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लखनऊ में ‘जल है तो कल है’ विशेषांक का विमोचन, सुनील आम्बेकर बोले- जल संरक्षण के लिए समाज की सोच बदलना जरूरी

लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने कहा कि जल संकट का समाधान केवल सरकारी योजनाओं और तकनीकी उपायों से नहीं हो सकता। इसके लिए समाज की सोच, संस्कार और जीवनशैली में बदलाव लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जल को केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और संस्कृति का आधार मानते हुए इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

सुनील आम्बेकर रविवार को लखनऊ के भागीदारी भवन में राष्ट्रधर्म मासिक पत्रिका के विशेषांक ‘जल है तो कल है’ के विमोचन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को मां के समान पूजनीय माना गया है और जल को जीवन का आधार समझा गया है। इस सांस्कृतिक दृष्टिकोण को व्यवहार में अपनाकर जल संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जल संकट केवल पानी की कमी का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारे व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। मनुष्य सृष्टि का स्वामी नहीं, बल्कि उसका अभिन्न अंग है। इसलिए विकास की योजनाओं में मानव जीवन के साथ पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों, नदियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।

जखनी और हिवरे बाजार से सीखने की जरूरत

सुनील आम्बेकर ने बुंदेलखंड के जखनी और महाराष्ट्र के हिवरे बाजार गांवों का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी और लगातार प्रयासों से जल संकट का समाधान निकाला जा सकता है। इन गांवों के अनुभव बताते हैं कि सामुदायिक सहभागिता के जरिए जल संरक्षण के प्रभावी मॉडल विकसित किए जा सकते हैं।

उन्होंने युवाओं से अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण से जुड़ी पहल करने और सफल मॉडलों को दूसरे गांवों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पानी किसी एक राज्य, वर्ग या समूह का विषय नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और राष्ट्र से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रश्न है। इसका समाधान आपसी संघर्ष के बजाय सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से ही संभव है।

आम्बेकर ने शहरी नियोजन में भी जल संसाधनों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरों का विकास करते समय पानी की उपलब्धता, वर्षा, जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों की क्षमता का आकलन करना चाहिए। अनियोजित शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से जल संकट बढ़ता है। आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के हितों की रक्षा करना भी आवश्यक है।

जल संरक्षण के लिए समाज को आगे आने की जरूरत

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने कहा कि जल संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं छोड़ी जा सकती। इसके लिए समाज को आगे आकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। उन्होंने पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को पुनर्जीवित करने और जल संरक्षण से संबंधित साहित्य को गांवों, ग्राम पंचायतों तथा आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।

वहीं, पद्मश्री डॉ. पोपटराव पवार ने महाराष्ट्र के हिवरे बाजार गांव में किए गए जल प्रबंधन के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जल प्रबंधन, फसल नियोजन और सामुदायिक अनुशासन के जरिए सूखे की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पानी की उपलब्धता के अनुसार खेती करने तथा चराईबंदी, कुल्हाड़बंदी और नशाबंदी जैसे सामूहिक प्रयासों ने गांव में सकारात्मक बदलाव लाने में भूमिका निभाई। उन्होंने प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण योजना बनाने और ग्रामसभा की भागीदारी से उसे लागू करने पर जोर दिया।

जल संरक्षण पर देशव्यापी चर्चा को बढ़ावा देगा विशेषांक

राष्ट्रधर्म के संपादक अशोक वाजपेयी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पंच परिवर्तन में पर्यावरण संरक्षण एक महत्वपूर्ण विषय है और जल संरक्षण इसका अभिन्न हिस्सा है। इसी उद्देश्य से पत्रिका का विशेषांक ‘जल है तो कल है’ तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि विशेषांक में जल से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक विचारों, पारंपरिक संरक्षण प्रणालियों, मौजूदा चुनौतियों और देश के विभिन्न हिस्सों में किए गए सफल प्रयासों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य जल संकट पर देशव्यापी चर्चा को प्रोत्साहित करना और पारंपरिक ज्ञान तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में प्रयास करना है।

सुरेश सोनी की पुस्तक के सातवें संस्करण का भी विमोचन

कार्यक्रम का संचालन संपादक मंडल के सदस्य डॉ. अनुज मिश्रा ने किया, जबकि प्रभारी निदेशक सर्वेशचंद्र द्विवेदी ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य सुरेश सोनी की पुस्तक ‘हमारी सांस्कृतिक विचारधारा के मूल स्रोत’ के सातवें संस्करण का भी विमोचन किया गया।

कार्यक्रम में प्रांत प्रचारक कौशल, क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष, राष्ट्रधर्म के निदेशक एवं सहक्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोज कांत, राज्य सूचना आयुक्त पी.एन. द्विवेदी, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बी.एन. सिंह, प्रांत संपर्क प्रमुख गंगा सिंह, प्रांत प्रचार प्रमुख अशोक कुमार दुबे, वरिष्ठ प्रचारक अशोक केडिया, डॉ. हरनाम सिंह, देवेंद्र अस्थाना, प्रशांत भाटिया, विभाग प्रचारक अनिल, डॉ. ओम प्रकाश सिंह और राजकिशोर सहित राष्ट्रधर्म से जुड़े पदाधिकारी, लेखक और अन्य अतिथि मौजूद रहे।

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