शिव भक्तों के लिए रेलवे का बड़ा तोहफा: 11 दिनों में करें देश के 7 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, भारत गौरव ट्रेन में मिलेगी भारी छूट
नई दिल्ली/सिकंदराबाद: देश के करोड़ों शिव भक्तों के लिए भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी (IRCTC) ने आस्था और पर्यटन के संगम वाली एक विशेष सौगात पेश की है। आध्यात्मिक यात्रा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता के तहत, रेलवे विभाग ने ‘भारत गौरव ट्रेन’ के माध्यम से एक व्यापक यात्रा पैकेज की घोषणा की है। ‘सप्त ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा’ के नाम से शुरू हो रही यह यात्रा न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक सुनहरा अवसर है जो एक ही सफर में देश के विभिन्न कोनों में स्थित भगवान शिव के सात प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना चाहते हैं। यह यात्रा 14 अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही है, जिसके लिए आईआरसीटीसी ने बुकिंग प्रक्रिया और विस्तृत विवरण साझा कर दिए हैं।
आध्यात्मिक यात्रा का संपूर्ण खाका
आईआरसीटीसी की इस योजना को न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि पर्यटन को सुगम बनाने के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस विशेष यात्रा का आधिकारिक कोड ‘SCZBG55’ रखा गया है। यह पूरा सफर 10 रातों और 11 दिनों का होगा, जिसमें यात्रियों को ठहरने, खाने-पीने और सुरक्षित आवागमन की पूरी जिम्मेदारी रेलवे की होगी। इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे पूरी तरह से आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि बुजुर्ग और परिवार के साथ यात्रा कर रहे लोग बिना किसी परेशानी के महादेव की भक्ति में लीन हो सकें।
प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के होंगे दर्शन
इस 11 दिवसीय यात्रा के दौरान भक्तों को भारत के प्रसिद्ध सात ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कराए जाएंगे। यात्रा के पड़ावों में उज्जैन का ऐतिहासिक महाकालेश्वर मंदिर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग शामिल हैं। इसके पश्चात ट्रेन गुजरात की ओर प्रस्थान करेगी जहां द्वारका में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग और समुद्र तट पर स्थित भव्य सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन का लाभ मिलेगा। यात्रा के अगले चरण में महाराष्ट्र के तीन प्रमुख स्थलों—पुणे स्थित भीमाशंकर, नासिक का त्र्यंबकेश्वर और औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) स्थित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग को कवर किया जाएगा। यह एक ऐसा व्यवस्थित मार्ग है जो उत्तर से लेकर पश्चिम और मध्य भारत के प्रमुख शिव धामों को एक ही धागे में पिरोता है।
यात्रियों की सुविधा के लिए बोर्डिंग पॉइंट
रेलवे ने दक्षिण और मध्य भारत के यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बोर्डिंग और डी-बोर्डिंग (चढ़ने और उतरने) के लिए कई स्टेशनों का चयन किया है। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार सिकंदराबाद, कमरेंडी, निजामाबाद जंक्शन, धर्माबाद, मुदखेड़ जंक्शन, हज़ूर साहिब नांदेड़ और पूर्णा जंक्शन से ट्रेन में सवार हो सकते हैं। इन स्टेशनों पर उतरने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे स्थानीय यात्रियों को लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सीटों की उपलब्धता और श्रेणियों का विवरण
यात्रा को हर वर्ग के बजट के अनुकूल बनाने के लिए रेलवे ने सीटों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है। ट्रेन में कुल 702 सीटों की क्षमता है। इसमें बजट यात्रियों के लिए सामान्य श्रेणी (स्लीपर क्लास – SL) में 160 सीटें रखी गई हैं। मध्यम वर्ग और परिवारों की सुविधा के लिए थ्री-एसी (3AC) में सर्वाधिक 490 सीटें उपलब्ध हैं, जबकि अधिक विलासिता और आराम चाहने वाले यात्रियों के लिए टू-एसी (2AC) श्रेणी में 52 सीटें आरक्षित की गई हैं। यह विविधता यह सुनिश्चित करती है कि आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, भक्त अपने आराध्य के दर्शन के लिए इस विशेष ट्रेन का हिस्सा बन सकें।
किराया और आकर्षक छूट
किराये की बात करें तो रेलवे ने इसे काफी प्रतिस्पर्धी और किफायती रखा है। सामान्य श्रेणी के लिए प्रति व्यक्ति किराया 17,600 रुपये तय किया गया है। वहीं, थ्री-एसी के लिए यात्रियों को 26,700 रुपये और टू-एसी श्रेणी के लिए 34,600 रुपये का भुगतान करना होगा। बच्चों के लिए भी विशेष रियायती दरों की व्यवस्था की गई है; 5 से 11 वर्ष के बच्चों के लिए स्लीपर में 16,300 रुपये, थ्री-एसी में 25,200 रुपये और टू-एसी में 32,800 रुपये शुल्क निर्धारित है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार की ‘भारत गौरव ट्रेन’ योजना के तहत, भारतीय रेलवे ने यात्रियों को प्रोत्साहित करने के लिए किराये में लगभग 33 प्रतिशत तक की भारी छूट दी है। यह छूट पहले से ही निर्धारित किराये में शामिल है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है।
बुकिंग और अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
आईआरसीटीसी ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई यात्री अकेले बुकिंग करता है (सिंगल बुकिंग), तो उसे अन्य सह-यात्रियों के साथ सीट या कमरा साझा करना होगा। यात्रा के दौरान खान-पान शुद्ध शाकाहारी होगा और रुकने वाले स्थानों पर रेलवे द्वारा होटल या गेस्ट हाउस की व्यवस्था भी श्रेणियों के अनुसार की जाएगी। रेलवे विभाग के अनुसार, यह यात्रा न केवल एक पर्यटन है बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का एक माध्यम भी है।
शिव भक्तों के लिए यह 14 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा एक यादगार अनुभव साबित होने वाली है। गर्मियों की छुट्टियों से ठीक पहले शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए बुकिंग शुरू हो चुकी है, और सीटों की सीमित संख्या को देखते हुए रेलवे ने इच्छुक यात्रियों से जल्द से जल्द आवेदन करने की अपील की है।