कोलकाता में हाई-प्रोफाइल ड्रामा: कोयला तस्करी मामले में आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन पर ईडी का छापा, ममता बनर्जी ने ‘जब्त’ किए सबूत
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता गुरुवार को एक बड़े राजनीतिक और कानूनी टकराव का केंद्र बन गई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोयला चोरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पैक (I-PAC) के सह-संस्थापक और तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कानूनी कार्रवाई उस समय एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट में बदल गई जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं छापेमारी स्थल पर पहुंच गईं और ईडी पर पार्टी की चुनावी रणनीति चुराने का आरोप लगाते हुए वहां से कुछ दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में ले लिए।
आई-पैक और प्रतीक जैन: रेड के केंद्र में चुनावी रणनीतिकार
गुरुवार सुबह ईडी की कई टीमों ने लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के आवास और आई-पैक के कार्यालयों पर एक साथ दस्तक दी। प्रतीक जैन, जो पेशे से आईआईटी बॉम्बे से शिक्षित इंजीनियर हैं, वर्तमान में टीएमसी के डिजिटल और रणनीतिक अभियानों के मुख्य सूत्रधार माने जाते हैं। उन्होंने 2015 में प्रशांत किशोर और अन्य साथियों के साथ मिलकर आई-पैक की स्थापना की थी, जो वर्तमान में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए ममता बनर्जी की पार्टी की रणनीति तैयार कर रही है।
जैसे ही छापेमारी की खबर फैली, कोलकाता पुलिस के कमिश्नर और फिर स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर पहुंच गईं। मुख्यमंत्री का किसी केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी के दौरान वहां पहुंचना और फिर बाहर निकलते समय उनके हाथ में एक ‘हरी फाइल’ का होना, जांच एजेंसी और राज्य सरकार के बीच सीधे टकराव का संकेत दे रहा है। ईडी ने बाद में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और महत्वपूर्ण साक्ष्य अपने साथ ले गईं।
क्या है कोयला तस्करी और आई-पैक का कनेक्शन?
ईडी की इस कार्रवाई का आधार पश्चिम बंगाल का बहुचर्चित कोयला चोरी घोटाला है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अनूप मजी उर्फ लाला के नेतृत्व वाला एक गिरोह ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयले का खनन और तस्करी करता था। इस तस्करी से प्राप्त करोड़ों रुपये के अवैध धन को विभिन्न माध्यमों से सफेद किया गया।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि कोयला तस्करी से प्राप्त काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से ‘इंडियन पैसिफिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (आई-पैक) तक पहुंचा। ईडी का दावा है कि एक विशिष्ट हवाला ऑपरेटर ने आई-पैक को करोड़ों रुपये के लेनदेन में मदद की, जिसका उपयोग संभवतः राजनीतिक गतिविधियों और डिजिटल अभियानों के लिए किया गया। एजेंसी का कहना है कि यह छापेमारी विशुद्ध रूप से वित्तीय साक्ष्यों पर आधारित है और इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि उस ‘मनी ट्रेल’ का पता लगाना है जो अवैध कोयला खनन से शुरू होकर राजनीतिक परामर्श फर्म तक पहुंची है।
ममता बनर्जी का पलटवार: ‘चुनावी डेटा चोरी करने की कोशिश’
छापेमारी स्थल से बाहर निकलने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और ईडी पर तीखे हमले किए। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘राजनीतिक बदले की भावना’ और ‘असांविधानिक’ करार दिया। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने ईडी के कब्जे से अपनी पार्टी के दस्तावेज वापस ले लिए हैं।
ममता बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, “ये लोग मेरे आईटी सेल के प्रभारी के घर और कार्यालयों पर छापा मारकर हमारी पार्टी की आंतरिक रणनीति, हार्ड डिस्क और आगामी विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की गोपनीय सूची जब्त करने की कोशिश कर रहे थे। ईडी इन दस्तावेजों को जब्त कर भाजपा को सौंपने की साजिश रच रही थी ताकि वे हमारी रणनीति जान सकें। मैंने अपनी पार्टी के दस्तावेज और हार्ड डिस्क वापस ले ली हैं।” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियां अब केवल भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर रही हैं, बल्कि विपक्षी दलों की जासूसी और उनके संगठनात्मक डेटा की चोरी का जरिया बन गई हैं।
प्रतीक जैन: डेलॉइट से आई-पैक तक का सफर
इस पूरी कार्रवाई के केंद्र में रहे प्रतीक जैन का करियर ग्राफ काफी प्रभावशाली रहा है। आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग करने वाले जैन ने करियर की शुरुआत डेलॉइट में एक एनालिस्ट के तौर पर की थी। इसके बाद वे ‘सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस’ (CAG) के संस्थापक सदस्य बने, जिसने 2014 के लोकसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में यही संस्था आई-पैक के रूप में विकसित हुई।
प्रतीक जैन की पहचान एक ऐसे शांत रणनीतिकार की है जो पर्दे के पीछे रहकर डेटा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए चुनावी गणित बैठाते हैं। ममता बनर्जी ने खुद उन्हें टीएमसी के आईटी सेल का प्रमुख नियुक्त किया है, जो यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर उनका कद कितना ऊंचा है। आई-पैक खुद को युवाओं के लिए एक ऐसा मंच बताती है जो राजनीति में आए बिना गवर्नेंस में योगदान देना चाहते हैं, लेकिन इस छापेमारी ने इसके वित्तीय स्रोतों को संदेह के घेरे में ला दिया है।
ईडी की सफाई और कानूनी चुनौतियां
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद ईडी ने स्पष्ट किया कि यह रेड किसी भी चुनाव से संबंधित नहीं थी और न ही टीएमसी के किसी आधिकारिक कार्यालय की तलाशी ली गई। एजेंसी ने कहा कि उनकी कार्रवाई साक्ष्य आधारित थी और उनका लक्ष्य केवल उन वित्तीय लेनदेनों की जांच करना था जो कोयला तस्करी के काले धन से जुड़े हैं।
हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा छापेमारी स्थल से ‘दस्तावेज वापस लेने’ की घटना ने एक नया कानूनी विवाद छेड़ दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह जांच में बाधा डालने (Obstruction of Justice) का मामला बन सकता है। वहीं, टीएमसी का तर्क है कि निजी आवास से पार्टी के गोपनीय डेटा को उठाना निजता और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच के कड़वे संबंधों को सार्वजनिक कर दिया है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनावों और संसद के सत्रों में भी देखने को मिल सकता है।