RBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में बड़ा बदलाव, अब साल में दो बार होगी परीक्षा; जानें नए नियम
जयपुर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब 10वीं बोर्ड परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाएगी। बोर्ड सचिव की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव कम करने के साथ-साथ उन्हें अपने अंकों में सुधार का अवसर देना है।
अगर कोई विद्यार्थी पहली बोर्ड परीक्षा में अपेक्षा के मुताबिक अंक हासिल नहीं कर पाता है, तो वह दूसरी परीक्षा में शामिल होकर अपने अंकों में सुधार कर सकेगा।
फरवरी-मार्च में पहली और मई-जून में दूसरी परीक्षा
नई व्यवस्था के तहत 10वीं की पहली मुख्य परीक्षा फरवरी-मार्च में आयोजित होगी, जबकि दूसरी परीक्षा मई-जून में होगी।
पहली मुख्य परीक्षा में सभी पंजीकृत नियमित और निजी विद्यार्थियों का शामिल होना अनिवार्य होगा। यह परीक्षा 100 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर आयोजित की जाएगी। वहीं, दूसरी परीक्षा उन विद्यार्थियों के लिए होगी, जो पहली परीक्षा के परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं या नियमों के तहत किसी विषय में सफल नहीं हो पाए हैं।
सत्र 2026-27 से खत्म होगी सप्लीमेंट्री परीक्षा
RBSE के अनुसार, सत्र 2026-27 से सप्लीमेंट्री परीक्षा की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इसके स्थान पर मई-जून में दूसरी परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसी परीक्षा के जरिए पात्र विद्यार्थियों को अंक सुधारने और कुछ परिस्थितियों में उसी शैक्षणिक सत्र में उत्तीर्ण होने का अवसर मिलेगा।
किन विषयों में कर सकेंगे अंक सुधार?
मुख्य परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थी अधिकतम तीन विषयों में अंक सुधार के लिए दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इनमें प्रमुख रूप से:
- हिंदी
- अंग्रेजी
- विज्ञान
- गणित
- सामाजिक विज्ञान
- व्यावसायिक शिक्षा
- संस्कृत/तीसरी भाषा
शामिल हैं। हालांकि, दूसरी परीक्षा में विद्यार्थी अपने विषयों को बदल नहीं सकेंगे।
ज्यादा अंक वाली परीक्षा का परिणाम माना जाएगा
नई व्यवस्था में विद्यार्थी की दोनों परीक्षाओं में से जिस परीक्षा में ज्यादा अंक होंगे, उन्हीं अंकों को अंतिम अंकतालिका में शामिल किया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी विद्यार्थी के दूसरी परीक्षा में पहली परीक्षा की तुलना में अधिक अंक आते हैं, तो दूसरी परीक्षा के बेहतर अंक अंतिम परिणाम में दर्ज किए जाएंगे। वहीं, यदि पहली परीक्षा में अधिक अंक हैं, तो पहली परीक्षा के अंक ही बरकरार रहेंगे।
दो विषयों में फेल होने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा मौका
आधिकारिक आदेश के अनुसार, मुख्य परीक्षा में अधिकतम दो विषयों में 33 प्रतिशत से कम अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को मई में होने वाली सुधारात्मक परीक्षा में शामिल होना होगा।
इसके अलावा, यदि कोई विद्यार्थी एक विषय में अनुपस्थित रहता है और दूसरे विषय में 33 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करता है, तो उसे भी संबंधित विषयों की सुधारात्मक परीक्षा देनी होगी। इसे ईआई (Essential Improvement/आवश्यक सुधार) के रूप में चिह्नित किया जाएगा।
तीन या उससे अधिक विषयों में फेल होने पर नहीं मिलेगा दूसरा मौका
यदि कोई विद्यार्थी तीन या उससे अधिक विषयों में फेल होता है या परीक्षा में अनुपस्थित रहता है, तो उसे दूसरी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ऐसे विद्यार्थियों को अगले वर्ष सभी विषयों की परीक्षा दोबारा देनी होगी।
RBSE की यह नई व्यवस्था विद्यार्थियों को अपने प्रदर्शन में सुधार का अतिरिक्त अवसर देने के साथ-साथ परीक्षा परिणाम को लेकर होने वाले तनाव को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव मानी जा रही है।
