‘काश मैं भी इनसाइडर होती’,जब ‘पंचायत की रिंकी’ का छलका था दर्द, बोलीं- कम से कम सम्मान तो…
‘पंचायत’ वेब सीरीज में रिंकी का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री सानविका ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने का दर्द बयां किया। 21 जून 2025 को उनकी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा गया पोस्ट, “काश मैं भी इनसाइडर होती या किसी पावरफुल बैकग्राउंड से होती, तो शायद चीजें आसान होतीं, सम्मान मिलता,” वायरल हो गया। यह बयान इंडस्ट्री में इनसाइडर-आउटसाइडर डिबेट को फिर से हवा देता है। सानविका का यह भावनात्मक नोट उनके संघर्ष और सम्मान की चाह को दर्शाता है।
सानविका का भावनात्मक बयान
21 जून 2025 को सानविका ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा, “कभी-कभी मुझे लगता है कि काश मैं भी इनसाइडर होती या बहुत पावरफुल बैकग्राउंड से होती, तो चीजें बहुत आसान होतीं। शायद सम्मान मिलना और समान व्यवहार जैसी बुनियादी चीजें आसान होतीं। संघर्ष और बराबरी की लड़ाई थोड़ी कम होती। डटे रहो।” यह पोस्ट तेजी से वायरल हुआ और प्रशंसकों को चिंतित कर गया। सानविका ने इंडस्ट्री में आउटसाइडर के रूप में सम्मान और समानता की कमी को उजागर किया। इससे पहले तापसी पन्नू और कार्तिक आर्यन जैसे सितारे भी इस मुद्दे पर बोल चुके हैं, लेकिन सानविका का यह बयान उनकी निजी यात्रा और भावनाओं को दर्शाता है।
सानविका का संघर्ष और करियर
सानविका, जिनका असली नाम पूजा सिंह है, मध्य प्रदेश के जबलपुर से हैं। उन्होंने ‘पंचायत’ सीरीज में रिंकी के किरदार से दर्शकों का दिल जीता। उनके अभिनय और सचिव जी (जितेंद्र कुमार) के साथ उनकी केमिस्ट्री को खूब पसंद किया गया। सानविका ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह अपने माता-पिता को बिना बताए मुंबई आई थीं, जहां उन्होंने एक दोस्त के साथ रहकर ऑडिशन दिए। बेंगलुरु जाने की बात कहकर वह मुंबई में एक्टिंग करियर बनाने में जुट गईं। इस दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जैसे आर्थिक तंगी और इंडस्ट्री में पहचान बनाना। ‘पंचायत’ के सीजन 2 और 3 ने उन्हें स्टार बनाया, और सीजन 4, जो 24 जून 2025 को प्राइम वीडियो पर रिलीज हुआ, में उनकी लव स्टोरी और फुलेरा गांव के चुनाव की कहानी को दर्शकों ने सराहा।
इनसाइडर-आउटसाइडर डिबेट का इतिहास
बॉलीवुड में इनसाइडर (फिल्मी परिवारों से आने वाले) और आउटसाइडर (बाहरी लोग) के बीच भेदभाव का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। सानविका का बयान इस बहस को फिर से सामने लाता है। तापसी पन्नू ने 2020 में कहा था कि इनसाइडर्स को आसानी से मौके मिलते हैं, जबकि आउटसाइडर्स को अपनी जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। कार्तिक आर्यन ने भी ‘प्यार का पंचनामा’ के बाद अपने शुरुआती रिजेक्शन की कहानियां साझा की थीं। सानविका का बयान इस बात को रेखांकित करता है कि इंडस्ट्री में सम्मान और समान व्यवहार पाना आउटसाइडर्स के लिए चुनौती है। उनके इस पोस्ट ने प्रशंसकों और इंडस्ट्री के लोगों का ध्यान खींचा, क्योंकि यह एक व्यक्तिगत अनुभव से निकला दर्द था।
प्रशंसकों और इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया
सानविका के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने उनकी हिम्मत की तारीफ की। X पर एक यूजर ने लिखा, “सानविका ने सच बोला। आउटसाइडर्स को बॉलीवुड में कितना स्ट्रगल करना पड़ता है, यह वही समझ सकता है।” कुछ फैंस ने उनके ‘पंचायत’ में अभिनय की सराहना करते हुए कहा, “रिंकी ने अपने टैलेंट से जगह बनाई, यह सम्मान से बड़ा है।” हालांकि, कुछ लोगों ने इसे बॉलीवुड की सच्चाई माना, जहां नेपोटिज्म अभी भी एक बड़ा मुद्दा है। इंडस्ट्री से अभी तक कोई बड़ा सितारा इस पर खुलकर नहीं बोला, लेकिन सानविका के सह-कलाकार जितेंद्र कुमार ने एक इंटरव्यू में कहा था, “सानविका की मेहनत और टैलेंट को कोई नकार नहीं सकता।” यह बयान प्रशंसकों को चिंतित भी कर गया, क्योंकि यह उनके संघर्ष की गहराई को दर्शाता है।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
सानविका का यह बयान न केवल बॉलीवुड की इनसाइडर-आउटसाइडर डिबेट को फिर से जीवित करता है, बल्कि यह समाज में समानता और सम्मान के व्यापक मुद्दे को भी छूता है। ‘पंचायत’ जैसी सीरीज, जो ग्रामीण भारत की कहानी कहती है, ने सानविका जैसे कलाकारों को एक मंच दिया, लेकिन उनका यह बयान दिखाता है कि इंडस्ट्री में अभी भी आउटसाइडर्स के लिए रास्ते आसान नहीं हैं। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इसे सामाजिक असमानता से जोड़ा, जैसे एक ने लिखा, “हर इंडस्ट्री में बाहरी लोगों को कम आंका जाता है। सानविका की बात हर उस इंसान की आवाज है जो बिना बैकग्राउंड के लड़ रहा है।” यह बयान नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रेरित कर सकता है, लेकिन साथ ही इंडस्ट्री को अपनी नीतियों पर विचार करने की जरूरत है।