केरल विधानसभा चुनाव: एलडीएफ की ‘हैट्रिक’ का दावा, भाकपा नेता बिनॉय विश्वम ने मुख्यमंत्री पद को लेकर दिया बड़ा बयान
तिरुवनंतपुरम। केरल में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) और विपक्षी यूडीएफ के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इसी कड़ी में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने एक बड़ा दावा करते हुए आगामी चुनावों में एलडीएफ की ऐतिहासिक तीसरी जीत का भरोसा जताया है। विश्वम ने स्पष्ट किया है कि केरल की जनता एक बार फिर वामपंथी विचारधारा और विकास की नीतियों पर मुहर लगाएगी, जिससे एलडीएफ लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर राज्य में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा।
बिनॉय विश्वम ने राजधानी में मीडिया से चर्चा के दौरान गठबंधन की तैयारियों और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन महत्वपूर्ण चुनावों में एलडीएफ का नेतृत्व पूरी तरह से वामपंथी सिद्धांतों और जन-कल्याणकारी नीतियों पर आधारित होगा। जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या पिनाराई विजयन ही अगले कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे, तो विश्वम ने बेहद सधे हुए अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के चेहरे का फैसला चुनाव के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा। उनके अनुसार, गठबंधन के सभी सहयोगी दल नतीजों के आने के बाद एक साथ बैठेंगे और इस विषय पर गहन चर्चा करेंगे।
मुख्यमंत्री पद के चयन की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए भाकपा नेता ने कहा कि एलडीएफ में हमेशा से यह परंपरा रही है कि सबसे बड़ी पार्टी अंतिम निर्णय लेती है। वर्तमान समीकरणों में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) गठबंधन का सबसे बड़ा घटक दल है, लिहाजा मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर माकपा ही लगाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि पिनाराई विजयन की भूमिका आगामी चुनाव प्रचार और गठबंधन की जीत में केंद्रीय रहेगी। विजयन पिछले दस वर्षों से राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं और उनके शासनकाल में अपनाए गए कड़े रुख और जनहितैषी नीतियों ने केरल की राजनीति पर एक गहरी छाप छोड़ी है। विश्वम ने माना कि विजयन के नेतृत्व में सरकार ने जो विकास कार्य किए हैं, वे चुनाव प्रचार का मुख्य आधार होंगे।
केरल की राजनीति में एलडीएफ की तीसरी जीत का दावा करना अपने आप में एक साहसिक बयान माना जा रहा है, क्योंकि दशकों तक केरल में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा रही है। हालांकि, पिनाराई विजयन ने पिछले चुनावों में इस परंपरा को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल कर इतिहास रचा था। अब भाकपा और माकपा मिलकर ‘हैट्रिक’ बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही हैं। बिनॉय विश्वम का मानना है कि विपक्ष के पास वामपंथ के वैचारिक मुकाबले के लिए कोई ठोस आधार नहीं है और जनता एलडीएफ के ‘केरल मॉडल’ के साथ मजबूती से खड़ी है।
चुनावों के मद्देनजर एलडीएफ ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर दिया है। गठबंधन का मानना है कि बीते एक दशक में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हुए सुधार उनकी जीत की गारंटी बनेंगे। वहीं, मुख्यमंत्री पद को लेकर दिए गए विश्वम के बयान को राजनीतिक विश्लेषक गठबंधन के भीतर लोकतंत्र और पारदर्शिता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं। यह बयान यह भी संकेत देता है कि गठबंधन केवल एक व्यक्ति के चेहरे पर नहीं, बल्कि अपनी सामूहिक विचारधारा और प्रदर्शन के दम पर मतदाताओं के बीच जाएगा।
आने वाले महीनों में केरल के चुनावी रण में कई नए मोड़ देखने को मिल सकते हैं। जहां एक तरफ एलडीएफ अपनी उपलब्धियों के साथ जनता के बीच है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश में जुटा है। लेकिन बिनॉय विश्वम के आत्मविश्वास ने यह साफ कर दिया है कि वामपंथी खेमा किसी भी चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है। माकपा और भाकपा के बीच का यह तालमेल और मुख्यमंत्री पद पर चुनाव बाद चर्चा की रणनीति कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने का काम कर रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पिनाराई विजयन का अनुभव और एलडीएफ का कैडर मिलकर केरल की राजनीति में तीसरी बार लाल झंडा फहराने में कामयाब हो पाता है या नहीं।