• February 11, 2026

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर नए निर्माण से गरमाई सियासत: हुमायूं कबीर और योगी आदित्यनाथ के बीच छिड़ा जुबानी जंग

कोलकाता/मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में एक नए निर्माण ने देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अयोध्या की पुरानी बाबरी मस्जिद के ढांचे की नकल के तौर पर बनाई जा रही एक नई मस्जिद का निर्माण कार्य बुधवार से आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। इस परियोजना के सामने आते ही पक्ष-विपक्ष के बीच तीखे बयानों का दौर शुरू हो गया है। जहां एक ओर जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के अध्यक्ष हुमायूं कबीर इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अपनी आस्था का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर बेहद कड़ी और दोटूक प्रतिक्रिया दी है।

मुर्शिदाबाद में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट की नींव करीब दो महीने पहले रखी गई थी, लेकिन बुधवार को जब निर्माण कार्य ने गति पकड़ी, तो यह राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया। इस पूरे प्रोजेक्ट का नेतृत्व पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेता और अब अपनी नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर कर रहे हैं। कबीर ने सोमवार को सोशल मीडिया पर इस प्रस्तावित मस्जिद का डिजिटल डिजाइन भी साझा किया था, जो हूबहू 6 दिसंबर 1992 से पहले अयोध्या में मौजूद बाबरी मस्जिद के ढांचे जैसा दिखता है। निर्माण स्थल पर कबीर के समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया और कई लोग खुद ईंटें ढोकर श्रमदान करते नजर आए।

अपने संबोधन में हुमायूं कबीर ने इस निर्माण को अपना संवैधानिक और धार्मिक अधिकार करार दिया। उन्होंने विरोधियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि जो लोग इस पवित्र कार्य में बाधा डाल रहे हैं, उन्हें पीछे हट जाना चाहिए। कबीर ने स्पष्ट किया कि भारत के संविधान के तहत हर नागरिक को अपना धर्म मानने और अपनी पसंद के मंदिर, मस्जिद या चर्च बनाने की पूरी आजादी है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी अन्य धर्म या समुदाय का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि अल्लाह की इबादत के लिए एक ऐसी जगह बना रहे हैं जो उनके दिल के करीब है। उन्होंने उन तमाम लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने बाधाओं के बावजूद निर्माण कार्य शुरू करने में उनका साथ दिया।

हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के प्रति अपनी भावनात्मक संबद्धता जाहिर करते हुए 1992 की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक मुसलमान होने के नाते छह दिसंबर 1992 की घटना ने उनके मन में एक गहरा घाव छोड़ा था। वह अक्सर सोचते थे कि बाबरी मस्जिद का वह ऐतिहासिक ढांचा क्यों गिराया गया। कबीर के अनुसार, मुर्शिदाबाद में इस मस्जिद का निर्माण करना उनका अपना एक छोटा सा योगदान है, जिससे वह उस याद को जीवित रखना चाहते हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की है कि वह गुरुवार से ‘बाबरी यात्रा’ शुरू करेंगे, जो मुर्शिदाबाद के पलाशी से शुरू होकर दिनाजपुर के इटाहार तक जाएगी। यह तीन दिवसीय मार्च होगा, जिसका समापन मस्जिद निर्माण वाली जगह पर होगा।

इस घटनाक्रम पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद तीखी और सीधी प्रतिक्रिया दी है। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बाबरी ढांचा कभी दोबारा नहीं बनेगा। उन्होंने कड़े लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘कयामत’ कभी नहीं आएगी, इसलिए उस ढांचे के दोबारा अस्तित्व में आने का कोई सवाल ही नहीं उठता। योगी आदित्यनाथ का यह बयान इस मामले को सीधे तौर पर वैचारिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण की ओर ले गया है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि भाजपा और यूपी सरकार इस तरह के किसी भी प्रतीकात्मक निर्माण को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रही है।

मुर्शिदाबाद का यह विवाद केवल धार्मिक नहीं बल्कि गहरा राजनीतिक भी है। हुमायूं कबीर पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थे। जैसे ही उन्होंने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नकल बनाने का सार्वजनिक ऐलान किया, टीएमसी ने उनके इस कदम से खुद को अलग कर लिया और उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया। पार्टी के इस रुख से नाराज कबीर ने अपनी अलग ‘जनता उन्नयन पार्टी’ का गठन किया। कबीर अब ममता बनर्जी के भी मुखर आलोचक बन चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में ममता बनर्जी फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं ले पाएंगी।

मुर्शिदाबाद में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य अब केवल एक जिले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी गूंज लखनऊ से लेकर कोलकाता तक सुनाई दे रही है। प्रशासनिक स्तर पर अभी तक इस पर कोई आधिकारिक रोक नहीं लगाई गई है, लेकिन जिस तरह से हुमायूं कबीर अपनी बाबरी यात्रा के जरिए इसे जन-आंदोलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं और दूसरी तरफ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसी कद्दावर शख्सियत का विरोध सामने आया है, उसने पश्चिम बंगाल के सांप्रदायिक और राजनीतिक समीकरणों को संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल, निर्माण स्थल पर काम जारी है और पुलिस-प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि कानून-व्यवस्था की कोई समस्या उत्पन्न न हो।

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