सुप्रीम कोर्ट ने ‘घूसखोर पंडित’ टाइटल पर लगाई रोक: फिल्म का नाम बदलने का निर्देश, दोपहर 12:30 बजे तक नया टाइटल बताएं
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नेटफ्लिक्स और फिल्ममेकर नीरज पांडे की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के विवादित टाइटल पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यह शीर्षक किसी खास समुदाय (खासकर ब्राह्मण/पुजारी वर्ग) की बेइज्जती करता प्रतीत होता है, इसलिए इसे मौजूदा रूप में मंजूरी नहीं दी जा सकती। अदालत ने मेकर्स को दोपहर 12:30 बजे तक नया टाइटल प्रस्तावित करने का आदेश दिया।
कोर्ट की तीखी टिप्पणियांजस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा:
- “रचनात्मक स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित है, लेकिन यह असीमित नहीं है।”
- “आप किसी की बेइज्जती क्यों करेंगे? यह नैतिकता और पब्लिक ऑर्डर के खिलाफ है।”
- “संविधान निर्माताओं ने देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए भाईचारे की अवधारणा दी थी। किसी समुदाय को अपमानित करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता।”
कोर्ट ने दोहराया कि जब तक टाइटल नहीं बदला जाता, फिल्म को इस नाम से रिलीज या स्ट्रीमिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।
PIL में क्या आरोप लगाए गए?याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि ‘घूसखोर पंडित’ शीर्षक हिंदू पुजारियों और ब्राह्मण समुदाय की छवि को खराब करता है। यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है और जाति-धर्म आधारित स्टीरियोटाइपिंग को बढ़ावा देता है, जिससे सामाजिक-सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। याचिका में फिल्म की रिलीज और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीमिंग पर तत्काल रोक की मांग की गई थी।
हाई कोर्ट में पहले क्या हुआ?इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में भी इसी मुद्दे पर सुनवाई हुई थी। नेटफ्लिक्स ने हाई कोर्ट को बताया था कि मेकर्स टाइटल बदलने को तैयार हैं और सारे प्रमोशनल मटेरियल सोशल मीडिया से हटा दिए गए हैं। हाई कोर्ट ने मामले को सुलझा हुआ मान लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए नए टाइटल की स्पष्ट जानकारी रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया।
मेकर्स का पक्षफिल्म निर्माताओं के वकील ने कहा कि टाइटल अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है और मामला हाई कोर्ट में भी लंबित है। उन्होंने फिल्म को एक पुलिस ड्रामा बताया, जिसमें एक पुजारी का किरदार है। कोर्ट ने जवाब में कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत दी गई सीमाओं के अधीन है और किसी समुदाय की बेइज्जती की अनुमति नहीं दी जा सकती।
अगली सुनवाई और निर्देशसुप्रीम कोर्ट ने रेस्पॉन्डेंट्स (मेकर्स और नेटफ्लिक्स) को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे नए टाइटल के साथ एक एफिडेविट दाखिल करें और आदेश के अनुपालन में किए गए बदलावों की जानकारी दें। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी। कोर्ट ने साफ कहा कि समयसीमा का सख्ती से पालन होगा और अनावश्यक देरी या बार-बार तारीख नहीं दी जाएगी।
फिल्म के बारे में‘घूसखोर पंडित’ में मनोज बाजपेयी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म का निर्देशन नीरज पांडे कर रहे हैं और इसे नेटफ्लिक्स पर रिलीज करने की योजना थी। विवाद के बाद टाइटल में बदलाव लगभग तय माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि मेकर्स कौन सा नया नाम चुनते हैं और क्या इससे विवाद पूरी तरह खत्म हो पाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि रचनात्मक आजादी महत्वपूर्ण है, लेकिन सामाजिक सद्भाव, संवैधानिक मर्यादा और पब्लिक ऑर्डर उससे भी ऊपर हैं।