बल्लारी हिंसा मामला: केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने की सीबीआई जांच की मांग, मूर्ति स्थापना को लेकर राज्य सरकार को घेरा
कर्नाटक के बल्लारी (बेल्लारी) में हाल ही में हुई हिंसक झड़प ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस पूरी घटना की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की पुरजोर वकालत की है। बल्लारी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस समर्थकों के बीच हुई इस पत्थरबाजी और मारपीट की घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। कुमारस्वामी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि जब मूर्ति स्थापना की कोई अनुमति नहीं थी, तो यह सब किसके संरक्षण में हुआ?
बिना अनुमति मूर्ति स्थापना का प्रयास: कुमारस्वामी का सरकार पर तीखा हमला
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बल्लारी की घटना पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बल्लारी में महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापित करने के कार्यक्रम के लिए कोई कानूनी अनुमति नहीं ली गई थी। कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश है कि सार्वजनिक स्थानों पर बिना उचित अनुमति के मूर्तियां नहीं लगाई जा सकतीं। इसके साथ ही कर्नाटक सरकार ने खुद भी एक कानून पारित किया है जो बिना इजाजत प्रतिमा स्थापना पर रोक लगाता है।
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल किया, “अगर सरकार ने 3 जनवरी को मूर्ति लगाने की अनुमति दी थी, तो उसे जनता के सामने जवाब देना चाहिए। और अगर अनुमति नहीं दी गई थी, तो वे कौन लोग थे जो जबरन मूर्ति लगाने पहुँच गए थे?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नाक के नीचे कानून का उल्लंघन हुआ और अब राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। कुमारस्वामी के अनुसार, इस पूरे मामले के पीछे की साजिश का पर्दाफाश केवल सीबीआई जांच से ही संभव है।
विवाद की शुरुआत: भाजपा और कांग्रेस विधायक समर्थकों के बीच खूनी संघर्ष
बल्लारी में हुई इस हिंसा की जड़ें 3 जनवरी को आयोजित होने वाले वाल्मीकि जी की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम से जुड़ी हैं। स्थानीय पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शहर में कार्यक्रम को लेकर व्यापक स्तर पर पोस्टर और बैनर लगाए जा रहे थे। विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस विधायक भरत रेड्डी के समर्थक अवंभावी इलाके में स्थित भाजपा विधायक जनार्दन रेड्डी के आवास के ठीक सामने कार्यक्रम का एक बड़ा बैनर लगा रहे थे।
कथित तौर पर, जनार्दन रेड्डी के समर्थकों ने अपने नेता के घर के बाहर कांग्रेस समर्थित कार्यक्रम के बैनर लगाए जाने का कड़ा विरोध किया। यह मौखिक बहस देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। दोनों पक्षों के कार्यकर्ता लाठी-डंडों के साथ आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ा कि शहर के बीचों-बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस हंगामे के दौरान न केवल कार्यकर्ताओं को चोटें आईं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुँचा।
पुलिस पर भी पथराव और जनार्दन रेड्डी के खिलाफ प्राथमिकी
जब बल्लारी में हिंसा की खबर फैली, तो स्थानीय पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुँचने का प्रयास किया। पुलिस के अनुसार, जब उन्होंने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की, तो उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर भी पथराव कर दिया। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी और पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा।
हिंसा की इस घटना के बाद पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भाजपा विधायक जनार्दन रेड्डी समेत 11 प्रमुख लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। इन पर दंगा भड़काने, सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, जनार्दन रेड्डी के समर्थकों का दावा है कि उनके नेता को निशाना बनाया जा रहा है और कांग्रेस समर्थकों ने जानबूझकर उनके घर के पास उकसावे की कार्रवाई की थी।
बल्लारी में पसरा तनाव और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
बल्लारी की इस घटना ने कर्नाटक के राजनीतिक तापमान को बढ़ा दिया है। एक तरफ जहाँ कांग्रेस इसे भाजपा विधायक की गुंडागर्दी बता रही है, वहीं भाजपा और जेडीएस इसे राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता और तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा मान रहे हैं। कुमारस्वामी का सीबीआई जांच की मांग करना यह दर्शाता है कि विपक्ष को राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है।
बल्लारी जिला प्रशासन ने शांति बनाए रखने के लिए क्षेत्र में फ्लैग मार्च निकाला है और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। स्थानीय लोगों में इस हिंसा को लेकर काफी डर और आक्रोश है। महर्षि वाल्मीकि जैसे सम्मानित व्यक्तित्व की प्रतिमा को लेकर हुई इस राजनीति ने सामाजिक सद्भाव को भी ठेस पहुँचाई है।
निष्कर्ष: क्या सरकार सीबीआई जांच के लिए होगी तैयार?
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा उठाई गई सीबीआई जांच की मांग ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं। यदि सरकार सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं करती है, तो विपक्ष इसे सच छिपाने की कोशिश के रूप में प्रचारित करेगा। वहीं, यदि जांच सीबीआई को सौंपी जाती है, तो स्थानीय कांग्रेस नेताओं की भूमिका पर भी आंच आ सकती है। बल्लारी हिंसा केवल दो राजनीतिक गुटों की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह कर्नाटक में ‘मूर्तियों की राजनीति’ और ‘कानूनी अनुमति’ के उल्लंघन के बड़े मुद्दों से जुड़ गई है। अब देखना यह होगा कि कर्नाटक सरकार कुमारस्वामी के इन तीखे सवालों और जांच की मांग पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है।