नितिन गडकरी ने दिल्ली में कमर्शियल वाहनों पर ‘ग्रीन टैक्स’ (ECC) खत्म करने की मांग की, कहा- फंड का इस्तेमाल प्रदूषण नियंत्रण में नहीं हो रहा; दिल्ली सीएम से तुरंत रोकने का आग्रह
नई दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले कमर्शियल वाहनों पर लगाए जा रहे पर्यावरण मुआवजा शुल्क (Environment Compensation Charge – ECC) को तत्काल बंद करने की मांग की है। बुधवार को एक कार्यक्रम (India Today इवेंट) में बोलते हुए गडकरी ने इस टैक्स की उपयोगिता और जमा होने वाले फंड के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाए।
गडकरी ने कहा कि उन्होंने नगर निगम (MCD) के साथ बैठक में पूछा था कि प्रदूषण कम करने के नाम पर वसूला जा रहा यह ‘ग्रीन टैक्स’ आखिर कहां खर्च हो रहा है? मंत्री ने बताया, “मैंने निगम से पूछा- पर्यावरण सुधार के लिए आपका क्या योगदान है? जवाब मिला- कोई योगदान नहीं… तो फिर आप यह टोल क्यों वसूल रहे हैं?”फंड का दुरुपयोग, MCD के लिए राजस्व का बड़ा स्रोतगडकरी ने खुलासा किया कि उनके मंत्रालय की जांच में पाया गया कि ECC से जमा होने वाला फंड (वायु गुणवत्ता सुधार के लिए) उस उद्देश्य में खर्च ही नहीं हो रहा है। वहीं, MCD अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह फीस उनके लिए आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।मंत्री ने अनुमान लगाया कि इस टैक्स से सालाना 800-900 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 700-1000 करोड़) जमा होते हैं, लेकिन यह राशि पर्यावरण सुधार कार्यों में नहीं लग रही।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला,
गडकरी ने दिल्ली सीएम से की अपीलजब गडकरी ने टैक्स बंद करने की बात की, तो अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के 2015 के आदेश का हवाला दिया, जिसके तहत दिल्ली में ट्रांजिट ट्रकों पर ECC लगाया गया था ताकि प्रदूषण और ट्रैफिक कम हो। (हाल ही में अक्टूबर 2025 में कोर्ट ने आवश्यक वस्तुओं वाले वाहनों पर छूट भी हटा दी थी।)इस पर गडकरी ने कहा कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री से इस टैक्स को तुरंत रोकने का आग्रह किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि दिल्ली सरकार MCD को सहायता अनुदान के रूप में 800-900 करोड़ रुपये सालाना दे, ताकि इस टैक्स को पूरी तरह खत्म किया जा सके और लोगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हो।
सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप की मांगगडकरी ने आगे कहा कि उनके मंत्रालय ने अधिवक्ताओं से अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप कर मूल आदेश पर पुनर्विचार कराया जाए, ताकि इस कर से होने वाली कठिनाइयों से लोगों को राहत मिल सके।
यह बयान दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्ट सेक्टर और व्यापारियों के लिए राहत की उम्मीद जगाता है, जहां ECC पहले से ही टोल के अलावा अतिरिक्त बोझ माना जाता है। दिल्ली में वायु प्रदूषण एक लगातार चुनौती बनी हुई है, लेकिन मंत्री का तर्क है कि फंड का सही इस्तेमाल न होने से इसका उद्देश्य विफल हो रहा है।मामले पर दिल्ली सरकार या MCD की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन गडकरी के बयान से बहस तेज होने की उम्मीद है।