लोकसभा में बजट पर बरसे अखिलेश यादव: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को बताया ‘डील’ नहीं ‘ढील’, किसानों और उत्तर प्रदेश की उपेक्षा पर सरकार को घेरा
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। बजट पर चर्चा के दौरान उन्होंने न केवल वित्तीय प्रावधानों पर सवाल उठाए, बल्कि हाल ही में अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर आरोप लगाए। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार जिसे ‘ऐतिहासिक डील’ बता रही है, वह वास्तव में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी ‘ढील’ साबित होगी, जिसके गंभीर परिणाम देश के किसानों और छोटे व्यापारियों को भुगतने होंगे।
सपा प्रमुख ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पारदर्शिता और उसके समय (Timing) पर सवाल उठाकर की। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करने का ढोल पीटा है, लेकिन हकीकत में इन समझौतों से देश के सामरिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुँच रहा है। उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि बजट पहले तैयार किया गया या अमेरिका के साथ यह डील पहले फाइनल हुई? यादव ने चिंता व्यक्त की कि इस समझौते के बाद भारतीय रुपये की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बाजार में और कमजोर होगी। उन्होंने तल्ख लहजे में पूछा कि अगर यही समझौता करना था तो सरकार ने इतने वर्षों तक इंतजार क्यों किया और अब अचानक ऐसी क्या मजबूरी थी कि आनन-फानन में राष्ट्रीय हितों की ‘बलि’ दे दी गई।
अखिलेश यादव ने इस व्यापारिक सौदे के कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों का जिक्र करते हुए कहा कि जब सब कुछ विदेशों से ही आयात किया जाएगा, तो देश का अन्नदाता क्या उगाएगा और क्या बेचेगा? उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा करती थी, जो आज तक पूरा नहीं हुआ, और दूसरी तरफ विदेशी कृषि उत्पादों के लिए बाजार खोलकर स्थानीय किसानों की कमर तोड़ने का काम कर रही है। उन्होंने एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का मुद्दा उठाते हुए सरकार को घेरा और पूछा कि एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर और मंडियों के नवीनीकरण की बड़ी-बड़ी बातों के बावजूद किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी क्यों नहीं दी जा रही है।
बजट की दिशा पर प्रहार करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने इसे ‘दिशाहीन’ और ‘उपेक्षितों के खिलाफ’ करार दिया। उन्होंने कहा कि इतने भारी-भरकम बजट पेश करने के बाद भी देश के गरीब, पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों के जीवन स्तर में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। उन्होंने प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों पर सरकार को चुनौती दी और मांग की कि सरकार उन 80 करोड़ लोगों की औसत आय बताए जो आज भी सरकारी फ्री राशन पर निर्भर हैं। अखिलेश ने सवाल उठाया कि क्या विकसित भारत का सपना केवल चंद पूंजीपतियों की आय बढ़ने से पूरा होगा या इसमें गरीब की भी हिस्सेदारी होगी?
उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में बात करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाले राज्य की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री उत्तर प्रदेश से आते हैं, इसके बावजूद केंद्र के बजट में राज्य के लिए किसी बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना या विशेष आर्थिक पैकेज का प्रावधान नहीं है। उन्होंने मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो एक्सप्रेसवे बने भी हैं, वे ‘विकसित भारत’ के मानकों पर खरे नहीं उतरते और पहली बारिश में ही उनकी हकीकत सामने आ जाती है। उन्होंने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई परियोजनाएं केवल कागजों पर चल रही हैं और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर प्रस्तावित योजनाओं के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।
यादव ने बागवानी (हॉर्टिकल्चर) और दुग्ध उत्पादन के सरकारी आंकड़ों को भ्रामक बताते हुए कहा कि सरकार कागजों पर रिकॉर्ड उत्पादन दिखा रही है, लेकिन धरातल पर पशुपालक और किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। उन्होंने अंत में कहा कि यह बजट देश को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय विदेशी आयात पर निर्भर बनाने की एक साजिश है। अखिलेश यादव के इस आक्रामक भाषण ने सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस को और तेज कर दिया है। उनके द्वारा उठाए गए ‘डील बनाम ढील’ के मुद्दे ने सरकार को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया है।