आज से पांच माह तक ब्रह्मांड पर भगवान शंकर का चलेगा साम्राज्य
हरिशयनी एकादशी पर इस सृष्टि के नियंता अनादि विष्णु अन्य देवी-देवताओं के साथ चार माह के शयन पर आज पाताल चले गए। पुरुषोत्तम मास के कारण इस वर्ष यह अवधि पांच माह रहने वाली है। राजा बलि को दिया वचन निभाने के लिए विष्णु को ऐसा प्रतिवर्ष करना पड़ता है।
विष्णु शयन के साथ कार्तिक में 23 नवम्बर को पड़ने वाली देवोत्थान एकादशी तक सम्पूर्ण ब्रह्मांड पर अब भगवान शंकर का साम्राज्य रहेगा। सृष्टि के संचालन का यह कार्य भगवान शिव पूरे श्रावण मास कनखल से भगवान दक्षेश्वर बनकर करेंगे। इसी के साथ संतों का चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। वे एक ही स्थान पर रहकर अनुसंधान साधना में लीन रहेंगे। देवशयनी एकादशी के साथ समस्त मांगलिक कार्य विवाह आदि पर पांच महीनों तक विराम रहेगा।
शास्त्रोक्त मान्यता के अनुसार दानवीर राजा बलि को दिया वचन निभाने के लिए आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर भगवान विष्णु का शयन प्रारंभ हो जाता है। उनका जागरण अब इस वर्ष पूरे पांच माह बाद देवप्रबोधनी एकादशी पर होगा। विष्णु चूंकि समस्त देवताओं की शक्ति हैं। अतः उनके शयन पर जाते ही देव भी निस्तेज होकर सो जाते हैं। विष्णु और शिव पुराण के अनुसार अब सारा ब्रह्माण्ड शंकर भगवान को चलाना पड़ेगा। गुरु पूर्णिमा की रात्रि में शिव कैलाश से कनखल आएंगे।
संयोग से प्रत्येक चौथे वर्ष पड़ने वाला पुरुषोत्तम मास इस बार श्रावण में पड़ रहा है। दो श्रावण होने के कारण विष्णु शयन प्रतिवर्ष के चार माह के बजाय इस साल पांच माह रहेगा। फलस्वरूप चराचर पर शिव साम्राज्य भी पांच महीने का होगा। यह संचालन शिव शंकर तीन महीने कैलाश से और दो महीने कनखल से करेंगे। चूंकि चातुर्मास में साधु संत यात्राएं नहीं करते अतः उनका चातुर्मास भी पांच महीने का हागा।
विष्णु पुराण के अनुसार भगवान लक्ष्मीनारायण देवशयनी एकादशी के साथ योगनिद्रा में चले जाएंगे। ऐसा होने पर सूर्य, चंद्र और प्रकृति के तेजस में कमी आ जाएगी फलस्वरूप मांगलिक कार्य नहीं होंगे। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में विष्णु शयन के साथ ही समस्त तीर्थ बृजधाम चले जाते हैं।




