• June 29, 2026

यूरोप में भीषण गर्मी बनी जानलेवा, फ्रांस में 1000 से अधिक मौतें; जानिए क्यों 40°C तापमान पड़ रहा भारी

यूरोप इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। जिस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान को भारत के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान सामान्य माना जाता है, वही तापमान यूरोप के कई देशों में गंभीर संकट का कारण बन गया है। फ्रांस में गर्मी से 1,000 से अधिक लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं, जबकि जर्मनी, ब्रिटेन और स्वीडन समेत कई देशों में भी हीटवेव ने जनजीवन को प्रभावित किया है। भीषण गर्मी के कारण कई स्कूलों का समय घटा दिया गया है और अभिभावकों से बच्चों को समय से पहले घर ले जाने की अपील की जा रही है। कई जगह दफ्तरों में भी कामकाज प्रभावित हुआ है। लोगों का कहना है कि 40 डिग्री सेल्सियस का तापमान वास्तविकता में इससे कहीं अधिक महसूस हो रहा है।

यूरोप में 40°C तापमान इतना खतरनाक क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोप के अधिकांश घरों का निर्माण ठंडे मौसम को ध्यान में रखकर किया गया है। मकानों की डिजाइन इस तरह होती है कि वे सर्दियों में अंदर की गर्माहट को लंबे समय तक बनाए रखें। लेकिन यही विशेषता भीषण गर्मी के दौरान बड़ी समस्या बन जाती है। अधिकांश यूरोपीय मकान पत्थर और मोटी दीवारों से बने होते हैं। ये दिनभर गर्मी को अपने भीतर सोख लेते हैं और रात में भी जल्दी ठंडे नहीं होते। परिणामस्वरूप घरों के अंदर का तापमान बाहर की तुलना में अधिक महसूस होने लगता है, जिससे लोगों को लगातार गर्मी का सामना करना पड़ता है।

एयर कंडीशनर की कमी भी बड़ी वजह

यूरोप के अधिकांश देशों में एयर कंडीशनर (AC) का उपयोग भारत की तुलना में काफी कम है। अनुमान है कि वहां केवल सीमित संख्या में घरों में ही AC उपलब्ध हैं। आमतौर पर लोग प्राकृतिक वेंटिलेशन और ठंडे मौसम पर निर्भर रहते हैं। हालांकि हाल के वर्षों में टेबल फैन का उपयोग कुछ बढ़ा है, लेकिन मौजूदा हीटवेव के दौरान कूलिंग उपकरणों की मांग अचानक बढ़ने से उनकी कमी भी देखने को मिल रही है।

सर्द मौसम के अनुकूल जीवनशैली

यूरोप में लंबे समय तक रहने वाले लोगों का कहना है कि वहां की जीवनशैली और आवासीय व्यवस्था ठंडे मौसम के हिसाब से विकसित हुई है। घरों में हीट इंसुलेशन बेहतर होता है ताकि सर्दियों में अंदर गर्माहट बनी रहे। यही कारण है कि गर्मी के दौरान घरों के भीतर तापमान अधिक बढ़ जाता है और राहत मिलना मुश्किल हो जाता है।

शरीर की अनुकूलन क्षमता भी एक कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप के लोगों का शरीर लंबे समय से ठंडे मौसम के अनुकूल रहा है। लगातार बढ़ते तापमान और बार-बार आने वाली हीटवेव के कारण शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हीट स्ट्रोक और अन्य गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में भी भीषण गर्मी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस तरह की हीटवेव अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में देखने को मिल सकती हैं।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *