पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानों में कोहरे का अलर्ट: सक्रिय हो रहा है नया पश्चिमी विक्षोभ, यात्रा और यातायात पर पड़ेगा बड़ा असर
नई दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के उत्तरी राज्यों में मौसम के मिजाज में बड़े बदलाव की चेतावनी जारी की है। विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दो दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क और सामान्य बना रहेगा, लेकिन इसके तुरंत बाद एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर-पश्चिम भारत में दस्तक देने वाला है। इस नए मौसमी सिस्टम के सक्रिय होने से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में व्यापक स्तर पर बारिश और बर्फबारी की संभावनाएं जताई जा रही हैं। वहीं, मैदानी इलाकों में सुबह और रात के समय घने कोहरे का कहर जारी रहने वाला है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात सेवाओं के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पाकिस्तान और उसके आसपास के वायुमंडल के ऊपरी हिस्सों में मौजूद है, जिसके कारण पहाड़ों पर बादलों की आवाजाही बढ़ी हुई है। हालांकि, असली बदलाव 8 फरवरी की रात से देखने को मिलेगा, जब एक और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र में प्रवेश करेगा। इस सिस्टम के प्रभाव से पर्वतीय क्षेत्रों में नमी बढ़ेगी और बादलों का घनत्व गहरा हो जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि 9 फरवरी से लेकर 11 फरवरी के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी और निचले इलाकों में बारिश की प्रबल संभावना है।
पहाड़ों में होने वाली इस बर्फबारी का सीधा असर तापमान और स्थानीय जनजीवन पर पड़ेगा। बर्फबारी के कारण इन राज्यों में कड़ाके की ठंड की वापसी होगी और कई प्रमुख मार्ग बर्फ की मोटी चादर से ढक सकते हैं। मौसम विभाग ने ऊंचाई वाले स्थानों पर रहने वाले लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। स्थानीय प्रशासन को भी बर्फबारी के दौरान सड़कों की सफाई और आपातकालीन सेवाओं को दुरुस्त रखने के संकेत दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों पर बर्फ जमने के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ जाएगी, जिससे वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है।
कोहरे की स्थिति को लेकर मौसम विभाग ने विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के लिए चेतावनी जारी की है। विभाग का मानना है कि 8 फरवरी तक राज्य के कई हिस्सों में सुबह और रात के समय ‘अत्यधिक घना कोहरा’ छा सकता है। कोहरे के कारण दृश्यता (Visibility) शून्य तक गिर सकती है, जो विशेष रूप से पहाड़ी घुमावदार रास्तों पर वाहन चलाने वालों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी। कोहरे और बर्फबारी के दोहरे प्रभाव के कारण यातायात सेवाओं में भारी व्यवधान आने की आशंका है। हवाई अड्डों पर उड़ानों में देरी या उनके रद्द होने की संभावना बनी हुई है, वहीं लंबी दूरी की ट्रेनों की रफ्तार भी कम रह सकती है। सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट देखने के बाद ही बनाएं।
यातायात के अलावा, प्रतिकूल मौसम का असर बिजली और संचार सेवाओं पर भी पड़ सकता है। बर्फबारी वाले क्षेत्रों में बिजली की लाइनों पर बर्फ जमने या तेज हवाओं के कारण ट्रिपिंग की समस्या आम हो जाती है, जिससे कई गांव अंधेरे में डूब सकते हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि ऐसे समय में बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाओं के लिए स्थानीय बिजली बोर्ड को तैयार रहना चाहिए।
तापमान के मोर्चे पर फिलहाल राहत की खबर है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अगले दो से तीन दिनों तक न्यूनतम तापमान में किसी बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना नहीं है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ के गुजर जाने के बाद न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है, जिससे सुबह की ठिठुरन में थोड़ी कमी आएगी। मध्य भारत में पारा स्थिर रहने का अनुमान है, जबकि पूर्वी भारत के राज्यों में अगले 24 घंटों के दौरान तापमान में हल्की गिरावट देखी जा सकती है। दक्षिण भारत की बात करें तो कोमोरिन क्षेत्र में ऊपरी वायुमंडल में एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है, लेकिन मौसम विभाग ने फिलहाल वहां किसी बड़े खतरे या भारी बारिश की आशंका से इनकार किया है।
कुल मिलाकर, अगले 72 घंटे देश के उत्तरी हिस्से के लिए मौसम के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। जहां एक तरफ शुष्क मौसम के बाद पहाड़ों पर बर्फ की सफेद चादर बिछने वाली है, वहीं मैदानों में कोहरा लोगों की रफ्तार थामने के लिए तैयार है। मौसम विभाग ने बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सुबह के समय कोहरे और ठंड से बचने की सलाह दी है।