• January 31, 2026

उत्तराखंड में कुदरत का सफेद प्रहार: केदारनाथ में भारी बर्फबारी और दून में झमाझम बारिश, बिगड़े मौसम के चलते स्कूल बंद

देहरादून/रुद्रप्रयाग: देवभूमि उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में जहां भारी हिमपात हो रहा है, वहीं मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। मंगलवार को राजधानी देहरादून सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया। केदारनाथ धाम सहित हिमालय की ऊंची चोटियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है, जिसके कारण समूचे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी ‘ऑरेंज अलर्ट’ और बिगड़ते हालात को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी किया है।

मंगलवार तड़के से ही उत्तराखंड के मौसम में नाटकीय बदलाव देखा गया। राजधानी देहरादून में सुबह की शुरुआत घने बादलों और तेज हवाओं के साथ हुई, जिसके बाद झमाझम बारिश का सिलसिला शुरू हो गया। बारिश के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है और दून घाटी शीतलहर की चपेट में है। दूसरी ओर, ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ के धाम में सोमवार देर रात से ही बर्फबारी का दौर जारी है। मंदिर परिसर और आसपास की पहाड़ियों पर बर्फ की मोटी परत जम गई है, जिससे वहां पुनर्निर्माण कार्यों में भी बाधा आ रही है। केवल केदारनाथ ही नहीं, बल्कि बद्रीनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री की ऊंची चोटियों पर भी लगातार हिमपात हो रहा है।

चमोली जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में कुदरत का कहर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। रूपकुंड, नंदा घुंघटी और त्रिशूल पर्वत श्रृंखलाओं में कल रात से ही बर्फबारी थमी नहीं है। विश्व प्रसिद्ध शीतकालीन पर्यटन केंद्र औली और ज्योर्तिमठ (जोशीमठ) क्षेत्र में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पहाड़ों से आ रही बर्फीली हवाओं ने निचले इलाकों में ठिठुरन बढ़ा दी है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग और केदारनाथ पैदल मार्ग पर पाला जमने के कारण फिसलन बढ़ गई है, जिससे आवाजाही जोखिम भरी हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है।

प्रशासन की मुस्तैदी: देहरादून में स्कूलों की छुट्टी

मौसम विभाग (IMD) ने आज यानी 27 जनवरी के लिए देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में मौसम के और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई है। विभाग द्वारा जारी ‘ऑरेंज अलर्ट’ के अनुसार, अगले 24 घंटों में तेज गर्जना के साथ भारी बारिश, ओलावृष्टि और ऊंचाई वाले ग्रामीण इलाकों में बर्फबारी की प्रबल संभावना है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए देहरादून के जिलाधिकारी ने जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद रखने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल देहरादून जिले के लिए प्रभावी है, जबकि अन्य जिलों में वहां की स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन ने स्कूल संचालकों को आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा है। साथ ही, अभिभावकों से अपील की गई है कि वे मौसम की प्रतिकूलता को देखते हुए बच्चों को घरों के भीतर ही सुरक्षित रखें। प्रशासन ने राजस्व विभाग और आपदा प्रबंधन टीम को हाई अलर्ट पर रखा है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या भूस्खलन जैसी घटनाओं से तुरंत निपटा जा सके।

पर्वतीय क्षेत्रों में दुश्वारियां और पर्यटकों का उत्साह

बर्फबारी के कारण जहां एक ओर स्थानीय निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, वहीं दूसरी ओर पर्यटकों के चेहरे खिल उठे हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले गांवों में पेयजल लाइनें जमने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की खबरें मिल रही हैं। बर्फबारी के चलते कई लिंक रोड बंद हो गए हैं, जिन्हें खोलने के लिए लोक निर्माण विभाग की मशीनरी तैनात की गई है। इसके उलट, बर्फबारी की खबर मिलते ही धनोल्टी, मसूरी और चकराता जैसे पर्यटन स्थलों की ओर सैलानियों का रुख बढ़ने लगा है। व्यापारियों को उम्मीद है कि इस बर्फबारी से पर्यटन व्यवसाय को नई गति मिलेगी।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण अगले 48 घंटों तक उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर भारी बर्फबारी जारी रह सकती है। इसका सीधा असर उत्तर भारत के अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, पंजाब और हरियाणा पर भी पड़ेगा, जहां न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है।

जिला प्रशासन ने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सीमांत क्षेत्रों में तैनात सेना और आईटीबीपी के जवानों के लिए भी रसद और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। आपदा प्रबंधन केंद्र पल-पल की रिपोर्ट ले रहा है और आपातकालीन नंबरों को सक्रिय कर दिया गया है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड इस समय शीतलहर और बर्फबारी की दोहरी मार झेल रहा है। प्रशासन की ओर से की गई त्वरित कार्रवाई और स्कूलों की छुट्टी ने निश्चित रूप से एक बड़ी राहत प्रदान की है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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