बजट सत्र 2026: कांग्रेस का प्रधानमंत्री पर तीखा हमला, जयराम रमेश ने मोदी के संबोधन को बताया ‘पाखंडपूर्ण संदेश’
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सत्र की शुरुआत में दिए गए पारंपरिक संबोधन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन पर ‘पाखंडी’ होने का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस के संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने गुरुवार को प्रधानमंत्री के बयानों को खारिज करते हुए कहा कि वे प्रत्येक सत्र से पहले देश को एक ही तरह का पाखंडी संदेश देते हैं, जबकि असलियत उनके दावों के बिल्कुल उलट है।
संसद भवन परिसर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री कभी भी राष्ट्रीय महत्व के संवेदनशील मुद्दों पर विपक्ष को विश्वास में लेने के लिए सर्वदलीय बैठकें नहीं बुलाते और न ही ऐसी बैठकों की अध्यक्षता करते हैं। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की रणनीति हमेशा से विपक्ष को दरकिनार करने की रही है। रमेश के अनुसार, प्रधानमंत्री संसद में बैठकर विपक्षी नेताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं का जवाब देने के बजाय दोनों सदनों के मंच का उपयोग केवल चुनावी रैलियों जैसे भाषण देने के लिए करते हैं।
विधायी प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए जयराम रमेश ने कहा कि यह सरकार की पुरानी आदत बन गई है कि वह अंतिम समय में अचानक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करती है और बिना किसी आवश्यक विधायी जांच या संसदीय समितियों के पास भेजे, उन्हें जल्दबाजी में पारित करवा लेती है। उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन को एक ‘तैयार पटकथा’ बताया और कहा कि प्रत्येक सत्र की शुरुआत में संसद को एक पृष्ठभूमि की तरह इस्तेमाल कर वे अपना वही पुराना ‘देश के नाम संदेश’ देते हैं, जो केवल पाखंड से भरा होता है। कांग्रेस के अनुसार, आज का प्रधानमंत्री का प्रदर्शन इसी श्रृंखला की एक नई कड़ी मात्र है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए भारत की बदलती वैश्विक छवि और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज आत्मविश्वास से भरा हुआ है और दुनिया के लिए ‘आशा की किरण’ बनकर उभरा है। उन्होंने विशेष रूप से यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का जिक्र करते हुए इसे ‘महत्वाकांक्षी भारत’ के लिए एक बड़ा अवसर बताया। प्रधानमंत्री ने देश के निर्माताओं और उद्यमियों से आग्रह किया कि वे उनके लिए खुल रहे वैश्विक बाजारों का पूरा लाभ उठाएं और भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएं।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों को परोक्ष संदेश देते हुए कहा कि अब देश के सामने बाधाएं पैदा करने का समय नहीं, बल्कि समाधान खोजने का समय है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार लंबे समय से लंबित समस्याओं से देश को उबार रही है और केवल फाइलों के निपटारे तक सीमित नहीं है। मोदी ने जोर देकर कहा कि सरकार का लक्ष्य कल्याणकारी योजनाओं की ‘अंतिम मील तक डिलीवरी’ (Last-mile delivery) सुनिश्चित करना है। उन्होंने विकास के मॉडल को ‘मानव-केंद्रित’ बताते हुए कहा कि देश का सर्वांगीण विकास ही उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री ने वर्तमान तिमाही की शुरुआत को ‘सकारात्मक’ बताया और कहा कि भारत आज ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार होकर दीर्घकालिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है। उनके अनुसार, भारत की विकास यात्रा अब रुकने वाली नहीं है और वैश्विक समुदाय भारत की ओर बड़े भरोसे के साथ देख रहा है। हालांकि, प्रधानमंत्री के इन दावों और कांग्रेस के ‘पाखंड’ वाले आरोपों ने यह साफ कर दिया है कि आगामी बजट सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है।
विपक्ष जहां बेरोजगारी, महंगाई और हालिया यूजीसी विवाद जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं सरकार अपने आर्थिक एजेंडे और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समझौतों को विकास की नई इबारत के तौर पर पेश कर रही है। जयराम रमेश के कड़े प्रहारों से स्पष्ट है कि कांग्रेस इस सत्र में सरकार को किसी भी मुद्दे पर ‘वॉकओवर’ देने के मूड में नहीं है। अब देखना यह होगा कि बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान सदन में जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होती है या फिर यह सत्र भी केवल आरोपों और प्रत्यारोप की भेंट चढ़ जाएगा।