• March 12, 2026

AI की मार और EMI का दबाव: नोएडा का आईटी इंजीनियर बना रैपिडो राइडर, टेक सेक्टर में गहराया रोज़गार संकट

भारत (India) के तेज़ी से बदलते तकनीकी क्षेत्र (Tech Sector) में रोज़गार संकट की भयावहता को दर्शाने वाला एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक उच्च-कुशल आईटी इंजीनियर (IT Engineer) दिखाई देता है, जिसने हाल ही में नोएडा (Noida) की एक प्रतिष्ठित कंपनी में अपनी नौकरी खो दी। हायरिंग में आई भारी मंदी (Hiring Slowdown) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बड़े पैमाने पर काम के ऑटोमेशन के कारण उसकी नौकरी चली गई। पिछले दो महीनों से बेरोज़गार चल रहे इस इंजीनियर के लिए होम लोन ईएमआई (EMI) और घर के बढ़ते खर्चों का प्रबंधन करना असंभव हो गया, जिसके परिणामस्वरूप उसे जीवनयापन के लिए मजबूरन रैपिडो राइडर (Rapido Rider) के रूप में काम शुरू करना पड़ा। यह घटना केवल एक व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि देश में बढ़ती बेरोज़गारी, टेक सेक्टर की अनिश्चितता और तकनीकी विकास के सामाजिक प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

अचानक नौकरी जाने से चरमराई आर्थिक स्थिरता

नोएडा में काम कर रहे इस आईटी इंजीनियर का जीवन पहले स्थिर था, जो एक आरामदायक नौकरी और सुनिश्चित आय पर आधारित था। हालांकि, टेक सेक्टर में तेज़ी से हो रहे AI-आधारित बदलाव, प्रोजेक्ट्स की संख्या में कमी और व्यापक हायरिंग स्लोडाउन ने रातोंरात स्थिति बदल दी। दो महीने पहले उसे अचानक नौकरी से निकाल दिया गया। उम्मीद थी कि नई और बेहतर नौकरी की तलाश जल्द पूरी होगी, लेकिन इंटरव्यू कॉल्स लगभग बंद हो गए। इस बीच, उसके होम लोन की ईएमआई और नोएडा जैसे महंगे शहर में रहने का भारी खर्च (किराया, भोजन आदि) आर्थिक दबाव को असहनीय बनाने लगे। बढ़ते बोझ के कारण उसे मजबूरी में अपने परिवार को गांव भेजना पड़ा और खुद को एक छोटे किराए के घर में शिफ्ट होना पड़ा, जिसने उसकी जीवनशैली को पूरी तरह से उलट दिया।

वायरल वीडियो ने खोली टेक सेक्टर में छँटनी की कड़वी सच्चाई

Nomadic Teju नामक एक कंटेंट क्रिएटर ने इंस्टाग्राम पर यह वीडियो साझा किया, जिसमें उसने अपने दोस्त की संघर्षपूर्ण और वास्तविक कहानी बताई। वीडियो से पता चला कि इंजीनियर ने एक बेहतर नौकरी की उम्मीद में अपनी पिछली नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन तकनीकी बाज़ार की अनिश्चितता ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। महंगे फ्लैट की ईएमआई, ₹30-35 हजार का किराया और रोज़मर्रा के बढ़ते खर्चों ने उसे गंभीर मानसिक और आर्थिक संकट में धकेल दिया। जब नौकरी न होने के कारण ईएमआई भरना मुश्किल हो गया, तब उसने Rapido राइड्स देना शुरू किया ताकि कम से कम दैनिक खर्च निकाले जा सकें। यह वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ और इसने टेक सेक्टर में व्याप्त बेरोज़गारी की कड़वी सच्चाई और AI के बढ़ते प्रभाव पर एक बड़ी बहस को जन्म दिया। नौकरी की कमी से जूझ रहे हज़ारों तकनीकी पेशेवरों ने इस कहानी से स्वयं को गहराई से जुड़ा हुआ महसूस किया।

समाज की मदद और वास्तविकता का संघर्ष

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कई यूज़र्स ने इस इंजीनियर के लिए गंभीर चिंता जताई और उसकी नौकरी ढूंढने में मदद करने की पेशकश की। एक यूज़र ने लिखा, “बताइए किस डोमेन में अनुभव है, मैं रेफर कर सकता हूँ।” हालांकि, कुछ लोगों ने कड़वी वास्तविकता भी बताई कि Rapido या Zomato जैसी ऐप-बेस्ड डिलीवरी सेवाओं में ₹20-25 हजार से अधिक कमाना बेहद मुश्किल है। ये प्रतिक्रियाएं यह दर्शाती हैं कि डिजिटल समुदाय सहयोग के लिए तत्पर है, लेकिन वास्तविक समस्या की जड़ें बहुत गहरी हैं। टेक सेक्टर में धीमी गति से हो रही हायरिंग ने हज़ारों उच्च शिक्षित इंजीनियरों को अस्थायी और अत्यधिक मेहनत वाले कामों को अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है, जिससे कई परिवारों की आर्थिक स्थिरता हिल गई है।

ईएमआई का दबाव: अनिश्चित भविष्य और दोहरी मेहनत

नौकरी की तलाश जारी रखते हुए यह इंजीनियर वर्तमान में रैपिडो राइड्स के अलावा फ्रीलांस काम भी खोज रहा है, ताकि अपनी आय के स्रोतों को बढ़ाया जा सके। हालांकि, इतनी दोहरी मेहनत के बाद भी होम लोन की ईएमआई का दबाव कम नहीं हुआ है, जो उसकी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की टेक इंडस्ट्री में हायरिंग स्लोडाउन अभी कुछ और समय तक जारी रह सकता है, जिससे कई युवाओं पर आर्थिक संकट गहराने की आशंका है। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मजबूरी नहीं, बल्कि उस स्थिति का प्रतीक बन गया है जहाँ AI ऑटोमेशन, प्रोजेक्ट्स की कमी और लगातार आर्थिक दबाव ने कई भारतीय इंजीनियरों के करियर को अनिश्चितता में धकेल दिया है। फिलहाल यह इंजीनियर किसी स्थिर और सुरक्षित नौकरी के इंतजार में दिन-रात मेहनत कर रहा है।

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