Neha Bora Statement: नेहा बोरा के बयान पर धीरेंद्र शास्त्री की प्रतिक्रिया, बोले- ‘बांग्लादेश बांग्लादेश है और भारत भारत’
बांग्लादेश में छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए भारत में भी ऐसे आंदोलन की बात कहने के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा चर्चा में हैं। उनके बयान पर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत की परिस्थितियां बांग्लादेश से अलग हैं और देश में संविधान तथा कानून के तहत लोगों को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा, “बांग्लादेश बांग्लादेश है और भारत भारत है।” उन्होंने यह भी कहा कि भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति बनाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। इस संदर्भ में उन्होंने उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र किया।
‘भारत में कानून और संविधान के तहत मिलती है स्वतंत्रता’
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत की संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां लोगों को अपने विचार रखने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि कई लोग उनके और भगवान राम के खिलाफ भी बयान देते हैं, जबकि संतों पर भी टिप्पणियां की जाती हैं। इसके बावजूद लोगों को अपनी बात कहने का अवसर मिलता है।
उन्होंने भारत और बांग्लादेश की परिस्थितियों में अंतर बताते हुए कहा कि देश में कानून और संविधान के तहत व्यवस्था संचालित होती है। उनके बयान के बाद नेहा बोरा के कथित वक्तव्य और उस पर हो रही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
धर्मांतरण और आरक्षण पर भी रखी राय
धर्मांतरण और आरक्षण के मुद्दे पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। साथ ही, उन्होंने कुछ संस्थाओं पर गुप्त तरीके से धर्मांतरण कराने के आरोप भी लगाए।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत बताते हुए संबंधित संस्थाओं की आलोचना की। हालांकि, आरक्षण की पात्रता और धर्मांतरण से जुड़े किसी भी मामले में संबंधित न्यायिक फैसले का वास्तविक दायरा समझने के लिए उसके आधिकारिक आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों को देखना जरूरी है।
बुंदेलखंड की परिवर्तन यात्रा में नशामुक्ति पर जोर
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बुंदेलखंड में निकाली गई परिवर्तन यात्रा के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान कई गांवों में लोगों ने नशामुक्ति का संकल्प लिया। उनके मुताबिक, नशा क्षेत्र की प्रमुख सामाजिक समस्याओं में शामिल है।
उन्होंने यात्रा में लोगों की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि कई जगह लोग घंटों तक सड़कों पर खड़े रहकर यात्रा का स्वागत करते रहे। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इसे सामाजिक बदलाव की दिशा में एक प्रयास बताया।
उन्होंने कहा कि विचारों में बदलाव से समाज में सुधार आता है और समाज में सुधार से देश में परिवर्तन की राह बनती है। उनके अनुसार, परिवर्तन यात्रा का उद्देश्य लोगों को नशे से दूर रहने और सामाजिक सुधार के लिए प्रेरित करना था।
