• January 19, 2026

पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई: टीएमसी आईटी सेल प्रमुख के घर पहुंचीं ममता बनर्जी, केंद्र सरकार पर लगाया जासूसी और डेटा चोरी का आरोप

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई ने भारी उबाल पैदा कर दिया है। गुरुवार को केंद्रीय जांच एजेंसी ने वित्तीय अनियमितताओं और नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के आईटी सेल प्रमुख और इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपीएसी) के प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। यह मामला उस वक्त हाई-प्रोफाइल ड्रामे में बदल गया जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद छापेमारी वाली जगह पर पहुंच गईं। मुख्यमंत्री ने न केवल इस कार्रवाई का विरोध किया, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधे हमले करते हुए आरोप लगाया कि यह छापेमारी पार्टी के गोपनीय डेटा और चुनाव रणनीति को चुराने की एक साजिश है।

छापेमारी और मुख्यमंत्री का अचानक पहुंचना

गुरुवार सुबह ईडी की टीम ने कोलकाता समेत देश के छह राज्यों में 15 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इनमें सबसे प्रमुख ठिकाना टीएमसी के आईटी सेल के रणनीतिकार प्रतीक जैन का आवास और आईपीएसी का कार्यालय था। जैसे ही छापेमारी की खबर फैली, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे को दरकिनार करते हुए प्रतीक जैन के आवास पर जा पहुंचीं। किसी मुख्यमंत्री का केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के दौरान मौके पर पहुंचना भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है।

मुख्यमंत्री के वहां पहुंचने से माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। ममता बनर्जी ने वहां मौजूद ईडी अधिकारियों के सामने ही अपनी नाराजगी व्यक्त की और आरोप लगाया कि यह कार्रवाई जांच के नाम पर राजनीतिक जासूसी है। उन्होंने मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों से कहा कि वह अपनी पार्टी के हितों की रक्षा के लिए वहां आई हैं, क्योंकि एजेंसी का असली मकसद भ्रष्टाचार की जांच करना नहीं, बल्कि टीएमसी के आंतरिक चुनावी दस्तावेजों को हासिल करना है।

ममता बनर्जी के गंभीर आरोप: ‘हार्ड डिस्क और डेटा बचाने पहुंची थी’

छापेमारी वाली जगह से बाहर निकलने के बाद ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने दावा किया कि ईडी के अधिकारी प्रतीक जैन के घर से टीएमसी के आईटी सेल की हार्ड डिस्क, पार्टी के आंतरिक दस्तावेज और आगामी विधानसभा चुनावों से संबंधित संवेदनशील संगठनात्मक डेटा जब्त करने की कोशिश कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों में विधानसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची, पार्टी की रणनीति और बूथ स्तर का डेटा मौजूद है।

ममता बनर्जी ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईडी ने टीएमसी के आईटी प्रमुख के घर पर छापा मारा। क्या अब राजनीतिक दलों के आईटी प्रमुखों के घरों पर छापा मारना केंद्रीय गृह मंत्री का काम रह गया है? वे मेरी पार्टी के दस्तावेज और हार्ड डिस्क जब्त कर रहे थे, जिनमें हमारे उम्मीदवारों का पूरा विवरण था। मैंने हस्तक्षेप करके उन चीजों को वापस ले लिया है और उन्हें जब्त होने से बचा लिया है।” मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया कि ईडी ये सारे गोपनीय दस्तावेज जब्त कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सौंपने की योजना बना रही थी ताकि चुनाव में विपक्ष को अनुचित लाभ मिल सके। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को ‘राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित’ और ‘असांविधानिक’ करार दिया।

जांच का आधार: सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़ा

हालांकि मुख्यमंत्री इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही हैं, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय का पक्ष कुछ और ही है। समाचार एजेंसी एएनआई और ईडी के सूत्रों के मुताबिक, यह छापेमारी सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर किए गए एक बड़े घोटाले से जुड़ी है। जांच एजेंसी का दावा है कि एक संगठित समूह लोगों को सरकारी नौकरियां दिलाने का झांसा देकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा है। वित्तीय अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच के तार प्रतीक जैन और आईपीएसी से जुड़े ठिकानों तक पहुंचे हैं।

