उत्तराखंड में पर्यटन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: राज्य गठन के बाद पहली बार पर्यटकों का आंकड़ा 6 करोड़ के पार
देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड ने पर्यटन और तीर्थाटन के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। हिमालय की शांत आबोहवा, चारधामों के प्रति अटूट वैश्विक आस्था और राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों के चलते उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों की संख्या ने अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। राज्य गठन के बाद यह पहला अवसर है जब एक कैलेंडर वर्ष में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का कुल सालाना आंकड़ा 6 करोड़ की जादुई संख्या को पार कर गया है। वर्ष 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल 6 करोड़ 3 लाख 21 हजार 194 सैलानियों ने उत्तराखंड की खूबसूरती और आध्यात्मिकता का अनुभव किया।
पर्यटन विभाग द्वारा जारी विस्तृत आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि उत्तराखंड की इस ऐतिहासिक उपलब्धि में धर्मनगरी हरिद्वार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। साल भर में सबसे अधिक 3.42 करोड़ से ज्यादा पर्यटक और तीर्थयात्री अकेले हरिद्वार पहुंचे हैं। हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या 3 करोड़ 42 लाख 49 हजार 380 दर्ज की गई। इसके बाद राजधानी देहरादून सैलानियों की दूसरी सबसे पसंदीदा पसंद रही, जहाँ 67 लाख 35 हजार 71 लोगों ने दस्तक दी। वहीं, टिहरी जनपद ने भी अपनी नई पहचान स्थापित करते हुए 53 लाख 29 हजार 759 सैलानियों की मेजबानी की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने पर्यटन को अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार के रूप में विकसित करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। धामी सरकार ने न केवल तीर्थस्थलों और पर्यटन केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया, बल्कि पर्यटकों की सुरक्षा को भी अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल किया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और उत्तराखंड के प्रति उनके विशेष लगाव ने राज्य को विश्व पटल पर एक नई पहचान दी है। विशेष रूप से प्रधानमंत्री द्वारा ‘आदि कैलाश’ और सीमावर्ती क्षेत्रों के भ्रमण के बाद देश-दुनिया के लोगों में इन अछूते पर्यटन स्थलों के प्रति जिज्ञासा और आकर्षण बढ़ा है।
आंकड़ों की तुलनात्मक समीक्षा करें तो उत्तराखंड में पर्यटन की रफ्तार लगातार बढ़ती दिख रही है। साल 2021 में जहाँ पर्यटकों की संख्या लगभग 2 करोड़ थी, वहीं 2022 में यह तेजी से उछलकर 5.39 करोड़ तक पहुँच गई। साल 2023 और 2024 में यह आंकड़ा 5.96 करोड़ और 5.95 करोड़ के आसपास स्थिर रहा, लेकिन वर्ष 2025 में प्रदेश सरकार की नीतियों और सुधरे हुए बुनियादी ढांचे ने इसे 6 करोड़ के पार पहुंचा दिया। सबसे सुखद पहलू यह है कि इस भीड़ में केवल घरेलू पर्यटक ही शामिल नहीं हैं, बल्कि 1 लाख 92 हजार 533 विदेशी सैलानियों ने भी उत्तराखंड के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया है।
राज्य सरकार अब उत्तराखंड को केवल ‘समर डेस्टिनेशन’ (गर्मियों का गंतव्य) के बजाय ‘ऑल वेदर डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यटन उत्तराखंड की आजीविका की रीढ़ है। सरकार का लक्ष्य है कि पर्यटन की गतिविधियां साल के बारहों महीने जारी रहें, ताकि स्थानीय निवासियों और युवाओं को स्वरोजगार और रोजगार के अवसर साल भर उपलब्ध हो सकें। इसी कड़ी में ‘शीतकालीन यात्रा’ को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार के प्रयासों से अब सर्दियों के दौरान भी चारधाम के शीतकालीन पड़ावों और अन्य हिल स्टेशनों पर पर्यटकों की आवाजाही पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है।
पर्यटन विभाग ने ढांचागत विकास के साथ-साथ होमस्टे योजना, साहसिक खेलों (Adventure Sports) और ईको-टूरिज्म पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है। सड़कों की स्थिति में सुधार, ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट और रेल नेटवर्क के विस्तार ने दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच को आसान बना दिया है, जिसका सीधा असर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के रूप में दिख रहा है। सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं ने भी यात्रियों का विश्वास जीता है।
6 करोड़ पर्यटकों का यह रिकॉर्ड न केवल राज्य की आय में वृद्धि करेगा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड की सुरक्षित और सुव्यवस्थित छवि को भी मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि संख्या बढ़ना खुशी की बात है, लेकिन सरकार का अगला लक्ष्य इस बढ़ती संख्या के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन और हिमालयी पारिस्थितिकी का संरक्षण करना भी है, ताकि यह विकास सतत बना रहे। उत्तराखंड की यह ऐतिहासिक वृद्धि दर्शाती है कि आने वाले समय में देवभूमि दक्षिण एशिया के सबसे बड़े पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने के लिए पूरी तरह तैयार है।