Electoral Pressure Cooker: BLOs की मौत पर बवाल, जानें क्यों उत्तर प्रदेश में ‘घर-परिवार छोड़’ काम कर रहे हैं बूथ लेवल अधिकारी!
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया इन दिनों एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। काम की तेजी से अधिक, इस अभियान में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर बढ़ता असहनीय दबाव सुर्खियों में है। लखनऊ (Lucknow) से लेकर गोंडा (Gonda) तक कई जिलों में ड्यूटी के दौरान बीएलओ की मौत और आत्महत्या की खबरें सामने आई हैं, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एबीपी लाइव की ग्राउंड रिपोर्ट में बीएलओ ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं—जैसे रात 3 बजे तक काम करना, परिवार से दूरी और जनता का सहयोग न मिलना। गलत नाम, फोटो और सबसे बड़ी चुनौती, फॉर्म जमा न होना, इस प्रक्रिया में बड़ी रुकावट बन रहा है। इस मानवीय संकट पर विपक्ष भी सरकार को घेरने लगा है।
SIR प्रक्रिया और दबाव की पृष्ठभूमि: क्यों शुरू हुआ यह अभियान?
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया इस समय राज्य भर में जोर-शोर से चल रही है, जिसका प्राथमिक लक्ष्य आगामी चुनावों से पहले मतदान सूची को त्रुटिहीन बनाना है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने, पुरानी प्रविष्टियों की जांच करने और नए मतदाताओं का पंजीकरण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सैद्धांतिक रूप से यह एक आवश्यक प्रक्रिया है, लेकिन धरातल पर प्रक्रिया शुरू होते ही बीएलओ पर काम का बोझ अप्रत्याशित रूप से कई गुना बढ़ गया। लखनऊ (Lucknow), गोंडा (Gonda) और अन्य जिलों से लगातार ऐसी रिपोर्टें आने लगीं कि अधिकारी प्रतिदिन 12 से 16 घंटे तक काम कर रहे हैं। इतने भारी दबाव के बीच कई बीएलओ की ड्यूटी के दौरान मौत और कुछ मामलों में आत्महत्या की घटनाओं ने SIR की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
गलत डेटा और फॉर्म जमा न होने की चुनौती
लखनऊ (Lucknow) में SIR प्रक्रिया में कार्यरत बीएलओ हबीबा (Habiba) ने जमीनी स्तर की समस्याओं को सामने रखते हुए चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा उन्हें दी गई मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर त्रुटियां हैं—जैसे कई जगह नाम गायब हैं, फोटो गलत लगी है, और पते तक गलत दर्ज हैं। इससे फॉर्म भरवाने और डेटा को सत्यापित करने में भारी दिक्कत आ रही है। हबीबा का दावा है कि उन्हें रोजाना 800 से अधिक फॉर्म बांटने पड़ रहे हैं और कई बार दूर-दराज के इलाकों में लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ रही है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लोग फॉर्म लेने के बाद उसे वापस जमा नहीं कर रहे हैं, जिससे सत्यापन और अपडेट का काम रुक रहा है। बीएलओ को अकेले ही यह सारा कार्य निपटाना पड़ रहा है, क्योंकि किसी सहायक या हेल्पर की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
विपक्ष ने किया सरकार पर हमला
बीएलओ हबीबा (Habiba) ने बताया कि अत्यधिक दबाव के कारण कई अधिकारी देर रात 1–2 बजे तक फॉर्म भरने और लिस्ट अपडेट करने का काम करते हैं, जबकि कुछ तो रात 3 बजे तक जागकर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर कांग्रेस (Congress) ने कड़ा रुख अपनाया है और दावा किया है कि काम के प्रेशर में अब तक कम से कम 25 बीएलओ अपनी जान गंवा चुके हैं। कांग्रेस ने एक भावनात्मक वीडियो भी साझा किया, जिसमें बीएलओ शिप्रा मौर्य (Shipra Maurya) कैमरे के सामने रोते हुए कहती हैं कि जनता फॉर्म जमा नहीं कर रही है और पूरा बोझ सिर्फ बीएलओ पर डाल दिया गया है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार (State Government) ने जमीनी हकीकत का आकलन किए बिना इस वृहद प्रक्रिया को शुरू कर दिया, जिससे हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं और मानवीय त्रासदी का रूप ले रहे हैं।