• January 8, 2026

बाल शोषण को लेकर मीडिया कार्यशाला का आयोजन

 बाल शोषण को लेकर मीडिया कार्यशाला का आयोजन

फारबिसगंज प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित सभागार भवन में बाल शोषण के विभिन्न रूपों यथा बाल विवाह,बाल श्रम,बाल यौन शोषण और मानव तस्करी मुक्त बनाने को लेकर एकदिवसीय मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के साथ डिजिटल मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का आयोजन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रंस फाउंडेशन, यूएस के सहयोग से जागरण कल्याण भारती,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से किया गया।कार्यशाला में जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक सह जिला बाल कल्याण संरक्षण समिति के सदस्य शंभू कुमार रजक,जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक नितेश कुमार पाठक,अपर एसडीओ रंजीत कुमार,प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी सूर्य प्रसाद यादव ने भाग लिया और बाल शोषण के विभिन्न आयामों को लेकर चर्चा किया। कार्यक्रम का संचालन जागरण कल्याण भारती के संजय कुमार ने किया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक शंभू कुमार रजक ने बताया कि बच्चों के लिए स्कूल, स्वास्थ और सुरक्षा जरूरी है।अभिभावक बच्चों को समय दे और स्कूल जाने के लिए प्रेरित करे।उन्होंने कहा कि बच्चों से बालपन नहीं छिनना चाहिए और उसे बाल अधिकार का पालन करने की खुली छूट होनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि बच्चों के बाल अधिकार को लेकर विभिन्न विभागों के साथ समन्वय को लेकर को ऑर्डिनेशन कमिटी बनाई गई है।उन्होंने बच्चों को भयमुक्त घर से ही बनाने के लिए अभिभावकों को परिवार से ही माहौल दिया जाना चाहिए।उन्होंने अक्टूबर माह से जिला में विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के जिला में काम करने की जानकारी दी। वही जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक नितेश कुमार पाठक ने बच्चों से दोस्ताना संबंध बनाने की अपील के साथ उनके अंदर छिपे प्रतिभा को तराशे जाने की वकालत की।बच्चों के बचपन को सुरक्षित करार देने को जरूरत करार दिया।

अपर एसडीओ रंजीत कुमार ने मीडिया की भूमिका पर चर्चा करते हुए कहा कि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ मीडिया है और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर सामाजिक कुरीतियां को दूर करने में शुरू से ही मीडिया ने अपनी अग्रिम भूमिका निभाई है और इसके खिलाफ भी मीडिया को मुखर होने को कहा।उन्होंने बच्चों को घरों से ही प्रारंभिक शिक्षा के रूप गुड और बाद टच की शिक्षा देने के साथ खुलकर बालमन के अनुसार बालपन में जीने की वकालत की।साथ ही उन्मूलन को लेकर गठित कमिटी को सहयोग देने की वकालत की।

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