Halal Meat Controversy in India: क्या मुस्लिमों की तरह हिंदू भी नहीं खाते हैं हलाल मीट? इस धर्म में क्या हैं नियम?
Halal Meat Controversy in India: पिछले दिनों भारतीय रेलवे (Indian Railways) में परोसे जाने वाले मांसाहार भोजन में हलाल मीट (Halal Meat) के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया (Social Media) पर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। हालांकि, रेलवे (Railway) ने साफ किया है कि ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है, और वह केवल FSSAI के मानकों का पालन करता है। इस घटना के बाद से यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है कि क्या हिंदुओं (Hindus) के बीच भी हलाल मीट को लेकर कोई धार्मिक या सामाजिक आपत्ति है? इस्लामिक आहार कानून के अनुसार, हलाल वह मांस होता है जिसे जानवर की नसें एक ही कट में काटकर, दुआ (तस्मिया) पढ़कर और खून पूरी तरह निकालने की प्रक्रिया से प्राप्त किया जाता है। हिंदू धर्म (Hinduism) में मांसाहार को लेकर कोई एक समान नियम नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक प्रथाएं इसे परिभाषित करती हैं। तो चलिए जानते हैं इस पूरे मामले में हिंदू धर्म में मांसाहार को लेकर क्या नियम और प्राथमिकताएं हैं, जानते हैं विस्तार से…
इस्लामिक आहार कानून और ‘हलाल’ की परिभाषा
इस्लामी आहार कानून (Islamic Dietary Law) के अनुसार, हलाल (Halal) वह मांस है जिसे इस्लाम (Islam) में निर्धारित किए गए विशेष नियमों के तहत ही काटा जाता है। इस प्रक्रिया में कुछ बुनियादी शर्तें अनिवार्य होती हैं। पहली शर्त यह है कि जानवर काटते समय जीवित (Alive) और स्वस्थ (Healthy) होना चाहिए। दूसरी, जानवर को काटते समय अल्लाह (Allah) का नाम लेते हुए एक विशेष दुआ, जिसे तस्मिया (Tasmia) कहा जाता है, पढ़ी जाती है। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जानवर की गले की प्रमुख नसें (Major Veins) एक ही झटके में काटी जाती हैं, ताकि उसका सारा खून पूरी तरह से बह जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग इस पूरी प्रक्रिया में खून को पूरी तरह से निकालने के तरीके को मांस की सुरक्षा और स्वच्छता (Safety and Hygiene) के लिए बेहतर मानता है। यही कारण है कि हलाल मांस केवल धार्मिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक मानकीकृत प्रक्रिया बन चुका है।
हिंदू धर्म में मांसाहार की क्षेत्रीय प्राथमिकताएं
हिंदू धर्म (Hinduism) में मांसाहार (Non-Vegetarianism) को लेकर कोई केंद्रीयकृत और समान नियम नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र और समुदाय विशेष की परंपराओं पर निर्भर करता है। उत्तर भारत (North India) के कई हिस्सों, जैसे पंजाब (Punjab) और हरियाणा (Haryana) में हिंदू समुदाय अक्सर झटका (Jhatka) मांस को प्राथमिकता देते हैं। झटका (Jhatka) वह तरीका है जिसमें जानवर को एक ही वार में मारा जाता है और उसका सिर तुरंत धड़ से अलग कर दिया जाता है। कई परिवार धार्मिक अनुष्ठानों (Religious Rituals), पशु बलि (Animal Sacrifice) और पारंपरिक कार्यक्रमों में इसी झटका तरीके को अपनाना उचित मानते हैं। इसके विपरीत, दक्षिण भारत (South India) के राज्यों जैसे तमिलनाडु (Tamil Nadu) और केरल (Kerala) में स्थिति काफी अलग है। यहां बड़ी संख्या में हिंदू लोग रेस्तरां और दुकानों से हलाल मीट (Halal Meat) खरीदना पसंद करते हैं, क्योंकि यह सामाजिक प्रथाओं और स्थानीय उपलब्धता का हिस्सा है।
हलाल बनाम झटका और राजनीतिक बयान
हलाल (Halal) और झटका (Jhatka) मीट के बीच की यह बहस पिछले कुछ समय से राजनीतिक सुर्खियों में रही है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने एक बार हिंदुओं (Hindus) से सार्वजनिक रूप से अपील की थी कि वे हलाल मीट न खाएं और अपनी परंपरागत झटका मीट की प्रक्रिया को ही अपनाएं। उनका तर्क था कि हर समुदाय को अपने धार्मिक और पारंपरिक तरीकों का पालन करना चाहिए। इसी तरह, महाराष्ट्र (Maharashtra) के मंत्री नितेश राणे (Nitesh Rane) ने भी हिंदू मीट व्यापारियों के लिए एक अलग पहचान स्थापित करने हेतु मल्हार सर्टिफिकेशन (Malhar Certification) लॉन्च करने की बात कही थी। हालांकि, विपक्ष (Opposition) ने इन बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और मंत्रियों पर समाज में धर्म के आधार पर विभाजन (Division based on Religion) पैदा करने का आरोप लगाया था। यह दर्शाता है कि धार्मिक आहार संबंधी प्राथमिकताएं अब भारत की राजनीति में एक विवादित मुद्दा बन चुकी हैं।
आईआरसीटीसी और सामाजिक समरसता
फिलहाल, हलाल सर्टिफिकेशन (Halal Certification) को लेकर भारत (India) में कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है। भारतीय रेलवे की खानपान शाखा, आईआरसीटीसी (IRCTC) ने स्पष्ट किया है कि वह केवल वही मांसाहार परोसता है जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 (Food Safety and Standards Act 2006) और FSSAI के नियमों का पालन करता है। यह बयान रेलवे द्वारा किसी भी धार्मिक सर्टिफिकेशन की अनिवार्यता को खारिज करता है। हालांकि, सामाजिक स्तर पर, कई हिंदू परिवार अभी भी झटका को प्राथमिकता देते हैं। वहीं, सामाजिक समरसता की मिसाल के तौर पर, दक्षिण भारत (South India) में कई पारिवारिक समारोहों और गांव के उत्सवों में मुस्लिम मेहमानों (Muslim Guests) की सुविधा और सम्मान के लिए हलाल मीट परोसा जाता है। यह दर्शाता है कि भारत में मांसाहार संबंधी नियम धार्मिक विभाजन से अधिक क्षेत्रीय आदतें और सामाजिक सद्भाव पर आधारित हैं।