• January 20, 2026

दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी: अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, एक करोड़ की चरस के साथ नेपाली तस्कर गिरफ्तार

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में नशे के सौदागरों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। पुलिस की एक विशेष टीम ने एक गुप्त और सुनियोजित ऑपरेशन के तहत अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी सिंडिकेट के एक प्रमुख गुर्गे को दबोचने में सफलता हासिल की है। गिरफ्तार किया गया आरोपी नेपाल का नागरिक है, जो पिछले काफी समय से सीमा पार से मादक पदार्थों की बड़ी खेप भारत पहुंचाने के नेटवर्क का हिस्सा था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाली चरस बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत एक करोड़ रुपये से भी अधिक आंकी जा रही है।

गुप्त सूचना और दिल्ली पुलिस का सटीक जाल

दिल्ली पुलिस को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि नेपाल से संचालित होने वाला एक बड़ा गिरोह दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों में ‘हाई-ग्रेड’ चरस की सप्लाई करने की फिराक में है। इनपुट के आधार पर पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स टीम ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और तकनीकी सर्विलांस की मदद से संदिग्धों पर नजर रखनी शुरू की।

इसी कड़ी में पुलिस को एक पुख्ता जानकारी मिली कि एक नेपाली तस्कर चरस की एक बड़ी खेप लेकर दिल्ली के एक खास इलाके में आने वाला है। सूचना को पुख्ता करते ही पुलिस ने बिना समय गंवाए इलाके की घेराबंदी कर दी और सादे कपड़ों में जवानों को तैनात कर दिया गया। जैसे ही आरोपी महेश (46) संदिग्ध अवस्था में वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे घेर लिया। शुरुआती तलाशी में उसके पास से 10.97 किलोग्राम हाई-ग्रेड चरस बरामद हुई। बरामद नशीले पदार्थ की शुद्धता इतनी अधिक है कि वैश्विक बाजार में इसकी मांग बहुत ज्यादा है और इसीलिए इसकी कीमत एक करोड़ रुपये से ऊपर बताई जा रही है।

आरोपी महेश: नेपाल से दिल्ली तक फैला तस्करी का जाल

गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान महेश के रूप में हुई है, जो मूल रूप से नेपाल का निवासी है। दिल्ली पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि महेश इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का एक महत्वपूर्ण मोहरा था। वह नियमित रूप से नेपाल के पहाड़ी इलाकों से चरस इकट्ठा करता था और उसे बस या अन्य गुप्त माध्यमों से भारत की सीमा के भीतर लाता था।

महेश का मुख्य काम नेपाल से दिल्ली तक खेप पहुंचाना और यहां स्थानीय डीलरों के बीच उसे वितरित करना था। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बहुत ही पेशेवर तरीके से काम करता था। खेप को पकड़े जाने से बचाने के लिए वे अक्सर रास्तों और परिवहन के तरीकों में बदलाव करते रहते थे। आरोपी पिछले कई वर्षों से इस अवैध धंधे में संलिप्त था और उसने दिल्ली में अपना एक मजबूत नेटवर्क तैयार कर लिया था।

अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट और नेटवर्क की गहरी जांच

दिल्ली पुलिस इस मामले को महज एक तस्कर की गिरफ्तारी के रूप में नहीं देख रही है। पुलिस का मानना है कि यह एक बहुत बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का एक सिरा है। इस गिरोह का जाल नेपाल से शुरू होकर भारत के विभिन्न राज्यों, विशेषकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तक फैला हुआ है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इस चरस की सप्लाई केवल दिल्ली के स्थानीय रेव पार्टियों या ड्रग डीलरों तक सीमित थी या इसे दिल्ली से आगे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए विदेशों में भेजने की योजना थी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बरामद की गई 10.97 किलोग्राम चरस एक बड़ी खेप का हिस्सा हो सकती है। अब पुलिस का ध्यान इस गिरोह के ‘मास्टरमाइंड’ और उन वित्तीय स्रोतों का पता लगाने पर है, जो इस अवैध कारोबार को फंडिंग कर रहे थे। पुलिस आरोपी महेश के मोबाइल कॉल डिटेल्स और उसके संपर्कों को खंगाल रही है ताकि उसके मददगारों और दिल्ली में बैठे स्थानीय खरीदारों की पहचान की जा सके।

नशे के खिलाफ दिल्ली पुलिस की मुहिम में बड़ी सफलता

यह बरामदगी दिल्ली पुलिस की मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही विशेष मुहिम में एक बड़ी जीत मानी जा रही है। पिछले कुछ महीनों में दिल्ली पुलिस ने ड्रग्स की कई बड़ी खेप पकड़ी हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से आने वाले इस सिंडिकेट का पर्दाफाश होना सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। नशीले पदार्थों की तस्करी न केवल युवाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि इस अवैध व्यापार से मिलने वाले धन का उपयोग अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी किए जाने की आशंका बनी रहती है।

पुलिस ने आरोपी महेश के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उसे अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि इस पूरे नेटवर्क की परतों को उघाड़ा जा सके। पुलिस का मानना है कि रिमांड के दौरान महेश कई और बड़े नामों का खुलासा कर सकता है, जिससे आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां संभव हैं।

निष्कर्ष: सीमा सुरक्षा और स्थानीय सतर्कता की आवश्यकता

नेपाली नागरिक की गिरफ्तारी ने एक बार फिर भारत-नेपाल खुली सीमा का फायदा उठाकर होने वाली तस्करी की ओर ध्यान आकर्षित किया है। यह मामला दिखाता है कि तस्कर किस तरह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं का उल्लंघन कर ड्रग्स जैसी घातक वस्तुओं को हमारे देश की राजधानी तक पहुंचा रहे हैं। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई ने निश्चित रूप से इस सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है, लेकिन भविष्य में ऐसे खतरों से निपटने के लिए निरंतर सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय समन्वय की आवश्यकता बनी रहेगी।

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