नंदिनी नगर में छलका बृजभूषण शरण सिंह का दर्द: ‘दबदबा’ शब्द सुनते ही मंच पर रो पड़े पूर्व सांसद, समर्थकों में मची हलचल
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नंदिनी नगर में आयोजित ‘राष्ट्रकथा’ के दूसरे दिन एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और समर्थकों को स्तब्ध कर दिया। भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह मंच पर अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और सिसकते हुए नजर आए। मौका था राष्ट्रकथा के संबोधन का, जहां सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज के मुख से ‘दबदबा’ शब्द निकलते ही बृजभूषण शरण सिंह भावुक हो गए। उनकी आंखों से बहती अश्रुधारा को देखकर पंडाल में सन्नाटा पसर गया और उनके कई समर्थक भी रोने लगे।
कथा के बीच ‘दबदबा’ का जिक्र और भावनाओं का सैलाब
नंदिनी नगर में चल रही राष्ट्रकथा के दूसरे दिन का कार्यक्रम काफी गरिमामय माहौल में शुरू हुआ था। विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद व्यास गद्दी से सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज श्रद्धालुओं, विशेषकर युवाओं और बच्चों को राष्ट्र निर्माण का संदेश दे रहे थे। कथा के दौरान महाराज ने बृजभूषण शरण सिंह के जीवन, उनके राजनीतिक संघर्षों और उनके प्रभाव की चर्चा शुरू की।
इसी बीच, जैसे ही सद्गुरु रितेश्वर जी ने ‘दबदबा’ शब्द का प्रयोग किया, बृजभूषण शरण सिंह अपने पुराने दिनों और हाल के वर्षों में झेले गए विवादों व संघर्षों को याद कर भावुक हो उठे। मंच पर बैठे पूर्व सांसद की आंखों से आंसू गिरने लगे। उन्होंने पास रखे रूमाल से अपनी आंखें पोंछीं, लेकिन काफी देर तक वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं पा सके। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद वह करीब एक घंटे तक उसी भावनात्मक अवस्था में बैठे रहे, जिसे देखकर वहां मौजूद भीड़ भी भावुक हो गई।
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज का कड़ा संदेश: “बाप बैठा है”
बृजभूषण शरण सिंह को भावुक होते देख सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने अपने संबोधन को और अधिक आक्रामक और समर्थनपूर्ण बना दिया। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा, “चिंता मत करो, यहां इनका बाप बैठा है।” महाराज ने आगे कहा, “मेरा भी दबदबा था, है और रहेगा।” यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
रितेश्वर जी महाराज का यह संकेत स्पष्ट रूप से बृजभूषण शरण सिंह के उस चर्चित बयान की ओर था, जो उन्होंने कुश्ती संघ के चुनावों के बाद दिया था। तब उन्होंने कहा था कि “दबदबा तो है, दबदबा तो रहेगा।” महाराज के समर्थन ने न केवल बृजभूषण को ढांढस बंधाया, बल्कि उनके समर्थकों में एक नया जोश भर दिया। कथा के दौरान महाराज ने राष्ट्र निर्माण में साहस और संघर्ष की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को अक्सर कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, समर्थकों ने जताया साथ
मंच पर पूर्व सांसद के रोने और सद्गुरु द्वारा उन्हें समर्थन देने का वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। उनके समर्थकों का कहना है कि यह आंसू उनके संघर्ष और उनके खिलाफ रची गई ‘साजिशों’ के कारण उपजे दर्द का प्रमाण हैं। वहीं, राजनीतिक गलियारों में इस घटना को बृजभूषण शरण सिंह द्वारा अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को भावनात्मक रूप से फिर से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
गोंडा और आसपास के जिलों में बृजभूषण शरण सिंह का एक बड़ा जनाधार है। राष्ट्रकथा के बहाने जिस तरह से वह जनता के बीच सक्रिय हो रहे हैं, उससे यह साफ है कि वह आने वाले समय में अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास फिर से कराना चाहते हैं। ‘दबदबा’ शब्द उनके व्यक्तित्व का पर्याय बन चुका है, और आज उसी शब्द ने उन्हें सार्वजनिक मंच पर भावुक कर दिया।
निष्कर्ष: राष्ट्रकथा या शक्ति प्रदर्शन का केंद्र?
नंदिनी नगर में हो रही इस राष्ट्रकथा ने अब एक भावनात्मक मोड़ ले लिया है। जहां इसे धर्म और राष्ट्र निर्माण से जोड़ा गया था, वहीं अब यह बृजभूषण शरण सिंह के व्यक्तिगत और राजनीतिक जीवन के ‘कठिन दौर’ की अभिव्यक्ति का मंच बन गया है। मंच पर उनकी अश्रुधारा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि मजबूत दिखने वाले नेता के भीतर भी संघर्षों का गहरा घाव है। आने वाले दिनों में इस कथा के माध्यम से और कौन से बड़े बयान सामने आते हैं, इस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।