दशहरे पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच जुबानी जंग, किसानों से लेकर हिंदुत्व तक के मुद्दों पर आमने-सामने
मुंबई: महाराष्ट्र में दशहरा और विजयादशमी के अवसर पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने-अपने संबोधन में एक-दूसरे पर निशाना साधा। उद्धव ठाकरे ने किसानों की समस्याओं, कानून-व्यवस्था, हिंदुत्व और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए। वहीं, एकनाथ शिंदे ने किसानों की मदद, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और अपनी पार्टी के राजनीतिक विस्तार का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे पर हमला बोला।
उद्धव ठाकरे बोले- महाराष्ट्र ही नहीं, दिल्ली में भी भगवा लहराना है
दशहरा समारोह में उद्धव ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में भगवा माहौल है और अब भगवा केवल महाराष्ट्र के विधान भवन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दिल्ली के सत्ता केंद्र पर भी लहराना चाहिए। उनके इस बयान को आगामी राजनीतिक लड़ाई के संदर्भ में देखा जा रहा है।
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में राज्य की महायुति सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सूखे के हालात गंभीर हो सकते हैं, लेकिन सरकार केवल घोषणाएं कर रही है। उन्होंने पिछले साल भारी बारिश से किसानों को हुए नुकसान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि घोषित आर्थिक सहायता कितने किसानों तक पहुंची और कितने किसानों को फसल बीमा का लाभ मिला।
उद्धव ने किसानों के लिए घोषित 5,000 रुपये की सहायता राशि पर भी सवाल उठाए और कहा कि इतनी रकम से किसानों की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।
टाइगर श्रॉफ पर हमले का जिक्र कर कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
उद्धव ठाकरे ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े हमले का उल्लेख करते हुए महाराष्ट्र की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि घटना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जवाब मिलना चाहिए कि हथियार लेकर आए लोग मुंबई में दाखिल कैसे हुए।
उन्होंने पुलिस व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नवरात्रि जैसे अवसर पर हथियार लेकर आए लोगों की गतिविधियों का पहले पता क्यों नहीं चला। उद्धव ने आरोप लगाया कि राज्य की पुलिस और अन्य संस्थाओं का इस्तेमाल प्रभावी ढंग से नहीं किया जा रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने शहरी नक्सलवाद के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि महाराष्ट्र को शहरी नक्सलवाद का केंद्र बताने के बीच राज्य में अपराध और हथियारों से जुड़ी घटनाओं पर सरकार क्या जवाब देगी।
‘रिजीम चेंज’ और ज्ञानेश कुमार को लेकर भी साधा निशाना
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में सत्ता परिवर्तन के मुद्दे का समर्थन करते हुए कहा कि वह रिजीम चेंज यानी सत्ता परिवर्तन के पक्ष में हैं। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए और चुनावी प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई।
उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और विवेक भीमनवार को छुट्टी पर भेजे जाने का उल्लेख करते हुए पूछा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी राजनीतिक निशाना साधा।
उद्धव ने रावण के दस सिरों का उदाहरण देते हुए ज्ञानेश कुमार को लेकर टिप्पणी की और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उन्हें बचा रही है।
हिंदुत्व और मराठी भाषा को लेकर भी बयान
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में हिंदुत्व और महाराष्ट्र की भाषाई पहचान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र किसी भी स्थिति में कमजोर या लाचार राज्य नहीं है। उन्होंने विरोधियों पर तंज कसते हुए कहा कि जो लोग खुद राजनीतिक रूप से कमजोर दिखाई देते हैं, वे दूसरों को हिंदुत्व का पाठ पढ़ा रहे हैं।
उन्होंने आंदोलन कर रहे लोगों और बच्चों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें कमजोर नहीं समझना चाहिए और आंदोलन करने वाले लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
एकनाथ शिंदे बोले- किसानों की मदद के लिए भेजे 100 ट्रक
दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने दशहरा संबोधन में किसानों की सहायता का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के किसान सूखे के कारण परेशान हैं और शिवसेना उनकी मदद के लिए आगे आई है।
शिंदे ने दावा किया कि किसानों की सहायता के लिए 100 ट्रक सामग्री भेजी गई है और इसके बाद मदद की दूसरी खेप भी भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि वह खुद किसान परिवार से आते हैं और किसानों की परेशानी को समझते हैं।
उन्होंने अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें रोजाना आलोचना का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी प्राथमिकता किसानों की मदद करना और जरूरतमंदों के आंसू पोंछना है।
उद्धव ठाकरे पर शिंदे का हमला
एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पीछे के दरवाजे से मुख्यमंत्री बने थे। उनके इस बयान को दोनों नेताओं के बीच जारी राजनीतिक टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
शिंदे ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के खिलाफ की गई कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश ने कई आतंकी हमले देखे, जबकि अब हमले करने वालों को जवाब दिया जाता है। उन्होंने पाकिस्तान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की मौजूदा स्थिति पर देश को गर्व होना चाहिए।
‘जहां संकट, वहां शिवसेना’
शिंदे ने कहा कि संकट के समय लोगों की मदद करना शिवसेना की पहचान है। उन्होंने इजरायल और नेपाल से लोगों को वापस लाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘जहां संकट, वहां शिवसेना; जहां आपदा, वहां एकनाथ शिंदे।’
उन्होंने अपनी पार्टी की राजनीतिक ताकत का जिक्र करते हुए दावा किया कि शिवसेना के पास 15 सांसद, 74 विधायक और 1,000 से अधिक नगरसेवक हैं। शिंदे ने इसे बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत से जोड़कर पेश किया।
‘ऑपरेशन 3.0’ पर शिंदे का जवाब
शिंदे ने विपक्ष और राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर पूछे जाने वाले सवालों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि उनसे अक्सर पूछा जाता है कि ऑपरेशन 1 और 2 के बाद ऑपरेशन 3.0 कब होगा। इस पर उन्होंने कहा कि वह किसी कार्रवाई की तारीख पहले से घोषित नहीं करते।
अपने संबोधन में उन्होंने अपने बेटे श्रीकांत शिंदे का भी जिक्र किया और राजनीतिक विरोधियों पर तंज कसा।
शिवसेना में शामिल होने वालों की संख्या बढ़ने का दावा
एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनकी पार्टी में शामिल होने के इच्छुक लोगों की कतार लगी हुई है। उन्होंने कहा कि लोगों के शिवसेना में आने के कारणों पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने एक पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश के सेवानिवृत्ति के बाद पार्टी में शामिल होने का भी उल्लेख किया।
शिंदे ने कानूनी लड़ाई को लेकर विरोधियों को आश्वस्त करने के अंदाज में कहा कि इसकी चिंता उन्हें करने दी जाए।
दशहरा के मौके पर दोनों नेताओं के बयानों में किसानों की समस्याओं, हिंदुत्व, कानून-व्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक नेतृत्व जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों के संबोधन ने महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच जारी प्रतिस्पर्धा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।
