कोंकण अभ्यास की शुरुआत: यूके और भारत की नौसेनाओं का ऐतिहासिक संयुक्त संचालन, हिंद महासागर में मजबूत साझेदारी
मुंबई, 5 अक्टूबर 2025: पश्चिमी हिंद महासागर में यूके के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप (CSG) ने HMS प्रिंस ऑफ वेल्स विमानवाहक पोत के नेतृत्व में भारतीय नौसेना के साथ अभ्यास कोंकण शुरू किया है। यह द्विवार्षिक अभ्यास 2004 से चल रहा है, लेकिन पहली बार दोनों देशों के कैरियर ग्रुप एक साथ संचालन करेंगे। चार दिनों तक चलने वाले इस अभ्यास में समुद्री और वायु क्षमताओं का परीक्षण होगा। क्या यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नई रक्षा साझेदारी की नींव रखेगा? आइए, इस अभ्यास की खासियतें जानते हैं।
पहली बार कैरियर ग्रुप का संयुक्त अभ्यास: संचालन क्षमता में नया आयाम
अभ्यास कोंकण की शुरुआत के साथ यूके का CSG25, जो ऑपरेशन हाईमास्ट के तहत आठ महीने की तैनाती पर है, INS विक्रांत के नेतृत्व वाली भारतीय कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ जुट गया। यह चार दिवसीय जटिल अभ्यास उच्च समुद्र में दोनों नौसेनाओं की समुद्री, वायु और पनडुब्बी क्षमताओं को मजबूत करेगा। ब्रिटिश उच्चायोग के अनुसार, इसमें संयुक्त एंटी-सबमरीन वारफेयर (CASEX) शामिल है, जिसमें UK CSG, INS टाबर, P-8I नेपच्यून विमान और भारतीय पनडुब्बी भाग लेंगे। यह पहली बार है जब रॉयल नेवी और भारतीय नौसेना के दोनों विमानवाहक ग्रुप एक साथ अभ्यास करेंगे, जो ब्लू-वाटर नौसेनाओं के क्लब में दोनों देशों की स्थिति को रेखांकित करता है। कमोडोर क्रिस सॉन्डर्स ने कहा, “यह बहु-क्षेत्रीय अभियानों में प्रशिक्षण का उत्कृष्ट अवसर है।” अभ्यास से सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान होगा, जो हिंद-प्रशांत में सुरक्षा को मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह QUAD और IPEF जैसे फोरम्स के अनुरूप रणनीतिक गहराई बढ़ाएगा।
चार दिनों का जटिल संचालन: पनडुब्बी, विमान और युद्धाभ्यास का मिश्रण
अभ्यास के पहले चरण में दोनों सेनाओं की पनडुब्बियां, विभिन्न विमान और warships शामिल होंगे। UK CSG में HMS प्रिंस ऑफ वेल्स के अलावा Type 45 डिस्ट्रॉयर, Type 23 फ्रिगेट्स और F-35B जेट्स हैं, जबकि भारतीय पक्ष में INS विक्रांत, INS टाबर और P-8I शामिल। संयुक्त टैक्टिकल मैन्यूवर्स, एयर डिफेंस ड्रिल्स और एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस पर फोकस होगा। कमांडर जेम्स ब्लैकमोर ने कहा, “यह संयुक्त क्षमताओं को विकसित करने का शानदार मौका है।” अभ्यास के बाद CSG मुंबई और गोवा बंदरगाहों का दौरा करेगा, जहां ब्रिटिश व्यापार, संस्कृति और ‘लिविंग ब्रिज’ को प्रदर्शित किया जाएगा। यहां भारतीय वायुसेना के साथ हवाई रक्षा अभ्यास भी होगा, जो रणनीतियों का परीक्षण करेगा। यह न केवल सैन्य सहयोग बढ़ाएगा, बल्कि लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करेगा। 2021 के कोंकण शक्ति अभ्यास की तरह, यह भी त्रि-सेवा सहयोग की याद दिलाता है।
हिंद-प्रशांत में मजबूत साझेदारी: भविष्य के सहयोग की नींव
ब्रिटिश उच्चायोग लिंडी कैमरन ने कहा, “यह अभ्यास UK-India Vision 2030 का स्तंभ है, जो खुला हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करता है। “दोनों देश नियम-आधारित व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं, और यह अभ्यास भारत की इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव के समुद्री सुरक्षा पिलर का हिस्सा है। 2025 में CSG की तैनाती से पहले जून में नॉर्थ अरेबियन सागर में PASSEx हुआ था, जो इसकी निरंतरता दर्शाता है। भविष्य में 2030 तक लैंडमार्क जॉइंट एक्सरसाइज की योजना है। यह सहयोग व्यापार मार्गों की सुरक्षा, HADR और लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज को मजबूत करेगा। क्या यह QUAD को नई ताकत देगा? दोनों नौसेनाओं की यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता का प्रतीक बनेगी।