लोकरंग 2024 में आकर्षण का केंद्र होंगे पूर्वोत्तर के लोक नृत्य
कुशीनगर के जोगिया जनेबीपट्टी गांव में 15–16 अप्रैल को आयोजित लोकरंग 2024 कार्यक्रम में कई प्रदेशों की लोक संस्कृति देखने को मिलेगी। आयोजन में पूर्वोत्तर के सिक्किम, असम, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश के लोक कलाकार शामिल हो रहे हैं। पूर्वोत्तर के लोक नृत्य आकर्षण के केंद्र में होंगे।
यह पहला अवसर है जब आयोजन में पहली बार, उत्तर-पूरब के दो राज्यों की भागीदारी देखने को मिलेगी । असम का बागुरुम्बा, बोडो और भोरताल नृत्य प्रस्तुत किया जायेगा। सिक्कम की सांस्कृतिक टीम पहली बार आमंत्रित की गई है। ताल म्यूजिक एण्ड डांस अकादमी, नामची, सिक्किम द्वारा तमांग सेलोए मारुनी और कोडा डांस प्रस्तुत किया जायेगा।
राजस्थान के तमाम परंपरागत लोक वाद्य यंत्रों की ध्वनि इस बार लोकरंग में गूंजेगी तो परंपरागत राजस्थानी नृत्य भी देखने को मिलेगा। चंदा लाल कालबेलिया एण्ड पार्टी, जयपुर, राजस्थान को इस बार आमंत्रित किया गया है।भाई विरोध’ और दगा हो गए बालम’ दो नाटक भी मंचित किए जायेंगे,जो परिवर्तन रंगमंडली, जीरादेई, सिवान, बिहार द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत गांव की महिलाएं परंपरागत सोहर गीत से करेंगी। परिवर्तन रंगमंडली, जीरादेई, सिवान, बिहार की टीम इस बार दोनों रात लोकगीतों के अलावा नाटक भी प्रस्तुत करेगी। कुशीनगर जनपद का सुप्रसिद्ध पंवरिया नृत्य और किन्नर नृत्य भी देखने को मिलेगा।
मंगलवार की पत्रकारों से बातचीत में लोकरंग के आयोजक व कथाकार, लेखक सुभाष कुशवाहा ने बताया कि 17 वर्ष पूर्व लोक संस्कृति के संवर्द्धन के लिए यह अभियान शुरू किया गया था। 15 अप्रैल को प्रातः 11 बजे से विचार गोष्ठी कार्यक्रम का शुभारंभ हो जायेगा। लोक संस्कृति के समावेशी तत्व’ विषयक इस गोष्ठी में देश के तमाम प्रसिद्ध साहित्यकार, प्रोफेसर और अध्यापक शामिल होंगे।
देश के जाने माने वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. सदानंद शाही, प्रो. नीरज खरे, प्रो. दिनेश कुशवाह, प्रो. निरंजन सहाय, प्रो. अनिल राय, बी. आर. विप्लवी, प्रो. अनिल सिंह, प्रो. राजेश मल्ल, प्रो. कमलेश वर्मा, डॉ. रवि शंकर सोनकर, प्रो. राहुल कुमार मौर्य, डॉ. आशा सिंह, डॉ. महेन्द्र प्रसाद कुशवाहा, डॉ. विंध्याचल यादव, रामजी यादव, स्वदेश सिन्हा, डॉ. दीनानाथ कुशवाहा, मनोज कुमार सिंह और अशोक चौधरी शामिल होंगे।



