• January 1, 2026

उदयपुर रथयात्रा: भगवान जगन्नाथ स्वामी के जयकारों से गूंजा शहर

 उदयपुर रथयात्रा: भगवान जगन्नाथ स्वामी के जयकारों से गूंजा शहर

उदयपुर शहर मंगलवार को भगवान जगन्नाथ स्वामी के जयकारों से गूंज उठा। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर मंगलवार को शहर के ऐतिहासिक जगदीश मंदिर से जन-जन के आराध्य भगवान जगन्नाथ स्वामी जब रजत रथ में बिराजमान होकर नगर भ्रमण को निकले तो रथयात्रा मार्ग में पलक-पांवड़े बिछाए अपने आराध्य के दर्शन करने खड़े भक्तों ने जयकारों से आसमान गुंजा दिया। अपराह्न पश्चात मानो पूरा शहर रथयात्रा मार्ग पर उमड़ पड़ा। जब रथयात्रा मार्गों से गुजरी तो मार्ग में तिल धरने की भी जगह नहीं बची। जगह-जगह विभिन्न समाजों की ओर से भगवान जगन्नाथ स्वामी की आरती की जा रही है। रथयात्रा देर रात पुनः जगदीश मंदिर पहुंचकर सम्पन्न होगी।

श्री जगन्नाथ रथ यात्रा समिति उदयपुर के तत्वावधान में जगदीश चौक से ‘जय जगदीश हरे’ आरती व 21 बंदूकों की सलामी के साथ शुरू हुई रथयात्रा में समिति के सेवक आगे-आगे गोमूत्र एवं गंगाजल का छिड़काव करते चले। रथयात्रा में बैंड-बाजे, 21 घोड़े, 25 झांकियां और म्यूजिक सिस्टम थे जिनमें चल रहे भक्तिगीतों पर युवा नाचते चले। ग्यारह सौ महिलाएं सिर पर कलश लेकर रथयात्रा में चलीं। सैकड़ों भक्तों ने पारंपरिक वेश धारण कर नंगे पैर रथ को खींचा।

इससे पूर्व, दोपहर 12.30 बजे मंदिर परिसर में लकड़ी से बने पारंपरिक छोटे रथ में लड्डू गोपाल व राधा-कृष्ण के विग्रह को बिराजमना कराया गया। रथयात्रा में आगे लकड़ी का हाथी, पीछे ठाकुरजी का रथ चला। इनके आगे कीर्तनकार परंपरानुसार विभिन्न पारंपरिक भजनों से प्रभु को रिझाते हुए चले। इस रथ पर भगवान को परम्परानुसार मंदिर के अंदर की परिक्रमा कराई गई। मंदिर के अंदर की रथयात्रा मंदिर में स्थित नौ स्थानों पर रुकी। मंदिर परिसर में स्थित सूर्य मंदिर में भगवान सूर्यनारायण का भी विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें जामुन, आम, दाड़म का भोग धराया गया। घोड़े को भी दाल का भोग लगाया गया।

इसके बाद, भगवान जगन्नाथ स्वामी के बड़े स्वरूप को मंदिर से जगदीश चौक में खड़े बड़े रजत रथ में बिराजमान कराया गया। रथयात्रा शुरू होने से पहले ही जगदीश चौक में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। आसपास के भवनों की छतें भी भक्तों से भर गईं। रथयात्रा जगदीश चौक से रवाना हुई तो मार्ग के दोनों ओर खड़े भक्तजनों ने जयकारों से आसमान गुंजा दिया। हर कोई अपने प्रभु की एक झलक को देखने के लिए आतुर नजर आया।

 

रथयात्रा उदयपुर शहर के घंटाघर, बड़ा बाजार, मोचीवाड़ा, भड़भूजा घाटी, भूपालवाड़ी, तीज का चौक, धानमण्डी, लखारा चौक, अस्थल तिराहा, आरएमवी रोड, कैलाश कॉलोनी, समोर बाग, भट्टियानी चौहट्टा होते हुए पुनः रात करीब साढ़े दस बजे जगदीश चौक पहुंचेगी। वहां महाआरती के बाद भगवान की प्रतिमा को पुनः मंदिर में बिराजमान कराया जाएगा।

इधर, उदयपुर के उपनगरीय क्षेत्र हिरण मगरी सेक्टर-7 में स्थित जगन्नाथ धाम से भी रथयात्रा निकली। वहां से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्राजी की काष्ठ प्रतिमाओं को रथ में बिराजामान करा विभिन्न मार्गों से होते हुए हिरण मगरी सेक्टर-4 स्थित शिव मंदिर लाया जा रहा है। भगवान अगले सात दिन यहीं पर विश्राम करेंगे। शिव मंदिर को भगवान के मौसी के घर का रूप दिया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ भ्राता बलभद्र और बहिन सुभद्रा के साथ मौसी के घर सात दिन तक रुकते हैं।

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