• February 1, 2026

Doctor-Patient Ratio Crisis: भारत में हर 811 लोगों पर सिर्फ 1 डॉक्टर, स्वास्थ्य मंत्री J.P. Nadda ने बताया संकट दूर करने का ‘मेगा प्लान’।

Doctor-Patient Ratio Crisis: देश में मरीजों की बढ़ती संख्या और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती ज़रूरतों के बीच डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर एक बार फिर गंभीर आंकड़े सामने आए हैं। मंगलवार को संसद (Parliament) में दी गई जानकारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत (India) में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात (Doctor-Population Ratio) की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, देश में हर 811 नागरिकों (Citizens) के लिए केवल एक डॉक्टर उपलब्ध है। राज्यसभा (Rajya Sabha) में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा (J. P. Nadda) ने न केवल इस संकट को स्वीकार किया, बल्कि उन्होंने इसे दूर करने के लिए सरकार की व्यापक रणनीति (Mega Plan) भी पेश की। इस प्लान में मेडिकल सीटों का भारी विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया गया है। तो चलिए जानते हैं पूरी खबर क्या है, जानते हैं विस्तार से…

811 नागरिकों पर केवल एक चिकित्सक

देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात को लेकर मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा (J. P. Nadda) ने संसद (Parliament) में गंभीर आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि भारत (India) में वर्तमान में 13,88,185 एलोपैथिक डॉक्टर (Allopathic Doctors) और 7,51,768 आयुष (AYUSH) सिस्टम के डॉक्टर पंजीकृत (Registered) हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय (Health Ministry) के आकलन के अनुसार, यदि यह मान लिया जाए कि इन सभी पंजीकृत डॉक्टरों में से लगभग 80 प्रतिशत डॉक्टर ही सक्रिय रूप से उपलब्ध हैं, तो देश में डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात (Doctor-Population Ratio) लगभग 1:811 बैठता है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित 1:1000 के मानक के करीब होते हुए भी, देश के विशाल आकार और ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य अंतराल (Health Divide) को देखते हुए डॉक्टरों की उपलब्धता में भारी कमी को दर्शाता है।

मेडिकल शिक्षा में रिकॉर्ड विस्तार

डॉक्टरों की कमी के बावजूद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा (J. P. Nadda) ने पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल शिक्षा (Medical Education) के क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विस्तार को मुख्य उपलब्धि बताया। उन्होंने सदन को सूचित किया कि 2014 के मुकाबले आज देश में मेडिकल कॉलेजों (Medical Colleges) की संख्या 387 से बढ़कर 818 हो गई है। सीटों के मामले में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। एमबीबीएस (MBBS) की सीटें 51,348 से बढ़कर 1,28,875 हो चुकी हैं, वहीं पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) सीटें 31,185 से बढ़कर 82,059 तक पहुंच गई हैं। यह विशाल विस्तार न केवल डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह सुनिश्चित करता है कि आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित चिकित्सक स्वास्थ्य सेवा (Healthcare) प्रणाली में शामिल हो सकें, जिससे संकट को जड़ से दूर किया जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती और ‘एडॉप्शन प्रोग्राम’

डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के साथ ही, सरकार ने ग्रामीण (Rural), पिछड़े और जनजातीय इलाकों (Tribal Areas) में उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई विशिष्ट योजनाएं शुरू की हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा (J. P. Nadda) ने बताया कि जिला अस्पतालों (District Hospitals) से जुड़े 157 नए मेडिकल कॉलेजों (Medical Colleges) को मंज़ूरी दी गई थी, जिनमें से 137 पहले ही शुरू हो चुके हैं। इसके अलावा, एक अभिनव पहल के रूप में ‘फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम’ (Family Adoption Program) को एमबीबीएस (MBBS) कोर्स का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। इस कार्यक्रम के तहत, मेडिकल कॉलेज गांवों को गोद लेते हैं, और एमबीबीएस छात्र परिवारों की नियमित निगरानी करते हैं। इस पहल से टीकाकरण (Vaccination), पोषण (Nutrition), और मलेरिया-डेंगू नियंत्रण जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य मामलों में लगातार फॉलो-अप (Follow-up) सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो रही हैं।

पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों की तैनाती और विदेशी डॉक्टरों को अनुमति

सरकार ने केवल एमबीबीएस (MBBS) छात्रों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया है, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों (Expert Doctors) की कमी को दूर करने के लिए भी कदम उठाए हैं। एनएमसी (NMC) के ‘जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम’ (District Residency Program) के तहत, मेडिकल कॉलेजों के दूसरे और तीसरे वर्ष के पीजी छात्रों (PG Students) की तैनाती जिला अस्पतालों (District Hospitals) में की जा रही है। इसके अलावा, ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में काम करने के लिए एक्सपर्ट डॉक्टरों (Expert Doctors) को प्रोत्साहित करने हेतु ‘हार्ड-एरिया भत्ता’ (Hard-Area Allowance) और सरकारी आवास (Government Accommodation) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। स्वास्थ्य मंत्री नड्डा (J. P. Nadda) ने यह भी बताया कि एनएमसी (NMC) के नए नियम विदेशी डॉक्टरों (Foreign Doctors) को भारत (India) में विशेष परिस्थितियों जैसे ट्रेनिंग, रिसर्च (Research) या वॉलंटरी सेवा के लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन (Temporary Registration) की अनुमति भी देते हैं, जिससे देश में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकें।

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