मिशन बंगाल: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का पहला रण, दुर्गापुर-आसनसोल से फूंकेंगे चुनावी शंखनाद
कोलकाता/दुर्गापुर: पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भाजपा के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन आज से अपने दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे की शुरुआत कर रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद यह उनका किसी भी राज्य का पहला चुनावी और संगठनात्मक दौरा है, जिसके लिए उन्होंने ‘राढ़ बंगाल’ के औद्योगिक क्षेत्र को चुना है। नितिन नवीन का यह दौरा न केवल कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए है, बल्कि इसके जरिए भाजपा राज्य के उस महत्वपूर्ण औद्योगिक बेल्ट को वापस पाने की कोशिश कर रही है, जहां पिछले कुछ चुनावों में उसे नुकसान उठाना पड़ा था।
नितिन नवीन के इस दौरे की सबसे चौंकाने वाली और चर्चा का विषय बनी बात यह है कि वे अपनी पहली यात्रा के दौरान राज्य की राजधानी कोलकाता नहीं जा रहे हैं। आमतौर पर किसी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष का पहला दौरा राजधानी से शुरू होता है, लेकिन नवीन का सीधे दुर्गापुर और आसनसोल जाना एक गहरी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि वे बर्धमान जाते समय कोलकाता में कुछ समय के लिए रुक सकते हैं, लेकिन उनके अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम में कोलकाता का नाम शामिल नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार प्रतीकात्मक राजनीति के बजाय सीधे उन क्षेत्रों पर प्रहार करना चाहती है, जो चुनावी जीत-हार के समीकरण तय करते हैं।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, भाजपा प्रमुख आज शाम करीब 4 बजे अंडाल स्थित घरेलू हवाई अड्डे पर उतरेंगे। वहां से वे सीधे दुर्गापुर के चित्रालय मेला ग्राउंड पहुंचेंगे, जहां वे ‘कमल मेला’ में सम्मिलित होंगे। यह मेला पार्टी की सांस्कृतिक और सामाजिक पहुंच बढ़ाने का एक बड़ा जरिया माना जा रहा है। इसके उपरांत, वे देर शाम पार्टी के शीर्ष स्थानीय पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक करेंगे। दौरे के दूसरे दिन यानी बुधवार की शुरुआत वे धार्मिक अनुष्ठान के साथ करेंगे। वे बिरिंगी काली मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे, जिसके बाद चित्रालय मैदान में एक और बड़ी संगठनात्मक बैठक की अध्यक्षता करेंगे। दोपहर बाद वे आसनसोल के रानीगंज क्षेत्र का रुख करेंगे, जहां वे कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे और फिर शाम को अंडाल से वापसी की उड़ान भरेंगे।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि नवीन का मुख्य ध्यान पार्टी की जमीनी ताकत को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं के बीच आपसी मतभेदों को दूर कर उन्हें एकजुट करने पर है। ‘राढ़ बंगाल’ क्षेत्र, जिसमें पूर्वी और पश्चिमी बर्धमान, बांकुरा, पुरुलिया और बीरभूम जैसे जिले शामिल हैं, कभी बंगाल में भाजपा के विस्तार का मुख्य केंद्र हुआ करता था। साल 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने यहां की आठ संसदीय सीटों में से पांच पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी इस गति को बरकरार नहीं रख पाई और क्षेत्र की 57 सीटों में से केवल 18 पर सिमट गई। 2024 के लोकसभा चुनावों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई, जब भाजपा अपनी जीती हुई सीटों में से केवल दो पर ही वापसी कर सकी।
विशेष रूप से दुर्गापुर और आसनसोल को भाजपा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस औद्योगिक क्षेत्र में गैर-बंगाली मतदाताओं की एक बड़ी आबादी रहती है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा का समर्थन करती रही है। हालांकि 2024 में भाजपा बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट हार गई थी, लेकिन आंतरिक आंकड़ों के अनुसार, दुर्गापुर पश्चिम जैसे विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी का संगठन अभी भी काफी मजबूत है। नितिन नवीन की कोशिश इसी ‘कोर वोटर’ को फिर से सक्रिय करने और उन कमियों को दूर करने की है, जिनकी वजह से पिछले चुनावों में जीत हाथ से फिसल गई थी।
नितिन नवीन का यह दौरा बंगाल भाजपा के लिए एक परीक्षा की घड़ी भी है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह राजधानी की राजनीति से इतर सीधे उन श्रमिक और औद्योगिक क्षेत्रों में पहुंच रही है, जहां की समस्याएं और चुनावी मुद्दे अलग हैं। कोलकाता को छोड़ सीधे औद्योगिक बेल्ट में उतरना यह दर्शाता है कि भाजपा अब ‘टॉप-डाउन’ अप्रोच के बजाय ‘बॉटम-अप’ रणनीति पर काम कर रही है। अब देखना यह होगा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस दौरे से पश्चिम बंगाल के कार्यकर्ताओं में कितनी ऊर्जा का संचार होता है और आगामी चुनावों में यह रणनीति भाजपा के लिए कितनी फलदायी साबित होती है।