• February 11, 2026

केरल में सीएसआर फंड के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा: भाजपा के वरिष्ठ नेता ए एन राधाकृष्णन समेत चार पर प्राथमिकी दर्ज, स्कूटर और लैपटॉप दिलाने के बहाने करोड़ों की ठगी का आरोप

तिरुवनंतपुरम: केरल में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड के नाम पर एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। केरल पुलिस ने इस कथित घोटाले के सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ए एन राधाकृष्णन सहित चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया है। यह पूरा मामला एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) के माध्यम से आम लोगों को बेहद कम कीमतों पर स्कूटर, लैपटॉप और सिलाई मशीनें उपलब्ध कराने के नाम पर की गई करोड़ों रुपये की ठगी से जुड़ा है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद से राज्य में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जबकि पुलिस इस नेटवर्क की गहराई तक पहुँचने के लिए जांच तेज कर दी है।

इस हाई-प्रोफाइल मामले की शुरुआत एक महिला की शिकायत के बाद हुई, जिसने आरोप लगाया कि उसे सरकारी और निजी कंपनियों के सीएसआर फंड का लाभ दिलाने का झांसा देकर ठगा गया है। शिकायतकर्ता महिला के अनुसार, उसे यह विश्वास दिलाया गया था कि ‘सोसाइटी फॉर इंटीग्रेटेड ग्रोथ ऑफ द नेशन’ नामक एक एनजीओ के माध्यम से उसे बाजार मूल्य से आधी कीमत पर स्कूटर मिल सकता है। महिला ने बताया कि मई 2024 में उसने इस एनजीओ के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी और उनके द्वारा बताए गए आकर्षक प्रस्ताव के झांसे में आकर कुल 63,500 रुपये की राशि जमा कर दी। हालांकि, महीनों बीत जाने के बाद भी उसे न तो स्कूटर मिला और न ही उसके पैसे वापस किए गए। जब उसने अपने स्तर पर जांच की, तो पता चला कि उसके जैसे सैकड़ों लोग इस योजना के नाम पर ठगी का शिकार हुए हैं।

महिला के बयान और प्राथमिक जांच के आधार पर केरल पुलिस ने भाजपा नेता ए एन राधाकृष्णन के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है। महिला ने अपनी शिकायत में विशेष रूप से राधाकृष्णन का नाम लेते हुए कहा है कि वह इस एनजीओ की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे और उनके नाम तथा प्रभाव का इस्तेमाल लोगों का भरोसा जीतने के लिए किया गया था। पुलिस ने बताया कि इस मामले में राधाकृष्णन के अलावा तीन अन्य प्रमुख लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनमें आनंदु कृष्णन और नेशनल एनजीओ कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन के एन अनंतकुमार शामिल हैं। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने एक सुनियोजित तरीके से राज्य भर में गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को निशाना बनाया।

त्रिक्काकारा पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने मामले की तकनीकी पहलुओं पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि पैसा सीधे तौर पर ए एन राधाकृष्णन के बैंक खाते में जमा नहीं किया गया था। हालांकि, जांच इस बिंदु पर केंद्रित है कि एनजीओ की बैठकों और प्रचार कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति ने किस तरह से इस फर्जीवाड़े को विश्वसनीयता प्रदान की। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह एक संगठित अपराध प्रतीत होता है जिसमें कई परतों में काम किया गया। आरोपियों ने कथित तौर पर यह दावा किया था कि आधी लागत एनजीओ कॉन्फेडरेशन और सीएसआर फंड द्वारा वहन की जाएगी, जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि लाभार्थियों को स्वयं देनी होगी। इसी ‘आधे दाम’ के लालच ने लोगों को इस जाल में फंसने पर मजबूर कर दिया।

घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के विभिन्न जिलों से इसी तरह की कई शिकायतें पुलिस को प्राप्त हो रही हैं। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें केवल स्कूटर ही नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया के नाम पर सस्ते लैपटॉप और स्वरोजगार के लिए सिलाई मशीनें देने का भी वादा किया गया था। शिकायतों के अनुसार, यह गिरोह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में सक्रिय था जहाँ लोग सरकारी योजनाओं और रियायतों के प्रति अधिक उत्सुक रहते हैं। पुलिस का मानना है कि ठगी गई कुल राशि करोड़ों में हो सकती है, क्योंकि नेशनल एनजीओ कॉन्फेडरेशन के बैनर तले कई छोटे-छोटे एनजीओ को इस नेटवर्क से जोड़ा गया था।

इस पूरे प्रकरण पर भाजपा नेता ए एन राधाकृष्णन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सफाई या टिप्पणी सामने नहीं आई है। हालांकि, केरल की राजनीति में इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दलों ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल करके जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले गिरोहों को संरक्षण दे रहे हैं। वहीं, भाजपा के स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश हो सकती है और पार्टी जांच के परिणामों का इंतजार कर रही है। दूसरी ओर, नेशनल एनजीओ कॉन्फेडरेशन के चेयरमैन के एन अनंतकुमार और मुख्य आरोपी आनंदु कृष्णन की भूमिका की भी सघन जांच की जा रही है, जो इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं।

केरल पुलिस ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) के गठन के संकेत दिए हैं ताकि राज्य भर में फैले इस नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। पुलिस अब उन बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया में है, जिनमें ठगी की राशि जमा की गई थी। इसके साथ ही, एनजीओ के पिछले तीन वर्षों के ऑडिट रिकॉर्ड और सीएसआर फंड के दावों की भी जांच की जा रही है कि क्या वास्तव में किसी कंपनी ने उन्हें फंड दिया था या यह सब केवल एक दिखावा था। कानून के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह साबित हो जाता है कि भाजपा नेता ने जानबूझकर इस ठगी में सहयोग किया है, तो उनकी मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं।

फिलहाल, केरल में इस सीएसआर घोटाले ने प्रशासन और जनता दोनों को सतर्क कर दिया है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी ऐसी योजना में निवेश करने से पहले, जो बाजार दरों से अविश्वसनीय रूप से सस्ती चीजें देने का वादा करती हो, उसकी प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें। इस घोटाले के उजागर होने के बाद कई अन्य एनजीओ भी जांच के दायरे में आ सकते हैं जो सीएसआर फंड के वितरण का दावा करते हैं। यह मामला न केवल वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि यह सार्वजनिक जीवन में शुचिता और राजनीतिक नेताओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

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