• February 11, 2026

गढ़चिरौली में नक्सलियों के साथ भीषण मुठभेड़: तीन माओवादी ढेर, अभियान में C-60 कमांडो ने भी दी शहादत

गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच पिछले तीन दिनों से जारी मुठभेड़ में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। अब तक इस अभियान में एक महिला समेत कुल तीन नक्सलियों को मार गिराया गया है। हालांकि, इस ऑपरेशन के दौरान राष्ट्र ने अपना एक वीर सपूत भी खो दिया है। नक्सलियों के साथ हुई आमने-सामने की फायरिंग में गंभीर रूप से घायल हुए C-60 यूनिट के जवान दीपक चिन्ना मदावी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित घने जंगलों में चलाया जा रहा है, जहां अभी भी रुक-रुक कर गोलीबारी होने की सूचना मिल रही है।

सुरक्षाबलों को इस क्षेत्र में नक्सलियों की एक बड़ी साजिश के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि गढ़चिरौली-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) सीमा पर फोडेवाड़ा गांव के पास माओवादियों की ‘कंपनी नंबर 10’ के कैडर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए जमा हुए हैं। इसी इनपुट के आधार पर मंगलवार, 3 फरवरी को एसडीपीओ भामरागड के नेतृत्व में एक व्यापक नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया गया। इस ऑपरेशन में पुलिस की विशिष्ट नक्सल विरोधी इकाई C-60 की 14 टुकड़ियों को शामिल किया गया था। जवानों ने योजनाबद्ध तरीके से नक्सलियों की घेराबंदी शुरू की, जिसके बाद बुधवार को नक्सलियों ने खुद को घिरा देख सुरक्षाबलों पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी।

मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए नक्सलियों के दो बड़े शिविरों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। गुरुवार की सुबह अभियान को और मजबूती देने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की चार अतिरिक्त C-60 यूनिटों और क्विक एक्शन टीम (QAT) की एक यूनिट को मौके पर तैनात किया गया। जैसे-जैसे सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ा, सुरक्षाबलों को सफलता मिलनी शुरू हुई। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, गुरुवार को पहले एक नक्सली का शव बरामद हुआ था, जिसके पास से एक एके-47 राइफल और एक सेल्फ-लोडिंग राइफल (SLR) जैसे घातक हथियार मिले थे। इसके कुछ घंटों बाद तलाशी अभियान में दो और शव बरामद किए गए, जिनमें से एक महिला नक्सली का है।

मारे गए तीनों नक्सलियों की पहचान अभी तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है, लेकिन उनके पास से बरामद हथियारों की खेप यह दर्शाती है कि वे माओवादी संगठन के महत्वपूर्ण कैडर हो सकते हैं। पुलिस का मानना है कि इस मुठभेड़ में कई अन्य नक्सली भी घायल हुए हैं जो घने जंगलों की आड़ लेकर भागने में सफल रहे। उनकी तलाश में पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और जंगलों में सघन तलाशी अभियान (कॉम्बिंग ऑपरेशन) चलाया जा रहा है।

इस बड़ी सफलता के बीच सुरक्षाबलों के लिए एक दुखद खबर भी आई। अभियान के दौरान नक्सलियों की ओर से की गई भारी गोलीबारी में C-60 कमांडो दीपक चिन्ना मदावी (38) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल भामरागड के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन घाव गहरे होने के कारण उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। शहीद जवान दीपक की शहादत से पुलिस विभाग में शोक की लहर है। इसी मुठभेड़ में एक अन्य जवान जोगा मदावी भी घायल हुए हैं, जिन्हें समय रहते एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक जोगा मदावी की हालत अब खतरे से बाहर है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए जल्द ही गढ़चिरौली के मुख्य अस्पताल में स्थानांतरित किया जाएगा।

गढ़चिरौली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि नक्सलियों की ‘कंपनी नंबर 10’ इस क्षेत्र में सक्रिय सबसे खतरनाक समूहों में से एक मानी जाती है। फोडेवाड़ा गांव के पास उनकी मौजूदगी की सूचना मिलना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बावजूद, सुरक्षाबलों ने जिस तरह से नक्सलियों के ठिकानों को नष्ट किया है, वह नक्सलवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पुलिस ने घटनास्थल से भारी मात्रा में गोला-बारूद, माओवादी साहित्य और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी बरामद की हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि नक्सली वहां लंबे समय तक रुकने की तैयारी में थे।

महाराष्ट्र के गृह विभाग और पुलिस प्रशासन ने शहीद जवान दीपक मदावी के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। अधिकारियों का कहना है कि हमारे जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और जिले को नक्सल मुक्त करने का संकल्प और मजबूत हुआ है। सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते दबाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है ताकि सीमा पार भागने की कोशिश कर रहे नक्सलियों को पकड़ा जा सके। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सलियों के ‘कंपनी नंबर 10’ के शिविरों का नष्ट होना इस क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।

वर्तमान में, मुठभेड़ स्थल के आसपास के गांवों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और ड्रोन कैमरों के जरिए भी जंगलों की निगरानी की जा रही है। पुलिस महानिरीक्षक और जिला पुलिस अधीक्षक लगातार अभियान की समीक्षा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में मारे गए नक्सलियों की शिनाख्त होने के बाद संगठन में उनके कद और उनकी गतिविधियों के बारे में अधिक जानकारी मिलने की संभावना है।

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