ओडिशा में बड़ा विमान हादसा: राउरकेला के पास प्राइवेट विमान की क्रैश लैंडिंग
ओडिशा के औद्योगिक शहर राउरकेला में शनिवार, 10 जनवरी को एक बड़ी हवाई दुर्घटना टल गई, जब एक निजी एयरलाइन का नौ-सीटर छोटा विमान लैंडिंग से कुछ ही मिनट पहले हादसे का शिकार हो गया। यह घटना राउरकेला शहर से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जल्दा नामक स्थान पर हुई। विमान में सवार सभी छह लोग इस दुर्घटना में घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। राज्य के वाणिज्य और परिवहन मंत्री बी बी जेना ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान एक निजी ऑपरेटर का था और यह भुवनेश्वर से राउरकेला की अपनी नियमित उड़ान पर था। हालांकि विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी भी जान-माल का भारी नुकसान नहीं हुआ और सभी यात्री सुरक्षित बचा लिए गए।
दुर्घटना का घटनाक्रम: भुवनेश्वर से राउरकेला के बीच की नियमित उड़ान
जानकारी के अनुसार, ‘इंडिया वन एयरलाइंस’ का विमान संख्या C-208 (A-1 नौ सीटर) शनिवार की सुबह भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से राउरकेला के लिए रवाना हुआ था। यह एक नियमित उड़ान थी जो राज्य की राजधानी को स्टील सिटी से जोड़ती है। जब विमान राउरकेला हवाई अड्डे के करीब पहुंच रहा था, तभी अचानक तकनीकी खराबी या अन्य अज्ञात कारणों से पायलट ने विमान पर से नियंत्रण खो दिया। राउरकेला से महज 10 किलोमीटर पहले जल्दा के पास विमान को आपातकालीन स्थिति में क्रैश लैंडिंग करनी पड़ी। बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट के डायरेक्टर प्रसन्ना प्रधान ने बताया कि उड़ान के दौरान सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन लैंडिंग से ठीक पहले यह हादसा हो गया। विमान में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें चार यात्री और दो क्रू मेंबर शामिल थे।
घायलों की स्थिति और पायलट को आई गंभीर चोटें
हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। विमान की क्रैश लैंडिंग इतनी जोरदार थी कि पायलट को गंभीर चोटें आई हैं। परिवहन मंत्री बी बी जेना ने मीडिया को जानकारी दी कि यद्यपि यात्रियों को आने वाली चोटें तुलनात्मक रूप से मामूली हैं और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है, लेकिन पायलट की स्थिति पर डॉक्टर विशेष नजर रख रहे हैं। विमान में मौजूद सभी छह घायलों को स्थानीय प्रशासन और बचाव दल की मदद से तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद यात्रियों की स्थिति खतरे से बाहर है, लेकिन सदमे और आंतरिक चोटों के कारण उन्हें निगरानी में रखा गया है।
स्थानीय लोगों की तत्परता और राहत एवं बचाव कार्य
जैसे ही विमान जल्दा के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ, वहां मौजूद स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मदद के लिए आगे आए। सरकारी बचाव दल के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने विमान के मलबे से यात्रियों को निकालने का काम शुरू कर दिया था। पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचीं और एंबुलेंस के जरिए घायलों को अस्पताल पहुंचाया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि विमान काफी नीचे उड़ रहा था और अचानक तेज आवाज के साथ जमीन से टकरा गया। राहत और बचाव कार्य में स्थानीय प्रशासन की मुस्तैदी की सराहना की जा रही है, क्योंकि समय पर सहायता मिलने से घायलों को अधिक रक्तस्राव और अन्य जटिलताओं से बचाया जा सका।
सरकार की त्वरित कार्रवाई और डीजीसीए को सूचना
राज्य सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। वाणिज्य और परिवहन मंत्री बी बी जेना ने स्पष्ट किया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को इस दुर्घटना के बारे में विस्तृत जानकारी दे दी गई है। केंद्र सरकार की इस नियामक संस्था को सूचित किया गया है ताकि एक उच्च स्तरीय तकनीकी जांच शुरू की जा सके। मंत्री ने यह भी बताया कि ओडिशा सरकार के विमानन विभाग के निदेशक स्वयं दुर्घटनास्थल का दौरा करेंगे ताकि जमीनी हकीकत और सुरक्षा मानकों का जायजा लिया जा सके। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि छोटे विमानों के संचालन में सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।
दुर्घटना के कारणों की जांच: तकनीकी खराबी या मानवीय भूल
हादसे के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए आधिकारिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्राथमिक रिपोर्टों में विमान के इंजन में खराबी या लैंडिंग के समय दृश्यता की समस्या जैसी संभावनाओं पर गौर किया जा रहा है। इंडिया वन एयरलाइंस के इस विशिष्ट विमान C-208 के रखरखाव और उड़ान से पहले की जांच रिपोर्टों को भी खंगाला जाएगा। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या पायलट ने दुर्घटना से पहले एटीसी (Air Traffic Control) को किसी तरह का आपातकालीन संदेश भेजा था। चूंकि पायलट को गंभीर चोटें आई हैं, इसलिए उनका बयान दर्ज होने के बाद ही हादसे की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी।
क्षेत्रीय हवाई संपर्क और सुरक्षा मानकों पर उठते सवाल
यह हादसा एक ऐसे समय में हुआ है जब ओडिशा सरकार और केंद्र सरकार क्षेत्रीय हवाई संपर्क (Regional Connectivity) को बढ़ावा देने के लिए छोटे विमानों और निजी ऑपरेटरों को प्रोत्साहित कर रही है। भुवनेश्वर और राउरकेला के बीच की यह उड़ान उन यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवन रेखा है जो समय बचाने के लिए हवाई मार्ग का चुनाव करते हैं। इस दुर्घटना ने छोटे प्राइवेट विमानों के सुरक्षा प्रोटोकॉल और उनके नियमित रखरखाव पर फिर से बहस छेड़ दी है। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से यात्रियों के भरोसे पर असर पड़ सकता है, इसलिए जांच रिपोर्ट में पारदर्शिता और भविष्य के लिए कड़े सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं।
फिलहाल, दुर्घटनास्थल को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है ताकि मलबे के साथ छेड़छाड़ न हो और जांच टीम को सभी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिल सकें। राज्य सरकार ने घायलों को हर संभव बेहतर इलाज मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में डीजीसीए की रिपोर्ट यह तय करेगी कि क्या इस मार्ग पर उड़ानों के संचालन में किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता है या नहीं।