शेख हसीना बोलीं- इसी साल बांग्लादेश लौटूंगी, मौत की सजा के बावजूद लोकतंत्र और अवामी लीग की वापसी का दावा
नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश से बाहर रहने और उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही के बीच इस साल बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया है। NDTV को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनकी वापसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं, बल्कि लोकतंत्र, कानून के शासन और जनता के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है। शेख हसीना ने दावा किया कि उनके खिलाफ सुनाया गया मौत की सजा का फैसला राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इसे उन्होंने “अवैध और असंवैधानिक प्रक्रिया” का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का उपयोग राजनीतिक प्रतिशोध के लिए किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उनकी पार्टी अवामी लीग को कमजोर करना है। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि वह मौत से नहीं डरतीं और 1975 में अपने परिवार को खोने तथा 21 अगस्त के ग्रेनेड हमले का सामना करने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वह लगातार चुनौतियों के बावजूद जनता के साथ खड़ी रही हैं।
अवामी लीग और राजनीतिक हालात पर बयान
शेख हसीना ने अवामी लीग को एक “मजबूत राजनीतिक शक्ति” बताते हुए कहा कि यह केवल एक संगठन नहीं बल्कि जनता से जुड़ा आंदोलन है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी पर प्रतिबंध और दमन के बावजूद उसके समर्थन में जनता का रुझान बना हुआ है। उन्होंने बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि लोकतंत्र, कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता कमजोर हुई है। साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए।
लोकतंत्र और विकास पर जोर
इंटरव्यू में हसीना ने अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में बांग्लादेश ने आर्थिक प्रगति की थी, जिसमें जीडीपी वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी और बड़े बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट शामिल थे। उन्होंने कहा कि मुक्ति संग्राम की भावना और संविधान के मूल सिद्धांतों—लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय—को कमजोर किया जा रहा है, जो देश की मूल पहचान के खिलाफ है।
भारत में जीवन और वापसी का संकल्प
शेख हसीना ने स्वीकार किया कि निर्वासन का जीवन उनके लिए कठिन है, लेकिन उन्होंने कहा कि उनका ध्यान लगातार बांग्लादेश की स्थिति पर बना हुआ है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लोकतंत्र और मानवाधिकारों का मुद्दा उठाने की बात भी कही। उन्होंने दोहराया कि वह इस साल बांग्लादेश लौटेंगी और उनका संघर्ष अंतिम दिन तक जारी रहेगा।