ईडी का कहना है कि यह छापेमारी केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश के छह राज्यों में फैले 15 ठिकानों पर की गई थी। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य उस धन के लेन-देन (मनी ट्रेल) का पता लगाना है जो कथित तौर पर फर्जी नौकरी घोटाले के जरिए जुटाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान कुछ डिजिटल साक्ष्य और वित्तीय दस्तावेज मिले हैं जिनका विश्लेषण किया जाना आवश्यक है।

सुवेंदु अधिकारी का पलटवार: ‘जांच में सीधा हस्तक्षेप’

इस पूरे घटनाक्रम पर राज्य में विपक्ष के नेता और भाजपा के फायरब्रैंड नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर पलटवार किया है। सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के छापेमारी स्थल पर जाने को ‘अनैतिक’ और ‘असांविधानिक’ बताया। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठी मुख्यमंत्री का केंद्रीय एजेंसी की कानूनी कार्यवाही में इस तरह बाधा डालना कानून के शासन का अपमान है।

सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी जांच को प्रभावित करने और सबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री और कोलकाता पुलिस आयुक्त का प्रतीक जैन के आवास पर जाना केंद्रीय एजेंसी की जांच में सीधा और नग्न हस्तक्षेप है। ईडी को मुख्यमंत्री के खिलाफ इस बाधा के लिए कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।” अधिकारी ने आगे कहा कि ममता बनर्जी इसलिए डरी हुई हैं क्योंकि जांच की आंच अब उनके करीबी रणनीतिकारों तक पहुंच गई है, जो पार्टी का सारा वित्तीय प्रबंधन देखते हैं।

राजनीतिक बदले बनाम भ्रष्टाचार की लड़ाई

यह छापेमारी पश्चिम बंगाल में एक बार फिर केंद्र और राज्य के बीच चल रहे ‘सत्ता के संघर्ष’ को सतह पर ले आई है। टीएमसी का मानना है कि भाजपा लोकसभा और विधानसभा चुनावों में राजनीतिक रूप से मुकाबला करने में विफल रहने के बाद अब केंद्रीय एजेंसियों का उपयोग करके पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को तोड़ने की कोशिश कर रही है। खासकर आईटी सेल और डेटा मैनेजमेंट को निशाना बनाना टीएमसी की चुनावी मशीनरी को पंगु बनाने का एक प्रयास माना जा रहा है।

दूसरी ओर, भाजपा का तर्क है कि बंगाल में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि हर जांच के तार सीधे सत्ता के गलियारों से जुड़ रहे हैं। चाहे वह शिक्षक भर्ती घोटाला हो, राशन घोटाला हो या अब यह नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़े का मामला, भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के शीर्ष नेता इन सभी में लिप्त हैं।

संवैधानिक संकट और भविष्य की राह

ममता बनर्जी द्वारा ‘हार्ड डिस्क वापस लेने’ के दावे ने एक नए कानूनी विवाद को जन्म दे दिया है। यदि जांच एजेंसी यह साबित कर देती है कि मुख्यमंत्री ने वैध तरीके से जब्त किए जा रहे साक्ष्यों को जबरन रोका या वापस लिया, तो यह एक बड़ा कानूनी मुद्दा बन सकता है। वहीं, टीएमसी इसे निजता के अधिकार और राजनीतिक दल की गोपनीयता के उल्लंघन के तौर पर पेश कर रही है।

आने वाले दिनों में यह मामला अदालत की दहलीज तक पहुंच सकता है। फिलहाल, कोलकाता में तनाव व्याप्त है और टीएमसी कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रतीक जैन के आवास पर हुई इस छापेमारी ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘एजेंसी बनाम सरकार’ की यह जंग अभी और तेज होने वाली है। मुख्यमंत्री का यह कड़ा रुख संदेश देता है कि वह केंद्र के किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं, जबकि ईडी की कार्रवाई संकेत दे रही है कि आने वाले समय में टीएमसी के कई अन्य बड़े चेहरे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *