उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को ठाणे-पालघर बेल्ट में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद आनंद परांजपे ने NCP के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना का दामन थाम लिया है।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, विधान परिषद चुनाव के लिए टिकट नहीं मिलने से आनंद परांजपे नाराज बताए जा रहे थे। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया।
पहले भी शिवसेना से जुड़े रहे हैं परांजपे
जानकारी के अनुसार, आनंद परांजपे का परिवार लंबे समय से शिवसेना से जुड़ा रहा है। उनके पिता भी शिवसेना में सक्रिय थे और खुद परांजपे शिवसेना के टिकट पर सांसद रह चुके हैं।
करीब 12 साल पहले उन्होंने NCP का दामन थामा था। बाद में जब Ajit Pawar और Sharad Pawar के बीच राजनीतिक विभाजन हुआ, तब परांजपे ने अजित पवार गुट का समर्थन किया था।
ठाणे-कल्याण क्षेत्र में मजबूत पकड़
आनंद परांजपे को ठाणे-कल्याण और पालघर क्षेत्र में प्रभावशाली नेता माना जाता है। स्थानीय राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ और संगठनात्मक क्षमता के चलते उन्हें एक अहम चेहरा माना जाता रहा है।
ऐसे समय में जब महायुति गठबंधन पहले से ही आंतरिक समीकरणों को लेकर चर्चा में है, परांजपे का Eknath Shinde की शिवसेना में शामिल होना कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।
हाल ही में NCP की कार्यकारिणी सूची को लेकर भी विवाद सामने आया था। इसके अलावा Rohit Pawar द्वारा सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को लेकर दिए गए बयानों ने भी पार्टी के भीतर की हलचल को बढ़ा दिया था।
इस्तीफे में जताया आभार
अपने इस्तीफे में आनंद परांजपे ने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें संगठन में कई जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि अब वे अपनी राजनीतिक यात्रा में एक नया रास्ता चुन रहे हैं।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि आनंद परांजपे की शिवसेना नेताओं के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं, जिसके बाद उनके पार्टी बदलने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
