्रांतिकारी प्रोजेक्ट्स और सड़कों के जाल बिछाने के लिए चर्चा में रहते हैं। लेकिन इस बार उनके चर्चा में रहने की वजह कोई हाईवे प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक वीडियो ब्लॉग है। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और कोरियोग्राफर फराह खान के वीडियो ब्लॉग में शामिल हुए गडकरी ने अपनी निजी जिंदगी, खेती के प्रति अपने जुनून और राजनीति को लेकर अपनी नैतिकता के बारे में ऐसी बातें साझा कीं, जो अब तक आम जनता की नजरों से ओझल थीं। इस बातचीत के दौरान उन्होंने न केवल दिल्ली में अपने सरकारी बंगले की दिनचर्या के बारे में बताया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि वह अपनी राजनीतिक विरासत को लेकर क्या सोच रखते हैं।
ऑर्गेनिक खेती में तकनीक का तड़का: 1 किलो का बैंगन और सैटेलाइट से सिंचाई
नितिन गडकरी का खेती के प्रति प्रेम जगजाहिर है, लेकिन फराह खान के साथ बातचीत में उन्होंने इसका तकनीकी और आधुनिक पहलू साझा किया। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर ऑर्गेनिक खेती करती हैं। इस खेती की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वहां एक किलो के बैंगन और एक किलो के प्याज जैसी विशालकाय और शुद्ध पैदावार हो रही है। गडकरी ने बताया कि वे केवल पारंपरिक खेती नहीं कर रहे, बल्कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी सहारा ले रहे हैं। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों की मदद से वे अपने खेतों की सैटेलाइट तस्वीरें निकालते हैं। इन तस्वीरों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि खेत के किस हिस्से को कितनी सिंचाई की जरूरत है, और उसी हिसाब से पानी दिया जाता है। महाराष्ट्र के खेतों में ऑर्गेनिक सब्जियां, अरहर की दाल और चने की दाल उगाई जाती हैं।
दिलचस्प बात यह है कि गडकरी का यह शौक केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। दिल्ली स्थित उनके सरकारी आवास के परिसर में भी वह छोटे स्तर पर खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि वह वहां मिर्चियां और अन्य सब्जियां उगाते हैं। उनके बंगले का वातावरण इतना प्राकृतिक है कि वहां रोज 15-17 मोर कुछ न कुछ खाने के लिए आते हैं। उन्होंने अपने पड़ोसियों का जिक्र करते हुए बताया कि एक तरफ सोनिया गांधी का बंगला है और दूसरी तरफ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का बंगला हुआ करता था।
राजनीतिक विरासत पर कार्यकर्ताओं का हक: बेटों को सख्त हिदायत
परिवारवाद की राजनीति पर अक्सर होने वाली बहसों के बीच नितिन गडकरी ने एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बेटों से साफ कह दिया है कि उनकी राजनीतिक विरासत पर उनके बेटों का कोई हक नहीं है। गडकरी के अनुसार, “जिन कार्यकर्ताओं ने रात-दिन मेहनत करके और अपना खून-पसीना बहाकर मुझे इस मुकाम तक पहुँचाया है, मेरी राजनीतिक विरासत पर केवल उन्हीं का अधिकार है।” उन्होंने कहा कि उनकी संपत्ति और अन्य चीजें उनके परिवार की हो सकती हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में उनका स्थान केवल कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित है।
गडकरी ने अपनी मध्यमवर्गीय जीवनशैली का जिक्र करते हुए कहा कि वे और उनका परिवार एक सामान्य जिंदगी जीते हैं। उनका मानना है कि ईश्वर ने उन्हें उनकी हैसियत से कहीं ज्यादा दिया है और वे उसी में संतुष्ट हैं। नागपुर में अपने घर पर आने वाले हजारों लोगों के बारे में उन्होंने कहा कि वे कोशिश करते हैं कि आखिरी व्यक्ति से भी मिलें, भले ही वह मुलाकात आधे मिनट की ही क्यों न हो।
हाईवे के लिए तोड़ा ससुर का घर: काम के आगे रिश्तों की सीमा
पोडकास्ट के दौरान एक बेहद निजी और रोचक किस्सा तब सामने आया जब गडकरी की पत्नी ने जिक्र किया कि नेशनल हाईवे बनाने के दौरान उनके मायके का घर भी उसकी जद में आ गया था। गडकरी ने मुस्कुराते हुए इस बात की पुष्टि की और बताया कि हाईवे का एलाइनमेंट इस तरह था कि उनके ससुर का घर बीच में आ रहा था। उन्होंने कहा, “काम के बीच में रिश्ते नहीं आते। मैंने वहां चूने की रेखा खिंचवाई और पूरा घर तोड़ना पड़ा।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियम के अनुसार जो मुआवजा बनता था, वह परिवार को दिया गया। यह किस्सा गडकरी की उस छवि को पुष्ट करता है जिसमें वे नियमों और विकास कार्यों को सर्वोपरि रखते हैं, चाहे सामने अपना परिवार ही क्यों न हो।
दिल्ली-देहरादून हाईवे का लक्ष्य: फ्लाइट्स की जरूरत नहीं रहेगी
सड़कों के निर्माण को लेकर अपनी भविष्यवाणियों के लिए मशहूर गडकरी ने एक और बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों के भीतर दिल्ली से देहरादून के बीच चलने वाली फ्लाइट्स का महत्व लगभग खत्म हो जाएगा या वे बंद होने की कगार पर आ जाएंगी। इसका कारण यह है कि दिल्ली-देहरादून हाईवे का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस हाईवे के चालू होने के बाद लोग महज दो घंटे में सड़क मार्ग से देहरादून पहुंच सकेंगे। गडकरी का मानना है कि जब सड़क मार्ग इतना सुगम और तेज होगा, तो लोग एयरपोर्ट जाने, सुरक्षा जांच में समय बिताने और महंगी टिकट लेने के बजाय अपनी कार से सफर करना पसंद करेंगे।