पूर्वोत्तर में भारत की सामरिक शक्ति का नया अध्याय: पीएम मोदी ने मोरान बाईपास एयरस्ट्रिप का किया उद्घाटन, राफेल और सुखोई के गर्जना से कांपा आसमान
डिब्रूगढ़/गुवाहाटी: भारत की सामरिक तैयारियों और बुनियादी ढांचे के विकास में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में मोरान बाईपास पर नवनिर्मित 4.2 किलोमीटर लंबी नेशनल हाईवे एयरस्ट्रिप (Emergency Landing Facility – ELF) का भव्य उद्घाटन किया। चीन की सीमा से महज 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह एयरस्ट्रिप न केवल पूर्वोत्तर भारत की अपनी तरह की पहली सुविधा है, बल्कि यह युद्ध और प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों में भारतीय वायुसेना के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। उद्घाटन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने भारतीय वायुसेना के जांबाज पायलटों द्वारा किए गए अदम्य साहस और सटीक कौशल के प्रदर्शन का अवलोकन किया, जिसने देश की सुरक्षा क्षमताओं की एक सशक्त तस्वीर पेश की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष विमान से नई दिल्ली से सीधे चाबुआ एयरफोर्स बेस पहुंचे और वहां से इसी नव-निर्मित एयरस्ट्रिप पर उतरकर कार्यक्रम स्थल का जायजा लिया। इस दौरान पूरा क्षेत्र वायुसेना के शक्तिशाली इंजनों की गूँज से सराबोर हो गया। वायुसेना के प्रदर्शन की शुरुआत सुखोई-30 एमकेआई के गरजते हुए टेकऑफ के साथ हुई, जिसके पीछे राफेल लड़ाकू विमान ने अपनी अद्वितीय गति और चपलता का प्रदर्शन किया। मात्र 20 मिनट के भीतर वायुसेना के 16 विभिन्न विमानों ने जिस तरह से टेकऑफ, लैंडिंग और ‘टच एंड गो’ का प्रदर्शन किया, उसने उपस्थित जनसमूह और अधिकारियों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। वायुसेना के ‘वर्कहॉर्स’ कहे जाने वाले एएन-32 परिवहन विमान ने भी अपनी उपयोगिता साबित करते हुए सटीक लैंडिंग का प्रदर्शन किया, जो दुर्गम क्षेत्रों में रसद और सैनिकों को पहुँचाने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है।
हवाई प्रदर्शन के दौरान आकाश में सुखोई और राफेल के तीन-तीन विमानों के फॉर्मेशन ने मोरान के आसमान में अपनी ताकत दिखाई। रणनीति के तहत कुछ विमानों ने एयरस्ट्रिप पर सफल लैंडिंग की, जबकि कुछ ने ‘ओवरशूट’ प्रदर्शन के जरिए अपनी युद्धक तकनीक का नमूना पेश किया। इसके अतिरिक्त, भारत में निर्मित स्वदेशी एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) ने विशेष हेली-बोर्न ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। इस ऑपरेशन के तहत कमांडो को तेजी से एयरस्ट्रिप पर उतारा गया, जो यह दर्शाता है कि किसी भी आतंकी हमले या घुसपैठ की स्थिति में भारतीय सेना कितनी तेजी से प्रतिक्रिया दे सकती है। साथ ही, चिकित्सा आपातकाल और राहत कार्यों के लिए मेडिकल इवैक्यूएशन की प्रक्रिया का भी सजीव प्रदर्शन किया गया।
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि मोरान बाईपास पर किया गया यह अभ्यास पूर्वोत्तर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और विस्तृत सैन्य अभ्यास था। उन्होंने जानकारी दी कि लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी को भारतीय वायुसेना के विशेषज्ञों के साथ मिलकर बेहद सूक्ष्मता से डिजाइन किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में यदि मुख्य एयरबेस क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो सैन्य और नागरिक विमानों को बिना किसी बाधा के सुरक्षित तरीके से उतारा और उड़ाया जा सके। यह एयरस्ट्रिप 40 टन वजनी राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों के साथ-साथ 74 टन के भारी-भरकम मालवाहक विमानों का भार सहने में पूरी तरह सक्षम है।
रणनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो यह एयरस्ट्रिप चाबुआ और तेजपुर जैसे प्रमुख एयरबेस के लिए एक वैकल्पिक जीवनरेखा के रूप में कार्य करेगी। चीन की सीमा के निकट होने के कारण इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। किसी भी तकनीकी खराबी या दुश्मन के हमले की स्थिति में यह पट्टी भारतीय सेना को तुरंत जवाबी कार्रवाई करने के लिए मंच प्रदान करेगी। साथ ही, यह दूरदराज के इलाकों में मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगी। इस एयर शो ने न केवल भारतीय वायुसेना की तकनीकी श्रेष्ठता को सिद्ध किया, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के बीच सुरक्षा और देशभक्ति के भाव को और अधिक सुदृढ़ किया।
वायुसेना के पराक्रम को देखने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का कारवां गुवाहाटी की ओर बढ़ा, जहां उन्होंने राज्य के विकास के लिए 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं की सौगात दी। गुवाहाटी के लचित घाट पर आयोजित एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री ने कनेक्टिविटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षा क्षेत्र को मजबूती देने वाली योजनाओं का शुभारंभ किया। इन परियोजनाओं का मुख्य केंद्र ब्रह्मपुत्र नदी पर निर्मित भव्य कुमार भास्कर वर्मा सेतु रहा। लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से बने इस 6-लेन सेतु का उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे असम की नई लाइफलाइन बताया। इस पुल के चालू होने से गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच का सफर, जो पहले घंटों में तय होता था, अब मात्र 7 मिनट में सिमट जाएगा।
कुमार भास्कर वर्मा सेतु इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट नमूना है। इस क्षेत्र की उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, पुल के निर्माण में ‘फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग’ का उपयोग करके ‘बेस आइसोलेशन’ तकनीक अपनाई गई है। यह तकनीक भूकंप के झटकों के दौरान पुल को स्थिर रखने में मदद करती है। साथ ही, इसकी संरचना को दशकों तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए उच्च प्रदर्शन वाले ‘स्टे केबल’ का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष खड़ा करता है। इस पुल के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं तक त्वरित पहुँच प्राप्त होगी।
कनेक्टिविटी के साथ-साथ डिजिटल इंडिया के विजन को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने कामरूप जिले के अमिंगांव में पूर्वोत्तर क्षेत्र के अत्याधुनिक राष्ट्रीय डाटा केंद्र का भी उद्घाटन किया। यह केंद्र पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखने और सरकारी सेवाओं के त्वरित डिजिटल वितरण में रीढ़ की हड्डी का काम करेगा। शिक्षा के क्षेत्र में असम को बड़ी सौगात देते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) गुवाहाटी का भी उद्घाटन किया, जिससे अब असम उच्च शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाएगा।
सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल और सुलभ बनाने के उद्देश्य से पीएम-ईबस सेवा योजना के तहत प्रधानमंत्री ने कुल 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें से 100 बसें गुवाहाटी की सड़कों पर दौड़ेंगी, जबकि शेष बसें नागपुर, भावनगर और चंडीगढ़ के लिए आवंटित की गई हैं। इस पहल से न केवल प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी, बल्कि लगभग 50 लाख नागरिकों को सस्ती और आधुनिक परिवहन सेवा का लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री का यह दौरा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि केंद्र सरकार के लिए ‘एक्ट ईस्ट’ नीति केवल एक नारा नहीं, बल्कि धरातल पर उतरता हुआ सच है। रक्षा से लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक, असम आज एक नए भारत की बुलंद तस्वीर पेश कर रहा है, जो अपनी सीमाओं की सुरक्षा के प्रति जितना सजग है, अपने नागरिकों के विकास के प्रति उतना ही समर्पित है।