बिहार: पूर्व डीजीपी आलोक राज का चौंकाने वाला फैसला, BSSC अध्यक्ष पद संभालने के मात्र 3 दिन बाद दिया इस्तीफा
पटना: बिहार की प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उस समय खलबली मच गई, जब राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) और नवनियुक्त बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) के अध्यक्ष आलोक राज ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। 1989 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहे आलोक राज ने स्थाई अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभालने के मात्र तीन दिनों के भीतर ही पद का त्याग कर दिया है। सरकार द्वारा सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन उनके इस अप्रत्याशित फैसले ने नीतीश सरकार के रणनीतिकारों और प्रशासनिक अमले को हैरत में डाल दिया है।
सेवानिवृत्ति के साथ मिली थी नई जिम्मेदारी
पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो 1 जनवरी 2026 को नीतीश सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर आलोक राज को बिहार कर्मचारी चयन आयोग का स्थाई अध्यक्ष नियुक्त किया था। आलोक राज 31 दिसंबर 2025 को भारतीय पुलिस सेवा (IPS) से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के अगले ही दिन सरकार ने उनके प्रति विश्वास जताते हुए उन्हें प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती संस्थाओं में से एक, BSSC की कमान सौंपी थी। इससे पहले, डीजीपी पद से हटाए जाने के बाद वे इस पद के अतिरिक्त प्रभार में भी रहे थे। माना जा रहा था कि सरकार उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव का लाभ भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए लेना चाहती है, लेकिन आलोक राज के मन में कुछ और ही चल रहा था।
‘परिस्थितियां ऐसी थीं कि इस्तीफा देना पड़ा’: आलोक राज
अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए पूर्व डीजीपी आलोक राज ने बेहद संक्षिप्त लेकिन अर्थपूर्ण प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “कुछ परिस्थितियां ऐसी थीं कि मैंने इस्तीफा दे दिया। इससे ज्यादा मुझे फिलहाल कुछ नहीं कहना है।” उनके इस ‘परिस्थितियों’ वाले बयान ने कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसे सरकार और पूर्व अधिकारी के बीच समन्वय की कमी या किसी प्रकार के वैचारिक मतभेद के रूप में देख रहे हैं। यह भी चर्चा है कि क्या आयोग के भीतर काम करने की स्वायत्तता या पूर्व के कुछ घटनाक्रमों ने उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया।
डीजीपी पद से हटाए जाने की टीस या स्वाभिमान का प्रश्न?
आलोक राज के इस कदम को उनके डीजीपी पद से हटने के घटनाक्रम से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दिसंबर 2024 में, जब वे बिहार के पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्यरत थे, तब नीतीश सरकार ने अचानक उन्हें पद से हटा दिया था। उस समय वे राज्य के सबसे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी थे और उनकी सेवानिवृत्ति में अभी समय शेष था। पद से हटाए जाने के बाद से ही प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा थी कि आलोक राज सरकार के इस फैसले से आहत हैं। हालांकि, उस समय सरकार ने उन्हें BSSC अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार देकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की थी, लेकिन जानकारों का मानना है कि रिटायरमेंट के बाद स्थाई पद को ठुकराकर उन्होंने अपने स्वाभिमान का परिचय दिया है।
नीतीश सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक झटका
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार के लिए यह इस्तीफा एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने नए साल के तोहफे के रूप में आलोक राज की नियुक्ति की घोषणा की थी ताकि युवाओं के बीच यह संदेश जाए कि परीक्षाओं का संचालन एक सख्त और ईमानदार छवि वाले पूर्व पुलिस अधिकारी की देखरेख में होगा। नियुक्ति के तीन दिन बाद ही पद छोड़ देना सरकार की चयन प्रक्रिया और अधिकारियों के साथ उनके संबंधों पर सवालिया निशान खड़े करता है। अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि वह जल्द से जल्द किसी ऐसे व्यक्ति को इस पद पर नियुक्त करे जो आयोग की छवि और परीक्षाओं की शुचिता को बनाए रख सके।
BSSC अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल और अतिरिक्त प्रभार का सफर
आलोक राज का BSSC के साथ जुड़ाव पिछले कुछ महीनों से था। जब उन्हें डीजीपी पद से हटाया गया था, तब एक सप्ताह के भीतर ही उन्हें आयोग के अध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया था। वह 31 दिसंबर 2025 तक इस जिम्मेदारी को निभाते रहे। सरकार को उम्मीद थी कि सेवा विस्तार या पुनर्नियुक्ति के माध्यम से वह इस पद पर बने रहेंगे। उनके प्रभार के दौरान आयोग ने कई लंबित परीक्षाओं और परिणामों पर काम शुरू किया था। लेकिन स्थाई नियुक्ति मिलते ही उनका इस्तीफा देना यह दर्शाता है कि वे अब सरकारी सेवा या अनुबंध आधारित पदों से दूरी बनाना चाहते हैं।
भविष्य की राह और कयासों का बाजार
आलोक राज के इस्तीफे के बाद अब बिहार में यह चर्चा तेज है कि उनका अगला कदम क्या होगा? क्या वे राजनीति में प्रवेश करेंगे या फिर पूर्ण रूप से सार्वजनिक जीवन से विश्राम लेंगे? बिहार में पहले भी कई पूर्व डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। हालांकि, आलोक राज ने अभी तक अपने पत्तों को नहीं खोला है। फिलहाल, उनका इस्तीफा राजभवन और मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंच चुका है और सरकार अब नए अध्यक्ष की तलाश में जुट गई है।
निष्कर्ष: एक गरिमामय विदाई की तलाश
आलोक राज की छवि एक अनुशासनप्रिय और संगीत प्रेमी अधिकारी की रही है। उनके कार्यकाल में पुलिस विभाग में कई नवाचार हुए थे। डीजीपी पद से अचानक हटाए जाने और फिर BSSC के अध्यक्ष पद से तीन दिन में इस्तीफा देने की यह पूरी पटकथा बिहार की नौकरशाही के बदलते मिजाज को बयां करती है। यह इस्तीफा केवल एक पद का त्याग नहीं है, बल्कि यह सत्ता और शीर्ष नौकरशाही के बीच के उन अनकहे तनावों की ओर भी इशारा करता है जो अक्सर बंद कमरों तक ही सीमित रह जाते हैं।