नई राफेल डील: मोदी सरकार ने फ्रांस से अतिरिक्त राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दी, भारतीय वायुसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा
- अंबाला एयरबेस – ‘गोल्डन एरोज’ स्क्वाड्रन
- हाशिमारा एयरबेस – ‘फाल्कन्स’ स्क्वाड्रन
राफेल की घातक हथियार प्रणालीराफेल को दुनिया के सबसे उन्नत मल्टी-रोल फाइटर जेट्स में गिना जाता है। इसके प्रमुख हथियार:
- Meteor BVRAAM – हवा से हवा में मार करने वाली विश्व की सबसे लंबी रेंज वाली मिसाइल (100+ किमी)
- SCALP – हवा से जमीन पर मार करने वाली क्रूज मिसाइल (300-500 किमी रेंज), दुश्मन के बंकरों और सुदृढ़ ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम
- HAMMER – स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन गाइडेड मुनिशन, मजबूत ढांचों को तबाह करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई
राफेल का उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम
- RBE2 AESA रडार – एक साथ 40 टारगेट्स को ट्रैक करने की क्षमता
- SPECTRA – इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, जो दुश्मन के रडार से बचाव करता है और खतरों को जैम करने में मदद करता है
- हेलमेट माउंटेड डिस्प्ले – पायलट को हेलमेट पर ही सभी महत्वपूर्ण डेटा दिखाई देता है
नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन की पहले से डीलइससे पहले अप्रैल 2025 में भारत ने 26 राफेल-मरीन (Rafale-M) विमानों की खरीद के लिए फ्रांस के साथ 63 हजार करोड़ रुपये की डील की थी। ये विमानवाहक पोतों (INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य) से उड़ान भरने में सक्षम हैं। इस सौदे में ट्रेनिंग, हथियार, सिमुलेटर और लॉन्ग-टर्म सपोर्ट भी शामिल है।नई डील के तहत कितने अतिरिक्त राफेल जेट्स खरीदे जाएंगे, इसकी संख्या और लागत अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन यह कदम भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन ताकत को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।राफेल की नई खेप से भारत की हवाई शक्ति में न केवल मात्रा बल्कि गुणवत्ता का भी इजाफा होगा, जो क्षेत्रीय चुनौतियों के सामने और मजबूत रुख अपनाने में मदद करेगा।