• February 11, 2026

लोकसभा में भारी हंगामे पर बरसे स्पीकर ओम बिरला: कहा- ‘नियोजित तरीके से बर्बाद किए 19 घंटे’, विपक्ष के व्यवहार पर जताई कड़ी नाराजगी

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच छिड़ा गतिरोध शुक्रवार को और भी तीखा हो गया। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए भारी हंगामे और नारेबाजी पर स्पीकर ओम बिरला ने अपना कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने सदन की कार्यवाही में बार-बार उत्पन्न हो रहे व्यवधान पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि अब तक सदन का कुल 19 घंटे और 13 मिनट का बहुमूल्य समय बर्बाद हो चुका है। स्पीकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्ष एक सोची-समझी रणनीति के तहत सदन की मर्यादाओं को तार-तार कर रहा है और नियोजित तरीके से गतिरोध पैदा कर रहा है।

शुक्रवार, 6 फरवरी को जैसे ही प्रश्नकाल की शुरुआत हुई, विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करते हुए सदन के बीचों-बीच (वेल) आ गए। हाथों में पोस्टर लिए सांसदों के शोर-शराबे के बीच ओम बिरला ने उन्हें शांत कराने की कोशिश की, लेकिन हंगामा थमता न देख उन्होंने विपक्ष को जमकर फटकार लगाई। स्पीकर ने कहा कि प्रश्नकाल सभी माननीय सदस्यों का समय होता है और इसमें जनता से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल पूछे जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज की कार्यसूची में राजपाल सैनी और प्रियंका गांधी समेत कई अन्य सदस्यों के महत्वपूर्ण प्रश्न लगे थे, जिन पर चर्चा होनी अनिवार्य थी, लेकिन नारेबाजी के कारण देश के विकास से जुड़े इन मुद्दों पर संवाद नहीं हो पा रहा है।

ओम बिरला ने सदन के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश की 140 करोड़ जनता अपने प्रतिनिधियों से यह अपेक्षा रखती है कि वे संसद में बैठकर नीतिगत चर्चा और रचनात्मक संवाद करेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता ने सांसदों को पोस्टर लहराने या गला फाड़कर नारेबाजी करने के लिए चुनकर संसद नहीं भेजा है। उन्होंने सदन की गरिमा का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि जिस तरह से सभागृह की मर्यादाओं को समाप्त किया जा रहा है, वह लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत है। स्पीकर ने दो-टूक शब्दों में कहा कि यदि विपक्ष इसी तरह नियोजित तरीके से सदन की कार्यवाही में बाधा डालना चाहता है, तो वह इस माहौल में सदन का संचालन नहीं कर सकते।

बजट सत्र के दौरान पिछले कई दिनों से संसद के दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का तर्क है कि वह हर विषय पर बहस के लिए तैयार है, बशर्ते सदन नियमानुसार चले। शुक्रवार को लोकसभा में दिखा दृश्य इसी टकराव की अगली कड़ी था। स्पीकर ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन विपक्षी सांसदों का विरोध जारी रहा। इस हंगामे के कारण सदन की उत्पादकता पर गंभीर असर पड़ा है, जिसका जिक्र स्पीकर ने समय के नुकसान का ब्योरा देकर किया।

लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर भी जोर दिया कि संसद चर्चा और संवाद का सबसे बड़ा मंदिर है, लेकिन इसे राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का केंद्र बनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि 19 घंटे से अधिक का समय जो बर्बाद हुआ है, उसमें जनता के टैक्स का पैसा और विकास के एजेंडे का नुकसान शामिल है। विपक्ष के इस रवैये को उन्होंने ‘नियोजित गतिरोध’ करार दिया, जिसका अर्थ है कि यह अनायास नहीं बल्कि जानबूझकर सदन को ठप करने की कोशिश है।

हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बजट सत्र के शेष दिनों में भी यह तनाव कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि दोनों ही पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। स्पीकर की इस कड़ी नाराजगी के बाद अब यह देखना होगा कि क्या सोमवार को सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाती है या फिर 19 घंटे की यह बर्बादी और भी आगे बढ़ती है। फिलहाल, ओम बिरला के इस कड़े संदेश ने सदन के भीतर सांसदों की जवाबदेही और संसदीय मर्यादाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है।

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