पड़ोसी देश बांग्लादेश में ‘सत्ता परिवर्तन’ पर भारत की मुहर: पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी ऐतिहासिक जीत की बधाई, साझा विकास का नया संकल्प
नई दिल्ली/ढाका: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति के लिए आज का दिन एक नए अध्याय की शुरुआत लेकर आया है। बांग्लादेश में पिछले 18 महीनों से जारी राजनीतिक अस्थिरता, सड़क पर संघर्ष और अनिश्चितता के दौर का अंत करते हुए जनता ने अपना निर्णायक फैसला सुना दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने आम चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल कर सत्ता के गलियारों में जोरदार वापसी की है। इस बड़ी जीत पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देते हुए दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकेत दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से तारिक रहमान और उनकी पार्टी की सफलता की सराहना की। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि बीएनपी को मिला यह जनादेश वास्तव में बांग्लादेश के आम लोगों के उनके नेतृत्व और विजन पर अटूट भरोसे को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत हमेशा से एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश का समर्थक रहा है और भविष्य में भी इस प्रतिबद्धता को पूरी मजबूती के साथ जारी रखेगा। भारत के प्रधानमंत्री की यह बधाई न केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि नई दिल्ली अब ढाका में नई सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पीएम मोदी ने भारत-बांग्लादेश के भविष्य के रिश्तों पर बात करते हुए स्पष्ट किया कि वे तारिक रहमान के साथ मिलकर दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने साझा विकास लक्ष्यों, व्यापारिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय में बांग्लादेश में आए राजनीतिक बदलावों के बाद भारत की प्रतिक्रिया पर दुनिया भर की नजरें टिकी थीं। पीएम मोदी का यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाता है जिनमें कहा जा रहा था कि सत्ता परिवर्तन से द्विपक्षीय संबंधों में ठंडापन आ सकता है।
बांग्लादेश के चुनावी नतीजों के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि देश की जनता ने बदलाव के पक्ष में एकतरफा मतदान किया है। बांग्लादेश की संसद, जिसे ‘जातीय संसद’ कहा जाता है, में कुल 300 सीटें हैं। इस बार 299 सीटों पर मतदान संपन्न हुआ, जबकि शेरपुर-3 सीट पर एक प्रत्याशी के निधन के कारण मतदान रद्द कर दिया गया था। बीएनपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जो उसे संसद में अत्यंत शक्तिशाली स्थिति में खड़ा करता है। वहीं दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को जनता ने सिरे से नकार दिया है और वह अब तक केवल 73 सीटों पर सिमटता नजर आ रहा है। 150 सीटों के जादुई आंकड़े को बीएनपी ने आसानी से पार कर लिया है, जिससे तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
भारत में विपक्ष ने भी पड़ोसी देश के इस लोकतांत्रिक बदलाव का स्वागत किया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी तारिक रहमान और बीएनपी को उनकी ऐतिहासिक सफलता पर बधाई दी। खरगे ने अपनी शुभकामनाओं में कहा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से वे इस बड़ी जीत का अभिनंदन करते हैं। यह दर्शाता है कि बांग्लादेश के साथ बेहतर संबंधों को लेकर भारत में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच एक आम सहमति है।
बांग्लादेश की चुनावी प्रक्रिया में 300 सामान्य सीटों के अलावा 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं। इन आरक्षित सीटों का आवंटन चुनाव में राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के आधार पर आनुपातिक रूप से किया जाता है। बीएनपी की भारी जीत के बाद, इन आरक्षित सीटों का बड़ा हिस्सा भी उसी के खाते में जाएगा, जिससे सदन में उसकी स्थिति और भी अधिक अभेद्य हो जाएगी।
यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। 18 महीनों के लंबे संघर्ष, शेख हसीना सरकार के जाने के बाद पैदा हुए शून्य और आर्थिक चुनौतियों के बीच इस चुनाव ने देश को एक नई लोकतांत्रिक दिशा दी है। तारिक रहमान के सामने अब न केवल देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था को संभालना होगा, बल्कि भारत के साथ सुरक्षा, जल बंटवारा और सीमा पार व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी संवाद को आगे बढ़ाना होगा। पीएम मोदी का निमंत्रण और बधाई संदेश यह सुनिश्चित करता है कि भारत एक ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभाते हुए बांग्लादेश की प्रगति में सहभागी बनने को तैयार है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि तारिक रहमान की नई सरकार अपनी विदेश नीति में भारत को किस पायदान पर रखती है, लेकिन फिलहाल ढाका से लेकर दिल्ली तक इस जीत की गूंज और शुभकामनाओं का दौर जारी है। यह जीत न केवल तारिक रहमान की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि बांग्लादेश के लोकतंत्र की परिपक्वता का भी प्रमाण है।