तमिलनाडु में मतदाता सूची संशोधन का अंतिम चरण: आज समाप्त हो रही है आपत्तियों की समयसीमा, 17 फरवरी को प्रकाशित होगा अंतिम डेटा
चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव और आगामी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की तैयारी के बीच राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का कार्य अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, आज यानी मंगलवार को मतदाता सूची में सुधार, नाम जोड़ने और हटाने से संबंधित दावों और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम समयसीमा है। आज शाम कार्यालय समय समाप्त होने के साथ ही संशोधन की खिड़की बंद हो जाएगी, जिसके बाद निर्वाचन अधिकारी डेटा के अंतिम मिलान और सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा करेंगे। इस गहन कवायद का मुख्य उद्देश्य एक त्रुटिहीन और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है, जिसका औपचारिक प्रकाशन 17 फरवरी को किया जाएगा।
तमिलनाडु चुनाव आयोग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस पूरी संशोधन प्रक्रिया के बाद राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 5.65 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। मतदाताओं के पंजीकरण और डेटा शुद्धिकरण की यह व्यापक प्रक्रिया पिछले साल 19 दिसंबर को शुरू हुई थी, जब राज्य भर में मतदाता सूची का मसौदा (ड्राफ्ट रोल) प्रकाशित किया गया था। मसौदा सूची के प्रकाशन से पहले बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर सत्यापन का कार्य किया था, ताकि सूची में मौजूद विसंगतियों को न्यूनतम किया जा सके। 19 दिसंबर को मसौदा जारी होने के बाद से ही नागरिकों को अपने विवरणों की जांच करने और किसी भी प्रकार के संशोधन के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान किए गए थे।
इस बार की संशोधन प्रक्रिया में जनता की भागीदारी अभूतपूर्व रही है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, लगभग 34 लाख लोगों ने अपने मतदान पत्र में विभिन्न प्रकार के सुधारों के लिए आवेदन जमा किए। इन आवेदनों में एक बड़ा हिस्सा पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का है, जो लोकतंत्र के उत्सव में पहली बार अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उत्साहित हैं। इसके अलावा, बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन भी प्राप्त हुए जो निवास स्थान बदलने के कारण अपना मतदान केंद्र बदलवाना चाहते थे या जिनके नाम, पते और फोटो जैसी व्यक्तिगत जानकारी में लिपिकीय त्रुटियां थीं। नागरिकों की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने न केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन स्वीकार किए, बल्कि विभिन्न जिलों में विशेष शिविरों का भी आयोजन किया, ताकि तकनीक से दूर रहने वाले लोग भी आसानी से अपना पंजीकरण करा सकें।
हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान अधिकारियों को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। मसौदा सूची की गहन जांच के दौरान लगभग 12 लाख ऐसे मतदाता चिह्नित किए गए, जिनके नाम सूची में तो थे लेकिन उनके दावों के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। ऐसे सभी संदिग्ध मामलों के लिए चुनाव अधिकारियों ने सख्ती दिखाते हुए नोटिस जारी किए। इन मतदाताओं से निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी पहचान और पात्रता का वैध प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया था। चुनाव आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि बिना दस्तावेजी प्रमाण के किसी भी व्यक्ति का नाम अंतिम सूची में शामिल न किया जाए। आज की समयसीमा समाप्त होने से पहले, जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारी इन 12 लाख नोटिसों के जवाबों का सत्यापन करने और दस्तावेजों के संग्रह को अंतिम रूप देने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने तमिलनाडु के चुनाव अमले को विशेष निर्देश जारी किए हैं कि अंतिम सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए लेकिन सटीकता से कोई समझौता न हो। आयोग का जोर इस बात पर है कि अंतिम सूची में केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम हों जो वास्तव में उस क्षेत्र के निवासी हैं और मतदान के लिए पात्र हैं। फर्जी मतदाताओं और दोहरी प्रविष्टियों को हटाने के लिए सॉफ्टवेयर और जमीनी सत्यापन दोनों का सहारा लिया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि आज रात तक सभी लंबित सत्यापन कार्य पूरे कर लिए जाएंगे, जिससे 17 फरवरी को बिना किसी देरी के अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन सुनिश्चित हो सकेगा।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने मतदाताओं से अपील की है कि वे आज शाम तक अपने आवेदनों की स्थिति की जांच कर लें। एक बार जब 17 फरवरी को अंतिम सूची प्रकाशित हो जाएगी, तो आगामी चुनावी प्रक्रियाओं के लिए वही सूची आधार बनेगी। इस संशोधन प्रक्रिया को तमिलनाडु में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। 34 लाख आवेदनों का निपटारा और 12 लाख संदिग्ध नामों की छंटनी यह दर्शाती है कि आयोग इस बार मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर कितना गंभीर है।
आगामी 17 फरवरी को जब तमिलनाडु की नई और अद्यतन मतदाता सूची सार्वजनिक होगी, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्य के चुनावी मानचित्र में कितने नए चेहरे जुड़े हैं और कितने पुराने नामों को सूची से बाहर किया गया है। वर्तमान में, पूरा सरकारी अमला यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि आज की अंतिम समयसीमा के भीतर हर एक वैध आवेदन को स्वीकार कर लिया जाए ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे।