• February 11, 2026

लोकसभा में बजट 2026 पर गरजे राहुल गांधी: मार्शल आर्ट्स से लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध और AI तक का जिक्र, बोले- ‘खतरनाक दौर में दुनिया, पर बजट में समाधान नहीं’

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में जारी लंबे गतिरोध के बाद आज लोकसभा में उस समय गहमागहमी बढ़ गई जब विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आम बजट 2026 पर चर्चा में भाग लिया। राहुल गांधी का भाषण इस बार लीक से हटकर रहा, जिसमें उन्होंने न केवल घरेलू अर्थव्यवस्था बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, तकनीकी क्रांति और सामरिक चुनौतियों को एक सूत्र में पिरोते हुए सरकार को घेरा। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत बेहद अनोखे अंदाज में मार्शल आर्ट्स का उदाहरण देकर की और अंत में बजट को आज की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में अक्षम करार दिया।

सदन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मार्शल आर्ट्स की विधा ‘जिजित्सु’ का जिक्र कर सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा कि राजनीति और मार्शल आर्ट्स में एक बड़ा अंतर होता है। जिजित्सु में जब कोई आपको पकड़ता है, तो उसकी ‘ग्रिप’ यानी पकड़ स्पष्ट दिखाई देती है। आपको पता चलता है कि जोर कहां पड़ रहा है और शरीर के किस हिस्से को चोक किया जा रहा है, लेकिन मौजूदा राजनीति में ऐसा नहीं है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज की राजनीति में यह नहीं दिखता कि असली जोर कहां पड़ रहा है और जनता का गला कहां घोंटा जा रहा है। इस रूपक के जरिए उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों और बजट की अदृश्य मार पर निशाना साधा।

राहुल गांधी ने वित्त मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण (इकोनॉमिक सर्वे) का हवाला देते हुए वैश्विक परिदृश्य पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वे खुद इस बात को स्वीकार करता है कि हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चरम पर है। उन्होंने विस्तार से बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जो अमेरिका आधारित वैश्विक तंत्र चला आ रहा था, उसे अब रूस और चीन जैसी महाशक्तियां खुली चुनौती दे रही हैं। राहुल गांधी के अनुसार, हम एक ‘सुपरपावर’ वाली दुनिया से निकलकर एक ऐसी नई दुनिया की ओर बढ़ रहे हैं, जिसकी अनिश्चितताओं का अंदाजा लगाना फिलहाल नामुमकिन है।

वैश्विक संकटों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने गाजा पट्टी और रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए कहा कि कुछ समय पहले सरकार की ओर से कहा गया था कि युद्ध का समय अब खत्म हो चुका है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। यूक्रेन में संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा और पश्चिम एशिया में ईरान व गाजा के हालात बदतर होते जा रहे हैं। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि दुनिया अब स्थिरता के दौर से निकलकर अस्थिरता के गहरे भंवर में जा रही है। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कहा कि आज ऊर्जा और वित्त को हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जो किसी भी देश की संप्रभुता के लिए खतरनाक संकेत है।

भाषण का एक बड़ा हिस्सा उभरती हुई तकनीक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) और डेटा सुरक्षा पर केंद्रित रहा। राहुल गांधी ने सरकार को आगाह किया कि एआई का दौर भारत के आईटी सेक्टर के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि जिस आईटी इकोसिस्टम को कांग्रेस ने दशकों की मेहनत से खड़ा किया था, उसे अब एआई से कड़ी टक्कर मिलने वाली है। उनके अनुसार, एआई आने वाले समय में कई सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की नौकरियों को खत्म कर देगा, जिसके लिए हमारे पास कोई ठोस योजना नहीं है। हालांकि, उन्होंने भारत की ताकत को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अगर एआई एक इंजन है, तो डेटा उसका पेट्रोल है। पूरी दुनिया में केवल दो ही बड़े डेटा पूल हैं—एक चीन के पास और दूसरा भारत की 140 करोड़ जनता के पास। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा डेटा हमारी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन सरकार इसे सुरक्षित रखने और इसका सही लाभ उठाने में विफल दिख रही है।

आर्थिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए विपक्ष के नेता ने कहा कि देश की तीन सबसे बड़ी ताकतें हैं—हमारे ऊर्जावान लोग, हमारे किसान जो अन्नदाता हैं, और देश की ऊर्जा सुरक्षा। उन्होंने कहा कि बजट इन चुनौतियों की पहचान तो करता है कि हम एक खतरनाक और अस्थिर समय में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन जब समाधान की बात आती है, तो यह बजट पूरी तरह मौन नजर आता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बजट 2026 महज एक पारंपरिक औपचारिक दस्तावेज बनकर रह गया है, जिसमें भविष्य की सुरक्षा के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं हैं। उनके अनुसार, वित्त मंत्री ने उन वास्तविक संकटों का समाधान पेश ही नहीं किया जिनसे आज देश की 140 करोड़ जनता जूझ रही है।

डॉलर के गिरते प्रभुत्व और वैश्विक अर्थव्यवस्था में आ रहे बदलावों पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज अमेरिकी प्रभुसत्ता को हर तरफ से चुनौती मिल रही है। ऐसे में भारत को अपनी भूमिका तय करनी होगी, लेकिन सरकार का विजन इसमें धुंधला दिखाई देता है। उन्होंने किसानों के मुद्दे पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि प्रचुर मात्रा में खाद्यान्न होने के बावजूद किसानों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर बजट में कोई क्रांतिकारी कदम नहीं उठाए गए हैं।

पूरे भाषण के दौरान राहुल गांधी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार जमीनी हकीकत और वैश्विक बदलावों से कटी हुई है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया बदल रही है और नए खतरे सामने आ रहे हैं, तब सरकार पुराने ढर्रे पर चलकर देश को असुरक्षित छोड़ रही है। बजट पर उनकी इस तीखी प्रतिक्रिया ने सदन में बहस को एक नया आयाम दे दिया है। राहुल गांधी ने अंत में दोहराया कि जब तक हम अपनी चुनौतियों को सही ढंग से नहीं पहचानेंगे और उनके अनुरूप बजट में बदलाव नहीं करेंगे, तब तक विकास की बातें केवल खोखले दावे साबित होंगी। उनके इस भाषण के बाद सत्ता पक्ष की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिससे आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और भी हंगामेदार रहने के आसार हैं।

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