गौरव गोगोई के कथित ‘पाकिस्तान लिंक’ पर असम में सियासी भूचाल, सीएम सरमा ने जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने का किया ऐलान
गुवाहाटी। असम की राजनीति में रविवार को उस समय एक बड़ा विस्फोट हुआ जब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद गौरव गोगोई, उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई और एक पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के बीच सीधे संबंधों का दावा किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और चिंताजनक हैं। मामले की गंभीरता और इसमें एक मौजूदा सांसद की संलिप्तता को देखते हुए, असम कैबिनेट ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस पूरे प्रकरण की जांच अब केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्रालय को औपचारिक सिफारिश भेजने जा रही है।
मुख्यमंत्री सरमा ने गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एसआईटी की रिपोर्ट के कुछ चौंकाने वाले अंशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट देखने के बाद कैबिनेट के सभी सदस्य हैरान रह गए क्योंकि इसमें गौरव गोगोई और उनके परिवार के पाकिस्तान के साथ सीधे और गहरे संबंधों के प्रमाण मौजूद हैं। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से गौरव गोगोई की पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि एलिजाबेथ मार्च 2011 से मार्च 2012 तक पाकिस्तान में कार्यरत थीं। मुख्यमंत्री का आरोप है कि इसी प्रवास के दौरान गोगोई परिवार के संबंध अली तौकीर शेख नामक एक पाकिस्तानी नागरिक के साथ काफी घनिष्ठ हो गए। सरमा के अनुसार, अली तौकीर शेख महज एक साधारण नागरिक नहीं है, बल्कि वह कथित तौर पर पाकिस्तान के रणनीतिक हितों को साधने के लिए काम करता रहा है।
जांच के घेरे में आए अली तौकीर शेख पर प्रहार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह खुद को एक पर्यावरणविद के रूप में पेश करता है, लेकिन उसकी गतिविधियों का मुख्य केंद्र बिंदु भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि जैसे जटिल और विवादित मुद्दों पर पाकिस्तान के पक्ष को मजबूती देना रहा है। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता पर सवाल उठाते हुए यह भी दावा किया कि यह संदिग्ध व्यक्ति कम से कम 18 बार भारत आ चुका है। उन्होंने कहा कि किसी विदेशी नागरिक का इतनी बार भारत आना और एक प्रमुख राजनीतिक परिवार के साथ घनिष्ठता रखना सामान्य बात नहीं हो सकती, विशेषकर तब जब उसके तार पाकिस्तान के हितों से जुड़े हों।
संसदीय मर्यादा और राष्ट्रवाद के मुद्दे को जोड़ते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने एक पुरानी तस्वीर का भी विशेष रूप से जिक्र किया। इस तस्वीर में गौरव गोगोई कुछ युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में तत्कालीन उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत में उन्हें लगा था कि यह तस्वीर फर्जी हो सकती है, लेकिन बाद में कांग्रेस नेताओं द्वारा इसकी पुष्टि किए जाने के बाद सरकार ने इसे गंभीरता से लिया और जांच शुरू की। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में असम के लाल कैप्टन जितु गोगोई ने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी, ऐसे में राज्य का एक सांसद पाकिस्तान को वैधता दिलाने जैसी गतिविधियों में शामिल दिखे, यह बर्दाश्त से बाहर है।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि असम पुलिस की एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अब मामला राज्य की सीमाओं और अधिकार क्षेत्र से बाहर का प्रतीत होता है। चूंकि इसमें अंतरराष्ट्रीय तार और अंतर-राज्यीय सुरक्षा के पहलू शामिल हैं, इसलिए केंद्रीय एजेंसी ही इसकी निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर सकती है। कैबिनेट का मानना है कि देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता, चाहे इसमें कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न शामिल हो।
दूसरी ओर, इन गंभीर आरोपों के बाद कांग्रेस खेमे में भी खलबली मच गई है। सांसद गौरव गोगोई ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री पर पलटवार किया है। गोगोई का कहना है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद पर लगे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलताओं के आरोपों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की ‘षड्यंत्रकारी राजनीति’ और ‘झूठे दावों’ का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित कदम करार दिया है। हालांकि, मुख्यमंत्री के कड़े रुख और मामले को गृह मंत्रालय भेजने के फैसले ने असम की राजनीति में एक ऐसा मोर्चा खोल दिया है, जिसके परिणाम आने वाले समय में काफी दूरगामी हो सकते हैं। इस विवाद ने अब राष्ट्रवाद बनाम राजनीति की एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।