गणतंत्र दिवस प्रोटोकॉल पर संग्राम: मल्लिकार्जुन खरगे का केंद्र पर बड़ा हमला, पूछा— ‘कैबिनेट रैंक के बावजूद तीसरी पंक्ति में क्यों बैठाया?’
नई दिल्ली: देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के भव्य आयोजन के बाद अब इस पर सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने समारोह के दौरान बैठने की व्यवस्था (Seating Arrangement) को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर प्रोटोकॉल के नियमों को ताक पर रखकर विपक्ष के शीर्ष नेताओं को अपमानित किया है। कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद उन्हें और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को मुख्य मंच के सामने पहली कतार के बजाय तीसरी कतर में जगह दी गई, जो सीधे तौर पर संवैधानिक गरिमा का उल्लंघन है।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन या सोची-समझी रणनीति?
मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय गौरव के अवसर पर सरकार को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस मंच का उपयोग विपक्ष को नीचा दिखाने के लिए किया। खरगे ने याद दिलाया कि उनके और राहुल गांधी के पास संवैधानिक रूप से कैबिनेट मंत्री का दर्जा है। आधिकारिक प्रोटोकॉल के नियमों के अनुसार, कैबिनेट रैंक वाले पदाधिकारियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं को अग्रिम पंक्ति (पहली कतार) में स्थान दिया जाना अनिवार्य है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “मैं देश के सबसे वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों में से एक हूं और विपक्ष के नेता के रूप में मेरी एक संवैधानिक जवाबदेही और गरिमा है। इसके बावजूद हमें तीसरी लाइन में बैठाया गया। जिस पंक्ति में हमें जगह दी गई, वहां राज्य मंत्री और बच्चे बैठे थे। यह केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि उस लोकतंत्र और संविधान का अपमान है जो विपक्ष को सरकार के बराबर का दर्जा देता है।” खरगे ने इस घटनाक्रम को सरकार की ‘अहंकारी’ मानसिकता का परिचायक बताया।
पास के लिए करनी पड़ी मशक्कत: खरगे का खुलासा
विवाद केवल बैठने की जगह तक सीमित नहीं रहा; खरगे ने समारोह के प्रवेश पास (Entry Passes) को लेकर भी सरकार के ढुलमुल रवैये की पोल खोली। उन्होंने खुलासा किया कि मुख्य विपक्षी दल के अध्यक्ष होने के नाते उन्हें पास मिलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। खरगे के अनुसार, सरकार की ओर से समय पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिसके चलते उन्हें अपने सचिवों को व्यक्तिगत रूप से भेजकर बैठने की व्यवस्था और पास के बारे में जानकारी जुटानी पड़ी। काफी भागदौड़ और प्रयासों के बाद ही उनके और उनके सहयोगियों के लिए पास का इंतजाम हो सका।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल किया कि जब सरकार विदेशी मेहमानों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के लिए महीनों पहले से तैयारी करती है, तो क्या देश के विपक्ष के नेता को एक उचित स्थान देना उनकी प्राथमिकता में शामिल नहीं है? उन्होंने इसे सरकार की एक संगठित कोशिश बताया ताकि विपक्ष को मुख्यधारा से दूर दिखाया जा सके।
संविधान और विपक्ष के सम्मान पर छिड़ी बहस
इस घटनाक्रम ने राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में ‘प्रोटोकॉल’ के पालन पर एक नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि गणतंत्र दिवस संविधान लागू होने का उत्सव है, और वही संविधान विपक्ष को एक महत्वपूर्ण स्थान देता है। यदि विपक्ष के नेताओं को पीछे की कतारों में धकेला जाता है, तो यह देश की लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए एक बुरा संकेत है। पार्टी के अन्य नेताओं ने भी इस मामले में खरगे का समर्थन करते हुए कहा है कि यह ‘न्यू इंडिया’ में विपक्ष की आवाज को दबाने का एक प्रतीकात्मक तरीका है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भी बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद होते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच की कड़वाहट ने इसे और अधिक संवेदनशील बना दिया है। राहुल गांधी को तीसरी पंक्ति में बैठाए जाने को लेकर भी कांग्रेस सोशल मीडिया पर आक्रामक है और इसे ‘लोकतंत्र की जननी’ कहे जाने वाले देश में विपक्ष की उपेक्षा करार दे रही है।
फिलहाल, केंद्र सरकार या रक्षा मंत्रालय (जो इस समारोह का आयोजन करता है) की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है। हालांकि, भाजपा के कुछ सूत्रों का कहना है कि बैठने की व्यवस्था एक विस्तृत प्रोटोकॉल सूची के आधार पर तय की जाती है और इसमें किसी व्यक्ति विशेष को अपमानित करने का कोई उद्देश्य नहीं होता। अब देखना यह है कि क्या सरकार संसद के आगामी सत्रों में इस मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का जवाब देगी या यह विवाद भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा।
मल्लिकार्जुन खरगे ने अंत में सरकार से मांग की है कि वह इस अपमानजनक व्यवहार पर स्पष्टीकरण दे और सुनिश्चित करे कि भविष्य में राष्ट्रीय पर्वों पर संवैधानिक मर्यादाओं का पूर्ण पालन किया जाए।