36 साल बाद बड़ा खुलासा: कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्या केस में यासीन मलिक का नाम चार्जशीट में शामिल
कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट हत्याकांड में 36 साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। जम्मू-कश्मीर स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने श्रीनगर की एक विशेष अदालत में 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें जेकेएलएफ (JKLF) प्रमुख यासीन मलिक का नाम इस हत्या की साजिश रचने वाले मुख्य आरोपियों में शामिल किया गया है। यह मामला 1990 में हुए उस दर्दनाक घटनाक्रम से जुड़ा है, जिसने कश्मीरी पंडित समुदाय के बड़े पैमाने पर पलायन के दौर को और तेज कर दिया था।
कौन थीं सरला भट्ट?
सरला भट्ट श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स थीं। 18 अप्रैल 1990 को उन्हें अस्पताल के पास से कथित रूप से अगवा कर लिया गया था। इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह उस समय सीमित कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में से एक थीं, जो लगातार मिल रही धमकियों के बावजूद अपने कार्यस्थल पर डटी रहीं।
SIA की 737 पन्नों की चार्जशीट
29 जून 2026 को दाखिल चार्जशीट में SIA ने इस हत्या को एक संगठित साजिश का हिस्सा बताया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि सरला भट्ट की हत्या JKLF के कमांड ढांचे के तहत की गई थी और इसका उद्देश्य कश्मीरी पंडित समुदाय में भय पैदा करना था। चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा कुछ अन्य नाम भी शामिल किए गए हैं, जिनमें से कुछ आरोपी अब जीवित नहीं हैं या फरार बताए जा रहे हैं।
जांच में क्या सामने आया?
जांच एजेंसियों के अनुसार, सरला भट्ट को आखिरी बार SKIMS के पास देखा गया था, जिसके बाद उन्हें कथित रूप से अगवा किया गया। बाद में उन्हें श्रीनगर के बाहरी इलाके में ले जाकर हत्या कर दी गई। फॉरेंसिक और बैलिस्टिक रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल से मिले कारतूस एक ही हथियार से फायर किए गए थे, जो गवाहों के बयानों से मेल खाते हैं।
संगठित साजिश का दावा
चार्जशीट में दावा किया गया है कि यह घटना किसी व्यक्तिगत रंजिश का मामला नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित अभियान का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य कश्मीरी पंडितों में डर पैदा कर उन्हें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर करना था।
जांच में लंबे समय बाद प्रगति
इस मामले की दोबारा जांच मार्च 2024 में शुरू की गई थी। इसके बाद कई पुराने गवाहों से दोबारा संपर्क किया गया और दस्तावेजों, फॉरेंसिक रिपोर्ट तथा इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को फिर से खंगाला गया। अधिकारियों के अनुसार, दशकों पुराने इस केस में गवाहों के बयान और तकनीकी सबूतों को जोड़कर मजबूत केस फाइल तैयार की गई है।
ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ
सरला भट्ट हत्याकांड 1990 के उस दौर से जुड़ा है, जब कश्मीर घाटी में बड़े पैमाने पर कश्मीरी पंडितों का पलायन हुआ था। इस अवधि में कई प्रमुख हत्याओं ने पूरे समुदाय में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा किया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह चार्जशीट उन पुराने मामलों में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिन्हें लंबे समय से अनसुलझा माना जाता रहा है।